Is the government alone responsible for Delhi's poisonous air?
दिवाली के बाद जहरीली हवा का कौन जिम्मेदार, AAP, BJP या आम आदमी?
हवा का हाल बताने के लिए एक पैरामीटर का उपयोग होता है - AQI. AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स. इसको सबसे पहले अमरीका की एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी यानी USEPA ने बनाया था.
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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाईं गईं (फोटो- इंडिया टुडे)
आज तारीख़ है 13 नवंबर. मालूम है... आप जानते होंगे. दीवाली का अगला दिन है. इस तारीख़ के अंदर अगर आप दी लल्लनटॉप शो का ये एपिसोड देख रहे हैं तो हो सकता है कि आपके कानों में पटाखों का शोर भी जा रहा हो. दिवाली के अगले कुछ दिनों तक ये सिलसिला चलता है. इस बार भी चल रहा है. उन आदेशों और गाइडलाइंस को ताक पर रखकर जिसे देश की सर्वोच्च अदालत ने जारी किए हैं. पटाखों की ध्वनि के बीच देश की राजधानी दिल्ली की एक उपलब्धि भी बताते हैं. जिसे दिल्ली कई बार हासिल कर चुकी है. आज 13 नवंबर को एक बार दिल्ली को दुनिया की सबसे प्रदूषित सिटी होने की एचीवमेंट मिला है.प्रदूषण की जांच करने वाली स्विस एजेंसी IQ एयर की इस लिस्ट में सिर्फ दिल्ली ही नहीं है. इस स्तर का कीर्तिमान भारत के दो और शहरों ने बनाया है. कौन से ये हैं शहर? मुंबई और कोलकाता. भारत के ये दो महानगर भी दुनिया के दस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों की सूची में है. तालिका में मुंबई छठें नंबर पर और कोलकाता 7 वें नंबर पर है.
पहले बात दिल्ली की. 11 नवंबर के लल्लनटॉप शो में हमने बताया था कि दिल्ली-एनसीआर में पिछले हफ्ते हुई बारिश ने प्रदूषण को काफी हद तक कम कर दिया था. बारिश की वजह से दिल्ली की हवा से स्मॉग करीब-करीब ओझल हो गया था. दिल्ली के जिन इलाकों में AQI 350 से ऊपर बना हुआ था, वो बारिश के बाद 100 के आसपास आ गया था. कमोबेश दिवाली की शाम तक दिल्ली का औसत AQI 218 दर्ज किया गया था. सालों बाद ऐसा हुआ था कि दिल्ली वालों को दिवाली के दिन साफ आसमान नज़र आ रहा था. लेकिन ये ऑल इज़ वेल वाली फीलिंग ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई. रात होते-होते हवा खराब होती गई और कम तापमान के साथ प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा. और ये पहुंचा कहां तक आंकड़ों के जरिए बताएंगे. लेकिन उससे पहले तड़के सुबह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से आई तस्वीरें देखिए. आपकों सड़कों पर घनी धुंध दिखाई दे रही होगी. और विजिबिलटी बेहद कम.
दिल्ली में कितना प्रदूषण… इतना प्रदूषण!
दिवाली के अगले दिन दिल्ली में प्रदूषण के हाल की बानगी इस टू विंडो के जरिए भी समझी जा सकती है. इंडिया गेट की दो तस्वीरें आपके सामने हैं. एक है 10 नवंबर की जब इंडिया गेट साफ दिखाई दे रहा था. 13 नवंबर की स्थित आप वीडियो देखकर समझ गए होंगे.
अब बात आंकड़ों की. दिल्ली के कई इलाकों का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है. सुबह के वक्त सामने आए आंकड़ों के मुताबिक
- आरके पुरम में AQI 900 के पार था
- जहांगीरपुर में ये 850 के करीब पहुंच गया था
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- जेएलएन में 710
और रोहिणी में AQI 580 दर्ज किया गया
पटाखों के शोर के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा था. Central Pollution Control Board के ये आंकड़ें बताते हैं पिछले कई सालों से ऐसा होता चला आ रहा है.
