ये लाइन शायद 2016-17 में इस्तेमाल की गई सबसे चर्चित लाइन्स में से है. इतनी चर्चा में रही बात सरकार तक कैसे नहीं पहुंची होगी? शायद पहुंच गई. इसीलिए बेहद ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तैनात जवानों की मुश्किलों को कम किया जा रहा है. उनके लिए खास चौकियां बनाई जा रही हैं. हर मौसम के लिए मुफीद. यहां जवानों को सारे आराम मिलेंगे. हर जरूरी सहूलियत मिलेगी. और सबसे जरूरी- उन्हें सर्दी नहीं सताएगी.

ये ITBP की एक पोस्ट है. 14,000 फुट से ज्यादा ऊंचाई पर. ट्रैकिंग के लिए जाओ और एक-दो दिन यूं बिताओ, तो लोगों को बड़ा जोश रहता है. मगर सालभर ऐसी जगह पर रहना बहुत मुश्किल है.
सबसे ज्यादा फायदा हो रहा है ITBP के जवानों को चीन से सटी भारत की सीमा का एक बड़ा हिस्सा बेहद ऊंचाई पर है. वहां गर्मियां पड़ती ही नहीं. मौसम कुछ ऐसा रहता है- ठंड, बहुत ठंड, बहुत ज्यादा ठंड. कई चौकियां तो ऐसी हैं, जहां का तापमान अक्सर शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है. फिलहाल इस तरह की 54 चौकियों पर 'ऑल वेदर आउटपोस्ट' बनाने का फैसला हुआ है. इनमें से 47 चौकियां इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) के हैं. ITBP उन्हीं इलाकों में तैनात है, जहां हमारी सीमा चीन से मिलती है. यानी- लद्दाख, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश. इनमें से एक चौकी लद्दाख की लुकुंग घाटी में करीब-करीब तैयार हो चुकी है. करीब 20 करोड़ रुपये की लागत आई है इसकी. रुड़की और दिल्ली वाले IIT के इंजिनियरों ने डिजाइन बनाया है. फुल देसी 'मेक इन इंडिया'.
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