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गाजा, टैरिफ से लेकर आतंकवाद तक, जानिए 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' की 10 खास बातें

ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे मतभेद रखने वाले देशों के बीच भारत ने लंबी बातचीत के बाद BRICS के संयुक्त घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई. ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में एकतरफा टैरिफ, प्रतिबंधों और संरक्षणवाद का विरोध करते हुए बहुपक्षवाद, कूटनीति, ग्लोबल साउथ और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर जोर दिया गया.

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ब्रिक्स देशों के बीच सहमति के बाद डिक्लेरेशन जारी कर दिया गया है (PHOTO- Narendra Modi/X)

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  • भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनाई, जिसमें एकतरफा टैरिफ और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दिया गया है।
  • ब्रिक्स देशों के बीच ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे मतभेद और वेस्ट एशिया में हालिया संघर्षों के कारण बातचीत में बाधाएं थीं, जिन्हें सुलझाने का प्रयास किया गया।
  • इस सहमति से ब्रिक्स ने वैश्विक चुनौतियों पर बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का रास्ता प्रशस्त किया है।

एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के तौर पर भारत ने लंबी बातचीत के बाद ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर आम सहमति बना ली. यह सहमति सुबह करीब 4 बजे तक चली बातचीत के बाद बनी. ब्रिक्स देशों के बीच बनी इस सहमति को कई मायनों में अहम माना जा रहा है. क्योंकि सदस्यों में कई ऐसे देश हैं, जिनकी आपस में नहीं बनती. जैसे ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच कई मतभेद हैं. हाल ही में ईरान-अमेरिका की जंग की वजह से ये मतभेद और गहरे हो गए थे. 

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लिहाजा भारत के लिए ये बड़ी चुनौती थी कि इन देशों को एक साथ कैसे लाया जाए? चुनौती यह भी थी कि वेस्ट एशिया में चल रही जंग से ब्रिक्स के जॉइंट स्टेटमेंट में कोई दिक्कत न आए. ऐसे देश जो एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं, उनकी वजह से ब्रिक्स पर कोई असर न पड़े.

स्टेटमेंट में टैरिफ का जिक्र

ब्रिक्स के सभी 11 देशों ने शनिवार, 12 सितंबर को ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ पर हस्ताक्षर किए. इस डिक्लेरेशन में ‘एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों के बढ़ने’ पर गंभीर चिंता जताई गई है. कहा गया कि ये उपाय व्यापार को प्रभावित करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ हैं. साथ ही, इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ एकतरफा प्रेशर बनाने की भी निंदा की. घोषणापत्र में लड़ाइयों को रोकने के प्रयासों में ज्यादा भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया गया. कहा गया कि संघर्षों की मूल वजहों को दूर करना भी जरूरी है. इसके अलावा किसी भी मतभेद को बातचीत, सलाह-मशविरे और कूटनीति के जरिए सुलझाने पर जोर दिया गया.

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ब्रिक्स देशों ने इस बार बहुपक्षीय नजरिए की वकालत की है. ऐसा नजरिया जो अहम वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग देशों के विचारों और रुख का सम्मान करता हो. साथ ही ये अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने में बातचीत और सहयोग के महत्व पर जोर देता हो.

ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज

ब्रिक्स के स्टेटमेंट में UN चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात की गई है. इस स्टेटमेंट की कुछ खास बातों को देखें तो इसमें कहा गयाः

– ब्रिक्स ने UN चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित, ज़्यादा प्रतिनिधित्व वाले लोकतांत्रिक और बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
– वैश्विक संस्थाओं में उभरते बाज़ारों और विकासशील देशों खासकर अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन देशों की ज़्यादा भागीदारी की मांग की.
– UN सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन किया गया और UN (सुरक्षा परिषद सहित) में ब्राजील और भारत की बड़ी भूमिका के लिए चीन और रूस के समर्थन का स्वागत किया गया.
– ब्रिक्स ने विकासशील देशों की आवाज, वोटिंग पावर और नेतृत्व में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए IMF, विश्व बैंक और अन्य ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार की मांग की.
– इसने UN के वरिष्ठ पदों पर ज़्यादा भौगोलिक प्रतिनिधित्व और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया.
– एकतरफा प्रतिबंधों और संरक्षणवाद का विरोध किया.
– देशों ने एकतरफ़ा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की निंदा की और कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं और विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और मानवाधिकारों के लिए हानिकारक हैं.
– देशों ने एकतरफा टैरिफ की आलोचना की है. देशों का कहना है कि ऐसी चीजों जो वैश्विक व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित करते हैं.
– घोषणापत्र में पूरी तरह से काम करने वाले दो-स्तरीय WTO विवाद-निपटान तंत्र को बहाल करने की मांग की गई, जिसमें नए अपीलीय निकाय सदस्यों की नियुक्ति भी शामिल है.
– ब्रिक्स ने WTO में शामिल होने के लिए इथियोपिया और ईरान की कोशिशों का समर्थन किया और उन 53 अफ्रीकी देशों के लिए चीन की ज़ीरो-टैरिफ सुविधा का ज़िक्र किया जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध हैं.