- 2023 में दिवाली के दिन AQI 218 रहा
- 2022 में AQI 312 था
- 2021 में AQI 382
- 2020 में दिवाली के दिन AQI 414
- 2019 में दिवाली के दिन AQI 337
- 2018 में AQI 281 हो गया
- 2017 में 319
- और 2016 में दीवाली के दिन AQI 431 था
दिल्ली में फैली धुंध की चादर
ये AQI क्या है हम इसे हम 07 नवंबर के शो में विस्तृत तरीके से बता चुके हैं. लिंक आपकी सुविधा के लिए डिस्क्रिप्शन में मौजूद है. फिर भी हम थोड़ा रिवीजन कर लेते हैं. हवा का हाल बताने के लिए एक पैरामीटर का उपयोग होता है - AQI. AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स. इसको सबसे पहले अमरीका की एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी यानी USEPA ने बनाया था, जिसका इस्तेमाल अब दुनिया के बहुत सारे देश करते हैं. ये AQI हवा में मौजूद प्रदूषण की वजह से AQI बदलता है. जितना ज़्यादा AQI, यानी उतना ज़्यादा प्रदूषण.
अब सवाल ये कि दिल्ली में दिवाली की शाम तक तो हवा सांस लेने लायक महसूस हो रही थी वो सुबह होते-होते इतनी जहरीली कैसे बन गई? इसके जवाब में सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट यानी CSE के वायु प्रदूषण नियंत्रण सेल के Principal Programme Manager विवेक चट्टोपाध्याय बताते हैं कि रातभर हुई आतिशबाजी की होड़ के चलते हवा में प्रदूषण बढ़ने लगा.
आतिशबाजी करते लोग
कल हुई आतिशबाजी के रिटर्न गिफ्ट के तौर पर लोगों को दमघोंटूं सांसें मिली है. 7 नवंबर को ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि पटाखों को लेकर जो गाइडलाइंस पहले जारी की गई हैं, वो पूरे देशभर के लिए है और किसी राज्य के लिए अलग से कोई निर्देश जारी करने की जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने जिस मामले में सुनवाई करते हुए ये बात कही, वो केस साल 2015 से लंबित है. याचिका में पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की गई थी. ये केस अभी खत्म नहीं हुआ है लेकिन इसपर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो बार गाइडलाइंस जारी कर चुका है. पहली बार 23 अक्टूबर 2018 को और दूसरी बार 29 अक्टूबर 2018 को. इस गाइडलाइंस के मुताबिक
पटाखों पर गाइडलाइंस-
- ग्रीन पटाखों को छोड़कर बाकी सभी पटाखों की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध है
- आतिशबाजी में बेरियम सॉल्ट के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध है
- दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक पटाखे फोड़े जा सकते हैं
बाजार में बिकते पटाखे
इन सबके बावजूद पटाखों की बिक्री और उन्हें खरीदने वालों पर असर नहीं पड़ा. इन सबसे इतर दिल्ली में प्रदूषण को लेकर चल रहा ब्लेम गेम बदस्तूर जारी है. राज्य के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय बढ़े प्रदूषण के लिए पटाखे और बीजेपी सरकारों को जिम्मेदार बता रहे हैं. दूसरी ओर बीजेपी नेता सनातन धर्म का हवाला देते हुए क्या कह रहे है सुनिए.
“दिल्ली में प्रदूषण की ताजा हालत को देखते हुए लग रहा है कि आगे आने वाला वक्त में चुनौतियां कम नहीं होंगी. इस बाबत केजरीवाल सरकार क्या करने जा रही है ये भी बताते चलते हैं. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने X पर जानकारी दी है कि दिल्ली में अगले आदेश तक ग्रेप-4 लागू रहेगा और 14 नवंबर से 14 दिसंबर तक दिल्ली में 'Anti Open Burning' कैम्पेन चलाया जाएगा.”
उत्तराकाशी में कैसे धंसी सुरंग?
अब चलते हैं उत्तराखंड की तरफ. दिवाली के दिन ही उत्तरकाशी में एक बड़ा हादसा हुआ. अंडरकंस्ट्रक्शन सुरंग का एक बड़ा हिस्सा धंस गया. इसके कारण वहां काम कर रहे 36 मजदूर फंस गए. ये सुरंग ब्रह्मखाल-यमुनोत्री नेशनल हाइवे पर बन रही है. उत्तरकाशी के सिलक्यारा और डंडालगांव को जोड़ने के लिए. अधिकारियों ने अब तक जो बताया है, उसके मुताबिक यह हादसा सिलक्यारा की तरफ 12 नवंबर की तड़के करीब चार बजे हुआ. करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी सुरंग बन रही है. इसका करीब 150 से 200 मीटर हिस्सा टूट गया.
