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गाजा में 20 हजार बच्चे मारे, प्लान बनाकर किया अपंग... इजरायल का जाहिलपन सामने आया

Israel targeting Palestinian children: UN से जुड़े जांच आयोग के मुताबिक, इजरायली सेना ने जान-बूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाया. आयोग ने दावा किया कि रिहायशी इलाकों और स्कूलों पर हमलों में 20,000 से ज्यादा बच्चे मारे गए. एक-एक बात पता लगी.

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गाजा जंग का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ा है. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

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  • संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि गाजा क्षेत्र के घने रिहायशी इलाकों, स्कूलों और कैंपों को लक्षित कर इजरायली सेना ने 20,000 से अधिक फिलिस्तीनी बच्चों की मृत्यु की।
  • 7 अक्टूबर, 2023 से 7 अक्टूबर, 2025 तक गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में हुई हिंसा के दौरान विशिष्ट हथियारों जैसे ड्रोन, स्नाइपर राइफल के इस्तेमाल ने बच्चों और नागरिक अवसंरचना को नुकसान पहुंचाया।
  • रिपोर्ट के सामने आने के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इसकी प्रस्तुति हुई और अब विश्व समुदाय से इजरायल से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कदम उठाने की मांग की जा रही है।

गाजा जंग के दौरान इजरायली सेना ने जान-बूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाया. संयुक्त राष्ट्र (UN) के स्वतंत्र जांच आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा किया. इस आयोग के अध्यक्ष भारतीय हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर हैं. उन्होंने सबूतों का हवाला देते हुए बताया कि इजरायली सेना ने घने रिहायशी इलाकों, स्कूलों और कैंपों पर हमले किए, जिसके चलते 20,000 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई (Israel targeting Palestinian children).

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'20,000 से ज्यादा बच्चों की मौत'

'ऑक्यूपाइड फिलिस्तीनी टेरिटरी' (कब्जे वाले फिलिस्तीनी इलाके) पर बने संयुक्त राष्ट्र के जांच कमीशन ने 23 जून को 100 पेज की रिपोर्ट जारी की. 'इंडिया टुडे' के साथ एक खास बातचीत में एस. मुरलीधर ने बताया कि रिपोर्ट से पता चलता है कि 7 अक्टूबर, 2023 से 7 अक्टूबर, 2025 के बीच गाजा, वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 20,000 से ज्यादा बच्चे मारे गए और 44,000 से ज्यादा बच्चे घायल हुए. 

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जानबूझकर निशाना बनाया

जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर ने बताया कि जंग के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है. उन्होंने कहा कि बच्चों को मारने और अपंग बनाने का काम बहुत सोच-समझकर और निशाना बनाकर किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायली सेना ने घनी आबादी वाले इलाकों में जबरदस्त तबाही मचाने वाले बमों का इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं, ड्रोन और स्नाइपर राइफल जैसे सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया. पूर्व चीफ जस्टिस ने कहा, 

"वे एक और तरीका अपनाते हैं, जिसमें क्वाडकॉप्टर, ड्रोन और स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल किया जाता है. इन क्वाडकॉप्टर का निशाना बहुत सटीक होता है."

एस. मुरलीधर ने डॉक्टरों और गवाहों के बयानों के साथ-साथ कमीशन द्वारा देखे गए वीडियो का भी जिक्र किया, जिनमें कैमरे पर बात करते हुए इजरायली सैनिकों के फुटेज भी शामिल थे. कुछ सैनिकों ने दूर से ही टारगेट की पहचान करने में सक्षम एडवांस्ड ड्रोन के इस्तेमाल के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने सिर और गर्दन पर गोली लगने से घायल बड़ी संख्या में बच्चों का इलाज करने की बात कही. डॉक्टरों ने कहा, 

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"हम देख रहे हैं कि बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे आ रहे हैं जिनके सिर और गर्दन पर एक ही गोली लगी है, जिससे उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है."

स्कूल, हॉस्पिटल और अनाथालय तबाह

रिपोर्ट में स्कूल, यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल और अनाथालय जैसे सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर के तबाह होने की भी जानकारी दी गई है. मुरलीधर ने कहा, 

"गाजा के 97% स्कूल पूरी तरह से नष्ट हो चुके हैं. कई बच्चे तीन साल से ज्यादा समय से फॉर्मल पढ़ाई से दूर हैं."

उन्होंने कहा कि कमीशन के सामने गवाही देने वाले डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने बड़ी संख्या में ऐसे बच्चों का इलाज किया जिन्होंने अपने पूरे परिवार खो दिए थे. आयोग ने हिरासत में नाबालिगों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों को भी दर्ज किया. 

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'सिर्फ निंदा नहीं, अब कार्रवाई का समय'

पूर्व चीफ जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा कि अब सिर्फ चिंता जताना काफी नहीं है. उन्होंने कहा, 

"सिर्फ नाराजगी या निंदा जताने का समय अब ​​बीत चुका है. हमें एक्शन लेने की जरूरत है."

उन्होंने इजरायल के साथ मिलिट्री, ट्रेड या डिप्लोमैटिक संबंध रखने वाले देशों से कहा कि वे गलत कामों में कथित तौर पर शामिल लोगों की जांच करें और जवाबदेही तय करने के लिए ‘यूनिवर्सल ज्यूरिस्डिक्शन’ के सिद्धांतों का इस्तेमाल करने पर विचार करें.

इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सामने आयोग की रिपोर्ट पेश की गई. मुरलीधर ने कहा कि इजरायल ने जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया है, लेकिन आयोग अब भी इजरायली अधिकारियों से जानकारी लेने के लिए तैयार है.

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