
एक हाथ में संविधान, दूसरे में मनुस्मृति लिए हुए जिग्नेश मेवाणी
रैली की भीड़ पर सोशल मीडिया पर युद्ध
रैली में ज्यादा लोग नहीं पहुंचे. जो पहुंचे भी थे उनमें से कई लोग जिग्नेश मेवाणी के बोलने से पहले ही चल निकले. विपक्ष खासकर बीजेपी को मौका मिल गया. तुरंत जिग्नेश मेवाणी की रैली को फ्लॉप करार दिया गया. खाली कुर्सियों वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. बीजेपी नेता प्रीति गांधी ने ट्विटर पर खाली पड़ी कुर्सियों की फोटो डाल दी. साथ में लिख दिया 'देश तोड़ने वालों के मुंह पर करारा तमाचा. मंच पर ज्यादा लोग हैं, मंच से नीचे कम.'जो जिग्नेश मोदी सरकार की तबीयत ठीक करने की बात कर रहे थे वो कैसे पीछे रहते. उन्होंने मंच से खींची तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट पर डाल दी. लिखा 'अफवाह थी कि रैली कैंसल है, मीडिया ने पूछ-पूछ कर रैली को जनसैलाब बना दिया'. रैली जनसैलाब नहीं बन पाई. संसद मार्ग पर उतने लोग नहीं पहुंचे जितने की उम्मीद गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने की थी. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने जंतर-मंतर पर रैलियां और धरना प्रदर्शन पर रोक लगाई है. पुलिस ने इसी आधार पर इस रैली को इजाजत नहीं दी थी. कहा चाहें तो कहीं और जाकर प्रदर्शन कर लें. फिर भी जिग्नेश और उनके समर्थक आए.

जिग्नेश ने रैली को जनसैलाब बताया, बीजेपी ने फ्लॉप शो
रैली के बारे में अफवाह
इस बीच रैली के बारे में एक अफवाह फैल गई. कुछ लोगों ने दावा कर दिया कि मेवाणी संसद मार्ग के बजाय गीता कॉलोनी के रानी गार्डन अंबेडकर पार्क में रैली करेंगे. पुलिस तक खबर पहुंची तो जल्दबाज़ी में पुलिसवालों को वहां भेज दिया गया. लेकिन वहां कुछ न हुआ.जिग्नेश मेवाणी ने मंच से आरोप लगाया कि मोदी सरकार संविधान और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा है. उनकी मांगों में यूपी के दलित नेता चंद्रशेखर आजाद की जेल से रिहाई प्रमुख थी. लगे हाथ दलितों से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए गए. जिग्नेश एक हाथ में संविधान की किताब ली थी दूसरी पर मनुस्मृति थी. मोदी से पूछ रहे थे बताएं कि वो किसके साथ हैं.
मेवाणी और उनका साथ देने आए कई बड़े चेहरों ने बड़े मुद्दे उठाए. सरकार से तीखे सवाल पूछे. जोरदार विरोध जारी रखने की बात कही. लेकिन भीड़ जुटाकर सरकार की तबीयत ठीक करने का मेवाणी का इरादा इस बार दिल्ली में सफल नहीं हो पाया?
दी लल्लनटॉप के लिए ये स्टोरी नीरज ने लिखी है