सुरंग धंसने के बाद राहत-बचाव कार्य जारी
मौके पर स्थानीय पुलिस के अलावा NDRF, SDRF, फायर सेफ्टी के अधिकारी मौके पर रेस्क्यू के लिए पहुंचे. इस सुरंग का निर्माण नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी करा रही है. कंपनी देश में कई बड़ी सुरंग और पुल का निर्माण कर चुकी है. इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही संस्था नेशनल हाइवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) के कर्मचारी भी वहां मौजूद हैं.
शुरुआती जानकारी मिली कि ये हादसा भूस्खलन के कारण हुआ है. उत्तरकाशी के एसपी अर्पण यदुवंशी ने ANI को बताया कि सिलक्यारा की तरफ पहले 30 से 35 मीटर हिस्से में मलबा गिरा, फिर अचानक भारी मलबे और पत्थर गिरने लगे. इसके कारण भीतर काम कर रहे मजदूर फंसे ही रह गए. उत्तरकाशी पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है: +917455991223.
टनल में फंसे हुए मजदूर झारखंड, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के हैं. एक मजदूर उत्तराखंड का भी है. हालांकि मजदूरों के बारे में अभी और अधिक जानकारी नहीं मिली है. उन्हें निकालने के लिए सुरंग से लगातार मलवा हटाया जा रहा है. इसके लिए हैवी एक्सकैवेटर मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है. उत्तरकाशी के सर्किल ऑफिसर प्रशांत कुमार ने रात करीब 2 बजे मजदूरों के साथ संपर्क भी हुआ. उन्होंने दावा किया कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं. टनल में पानी की आपूर्ति के लिए बिछी पाइपलाइन के जरिए ऑक्सीजन भेजी जा रही है. इसी पाइपलाइन के जरिए कंप्रेसर के जरिए दबाव बनाकर कुछ खाने की चीजें भी मजदूरों तक भेजी गईं.
सर्किल ऑफिसर प्रशांत कुमार ने सुबह मीडिया को बताया कि रेस्क्यू में लगे लोग सुरंग के अंदर लगभग 15 मीटर तक चले गए हैं और लगभग 35 मीटर दूरी अभी भी तय करना बाकी है. सुरंग के अंदर जाने के लिए बगल में रास्ता बनाया जा रहा है.
हादसे के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी घटनास्थल पर पहुंचे. बाद में उन्होंने मीडिया को बताया कि रेस्क्यू में लगे अधिकारी प्लान-ए, बी और सी तीनों पर काम कर रहे हैं और सबमें प्राथमिकता वहां फंसे मजदूरों को निकालना है. अधिकारियों की पहली प्राथमिकता है कि ह्यूम पाइप के जरिये उन्हें निकाला जाय.
सुनिये मुख्यमंत्री ने घटनास्थल से लौटने के बाद क्या जानकारी दी
“उत्तरकाशी में साढ़े चार किलोमीटर लंबी ये सुरंग चार धाम सड़क परियोजना के तहत बन रही है. इसके बनने से उत्तरकाशी से यमुनोत्री धाम तक की दूरी 26 किलोमीटर कम हो जाएगी. सुरंग 4 किलोमीटर से ज्यादा बन चुकी है. पहले इस टनल का काम सितंबर 2023 में पूरा होना था लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हो गई है. अब इसे मार्च 2024 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया है.”
मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री
हादसे के बाद दो सवाल उठ रहे हैं. पहला ये कि मजदूर दिवाली के दिन भी काम कर रहे थे. साथ में रविवार भी था. सोशल मीडिया पर कई लोग छुट्टी के दिन मजदूरों से काम करवाने को लेकर सवाल उठा रहे हैं. ये सवाल मुख्यमंत्री से भी पूछा गया कि रविवार के दिन मजदूर काम कर रहे थे. इस पर सीएम ने जवाब दिया कि ये काम इतने महत्वपूर्ण हैं... और इस पर जो भी चीजें हैं वो बाद में देख लेंगे. लेकिन अभी प्राथमिकता है कि उन्हें बाहर निकाला जाय.