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(यह भी पढ़ें: 'अच्छे पड़ोसी की तरह...', BRICS समिट में PM मोदी और जिनपिंग की मीटिंग से पहले चीन का बड़ा मैसेज)

वैश्विक संघर्षों पर रुख

ब्रिक्स ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने के लिए बातचीत, कूटनीति, निवारक कूटनीति और मध्यस्थता का आह्वान किया है. इजरायल-हमास की जंग में तबाह हुए गाजा के मुद्दे को भी इस बातचीत में शामिल किया गया है. गाजा पर ब्रिक्स ने कई चीजों को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है. जैसे-

  • युद्धविराम बनाए रखना.
  • पूरी तरह से और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंचाना
  • फिलिस्तीनियों को जबरदस्ती विस्थापित करने पर रोक.
  • नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा.
  • 1967 की सीमाओं पर आधारित दो-राज्य समाधान, जिसमें पूर्वी यरूशलेम फिलिस्तीन की राजधानी हो.
  • फिलिस्तीन के लिए पूर्ण UN सदस्यता.
  • इसने UNRWA के लिए समर्थन दोहराया और इज़राइल के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका द्वारा लाए गए मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के अंतरिम उपायों का ज़िक्र किया.
  • लेबनान पर ब्रिक्स ने युद्धविराम का स्वागत किया. UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को लागू करने की मांग की और लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने को कहा.
  • इसने UNIFIL पर हुए हमलों की निंदा की और जवाबदेही की मांग की. साथ ही इंडोनेशियाई और अन्य शांति सैनिकों की मौत का भी ज़िक्र किया.
  • सूडान के मामले में इसने तुरंत और स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की पहुंच और "अफ़्रीकी समस्याओं का अफ़्रीकी समाधान" अपनाने की मांग की.
  • सीरिया के मामले में इसने सीरिया के नेतृत्व वाली और UN की मदद से चलने वाली राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया और कब्ज़ा करने वाली सेनाओं को हटाने की मांग की.
आतंकवाद के खिलाफ एक मंच पर ब्रिक्स 
  • घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई और ज़ीरो टॉलरेंस (सख़्त रवैया), दोहरे मापदंडों को न मानने और इसमें शामिल लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई.
  • इसने विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे.
  • BRICS ने UN में 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक कन्वेंशन' (Comprehensive Convention on International Terrorism) को तेज़ी से अपनाने की मांग की.
इन मामलों में सहयोग पर जोर
  • आतंकवाद के लिए फ़ंडिंग (टेरर फ़ाइनेंसिंग) के खिलाफ.
  • मानव तस्करी और हथियारों की तस्करी के खिलाफ.
  • ड्रग्स से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ.
  • साइबर अपराध और अवैध वर्चुअल-एसेट का लेन-देन.
  • संगठित स्कैम नेटवर्क और स्कैम कंपाउंड के खिलाफ.
  • इसने एसेट रिकवरी (संपत्ति की वापसी), भगोड़ों का पता लगाने और सीमा-पार भ्रष्टाचार से निपटने के लिए नए सहयोग करने वाले सिस्टम का स्वागत किया.

इसके अलावा वित्तीय सहयोग के मामले में ब्रिक्स देशों ने आपस में पेमेंट के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने के मकसद से बातचीत जारी रखने को बढ़ावा दिया. इस तरह, नई दिल्ली घोषणापत्र में बातचीत, कूटनीति, बहुपक्षवाद और टकराव को रोकने पर जोर दिया गया. साथ ही एकतरफा व्यापार उपायों, दबाव डालने वाली कार्रवाइयों, परमाणु जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों पर चिंता जताई गई.

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