Iran Israel War: ईरान के खिलाफ जंग में इजरायल केवल मिसाइलों के साथ नहीं उतरा था. इस जंग में वह ईरान के लोगों के ‘दिमाग’ से भी खेल रहा था. ये बात सब जानते हैं कि ईरानी शासन पिछले कई महीनों से सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जूझ रहा था. ईरान में इसी सरकार विरोधी भावना का इस्तेमाल इजरायल जंग में अपने फायदे के लिए करना चाहता था. इस काम के लिए उसने जो जरिया चुना, वह तो किसी की भी सोच से बाहर है. इसे इजरायल का ‘साइबर साइकोलॉजिकल ऑपरेशन’ कहा जा रहा है.
बम-मिसाइल नहीं, ईरान का ये नमाज वाला ऐप बना इजरायल का सबसे बड़ा हथियार
इजरायल ने ईरान के एक बहुत मशहूर प्रेयर ऐप ‘बादे-सबा’ को हैक किया. उसके जरिए लोगों और यहां तक कि ईरान के सैनिकों तक को मैसेज भेजे कि वह ईरानी शासन और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की रिवॉल्युशनरी गार्ड के खिलाफ विरोध जारी रखें.
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इसमें इजरायल ने ईरान के एक बहुत मशहूर प्रेयर ऐप ‘बाद-ए-सबा कैलेंडर’ को हैक किया. उसके जरिए लोगों और यहां तक कि ईरान के सैनिकों तक को मेसेज भेजे कि वह ईरानी शासन और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की रिवॉल्युशनरी गार्ड के खिलाफ विरोध जारी रखें और जरूरत पड़ी तो उनके खिलाफ जंग की तैयारी कर लें. ऐप के जरिए जो मेसेज लोगों को भेजे गए उसमें Help Arrived यानी ‘मदद पहुंच गई है’ और ‘अपने हथियार डाल दो और लिबरेशन आर्मी में शामिल हो जाओ’ जैसी बातें थीं.
28 फरवरी को जब इजरायली मिसाइलें तेहरान की ओर हवा में थीं, ठीक उसी वक्त अजान के अलर्ट का इंतजार कर रहे ईरान के लोगों के फोन में ऐसे मेसेज चमके. वो भी उस ऐप पर, जिस पर ईरान के लोग सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं. वो ऐप जिसे 50 लाख से ज्यादा लोग रोज दिन में 5 बार देखते हैं क्योंकि इसी ऐप के जरिए धार्मिक सूचनाएं उन तक पहुंचती हैं.
बाद-ए-सबा ऐपा ईरान का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला इस्लामी प्रार्थना ऐप है. यूजर्स को यह इस्लामिक हिजरी कैलैंडर दिखाता है. रोज पांच वक्त की नमाज के लिए रिमाइंडर भेजता है. नमाज का वक्त होता है तो इसकी लॉक स्क्रीन पर भी अजान की रिंगटोन सुनाई देती है. इसके अलावा अहम इस्लामी त्योहारों के बारे में भी यह ऐप लोगों को सूचना देता है.
ईरान के लोग इस ऐप पर गाढ़ा भरोसा रखते हैं. हर दिन 5 बार इसे चेक करते हैं. इस ऐप के किसी ऐक्शन पर कोई सवाल नहीं उठाते. गूगल प्लेस्टोर के मुताबिक, 50 लाख से ज्यादा लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है. कई अन्य थर्डपार्टी प्लेटफॉर्म्स पर भी ये ऐप डाउनलोड के लिए उपलब्ध हैं. यानी इसके यूजर्स की संख्या 50 लाख से भी ज्यादा हो सकती है.
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इजरायल ने ईरान के इसी भरोसेमंद ऐप को हैक कर लिया ताकि वो वहां की जनता के दिमाग में ऐसे संदेश पहुंचा सके कि वह उनकी मदद के लिए हमला कर रहा है.
इंडिया टुडे की टीम ने 28 फरवरी की सुबह लाखों ईरानी फोन्स पर आए फारसी नोटिफिकेशन्स का एनालिसिस किया है. इन पर जो मेसेज आए थे वो काफी परिचित फॉर्मेट में थे, लेकिन पॉलिटिकल थे. इसमें लिखा था, “बदले का वक्त आ गया. शासन की दमनकारी सेना बेकसूर ईरानी लोगों पर अपनी क्रूरता की सजा भुगतेंगी. जो भी ईरानी देश की रक्षा में शामिल होंगे उन्हें माफी मिलेगी.”
सिर्फ इतना ही नहीं, इसके कुछ देर बाद यानी सवा 10 बजे एक फॉलोअप मेसेज भी आया. ये मेसेज ईरान की आजादी के सपोर्ट में था. इसमें लिखा था, “अपने हथियार डाल दो या लिबरेशन फोर्सेस में शामिल हो जाओ.”
लोगों के पास जैसे अजान के लिए रिमाइंडर आता है, उसी तरह ये मेसेज उनके फोन पर पहुंचे थे. जनता को तो छोड़िए, इसमें ईरानी आर्म्ड फोर्सेस से भी अपील की गई थी कि वो IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर) और खामेनेई शासन के खिलाफ हो जाएं.
इनकी टाइमिंग भी ऐसी परफेक्ट थी कि कह सकते हैं लोगों के फोन में ये मेसेज और ईरान की धरती पर इजरायली मिसाइलें एक साथ गिरी होंगी. बाद-ए-सबा ऐप का चुनाव भी काफी सोच-समझकर किया गया था क्योंकि लोगों को इस ऐप पर तुरंत भरोसा हो जाता. इसकी पहुंच हर उम्र के ईरानियों तक है और सबसे अहम बात कि ये ईरान का लोकल ऐप है. फॉरेन ऐप ब्लॉक हो जाता, लेकिन सेंसर वाले इंटरनेट में भी ये ऐप फ्री में चलता है.
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बात यहीं खत्म नहीं होती. इस ‘साइबर अटैक’ के बाद भी पिक्चर अभी बाकी थी. इस स्ट्राइक के बाद ईरान में 36 घंटे तक इंटरनेट ब्लैकआउट यानी ठप हो गया. इससे लोग ऐप पर आए मेसेज को वेरिफाई नहीं कर पाए.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बाद-ए-सबा ऐप तो सिर्फ एक फ्रंट था. इसके अलावा ईरान के बड़े मीडिया हाउसेज पर भी साइबर अटैक हुआ. इनमें IRNA, ISNA, Tabnak, और Asr-e Iran शामिल हैं. मकसद साफ था. ईरान के पूरे इन्फॉर्मेशन इकोसिस्टम को निशाना बनाना ताकि लोगों के न्यूज सोर्स को साइलेंट करके उनके सोचने-समझने के जरिए को खत्म किया जा सके. और ये सब तब किया गया जब इजरायल की मिसाइलें हवा में थीं.
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