दूसरा बड़ा सवाल, जो इस तरह की परियोजनाओं के लिए हमेशा से उठता रहा है. वो ये कि पहाड़ों में इस तरह के निर्माण ही सवालिया हैं. पर्यावरण के प्रभाव की चिंता किये बगैर ऐसे प्रोजेक्ट्स की अनुमति देना. पर्यावरण पर काम करने वाले ऐसे प्रोजेक्ट्स को प्रकृति का दोहन बताते हैं. वहीं, दूसरी तरफ की दलील ये है कि इन परियोजनाओं से पहाड़ी राज्यों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और वहां विकास के काम तेजी से पहुंचेंगे. जिस चारधाम परियोजना के तहत ये सुरंग बन रही है, उसको लेकर भी खूब बवाल हुआ था. पहले हम इसे 'ऑल वेदर रोड' प्रोजेक्ट के रूप में जानते थे.
चारधाम एक हाइवे प्रोजेक्ट है. इसके तहत केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे उत्तराखंड के चार धाम को आपस में हाइवे के जरिए जोड़ने का प्लान है. प्रोजेक्ट के तहत 889 किलोमीटर लंबी सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है और इन्हें हाइवे में बदला जा रहा है. साथ ही सड़कों की मरम्मत भी हो रही है. साल 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले दिसंबर 2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका एलान किया था. इसमें आने और जाने, दोनों तरफ डबल लेन सड़कें बनाई जा रही हैं. इसी के तहत कई जगहों पर सुरंग का निर्माण भी हो रहा है.
जब इस प्रोजेक्ट की घोषणा हुई थी तब इसकी लागत का अनुमान 12 हजार करोड़ का था. चार धाम प्रोजेक्ट में एक मुख्य सड़क है, जिस पर आगे बढ़ने के साथ चार अलग-अलग रास्ते निकलते हैं, जो चारों धाम को जाते हैं. यह सड़क ऋषिकेश से शुरू होकर उत्तर दिशा में माना नाम के गांव तक जाती है. इससे पहला रास्ता, ऋषिकेश से निकलेगा, जो धारासु नाम की जगह तक जाएगा. दूसरा, धारासु से एक रास्ता यमुनोत्री और दूसरा गंगोत्री जाएगा. तीसरा, यह रास्ता भी ऋषिकेश से शुरू होगा और रुद्रप्रयाग तक जाएगा. रुद्रप्रयाग से एक रास्ता केदारनाथ के लिए गौरीकुंड तक निकल जाएगा. चौथा, रुद्रप्रयाग से एक रास्ता आगे बद्रीनाथ के लिए माना गांव तक जाएगा. साथ ही टनकपुर से पिथौरागढ़ के रास्ते को हाइवे में बदला जा रहा है.
प्रोजेक्ट पर साल 2017 में काम शुरू हुआा था. लेकिन इसको लेकर कई शिकायतें आईं. आरोप लगे कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. नियमों का पालन नहीं हो रहा. मनमानी से पेड़ कट रहे हैं. मलबा नदियों में गिराया जा रहा है. आरोप लगा कि इस प्रोजेक्ट के लिए एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट यानी पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का आकलन नहीं किया गया. किसी भी प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाता है. जैसे- अगर कहीं रोड बननी है, तो यह बताना होता है कि उससे पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा. जैसे- रास्ते में कितने पेड़ कटेंगे, उससे जानवरों पर क्या असर पड़ेगा आदि. पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, 100 किलोमीटर से बड़े किसी भी रोड प्रोजेक्ट पर एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट कराना होता है. लेकिन प्रोजेक्ट के 100 किलोमीटर से कम होने पर ऐसा नहीं होता है. चारधाम प्रोजेक्ट में करीब 900 किलोमीटर के प्रोजेक्ट को 53 हिस्सों में बांट दिया. और प्रत्येक हिस्सा 100 किलोमीटर से कम का है.
कई सामाजिक संस्थाओं ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT में अर्जियां दाखिल कीं. बहुत सी अर्जियां होने पर एनजीटी ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में भेज दिया. याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि जिन जगहों पर सड़कों का चौड़ीकरण हो रहा है, वो काफी संवेदनशील इलाके हैं. अगस्त 2018 में कोर्ट ने मुद्दे की गंभीरता के चलते एक हाई पावर कमिटी बनाई. इस कमिटी के तत्कालीन अध्यक्ष मुखिया रवि चोपड़ा ने तब कहा था कि हिमालय के पहाड़ों की चिंता नहीं की जा रही है. हालांकि कमिटी भी बंट गई थी. रवि चोपड़ा समेत चार सदस्यों ने सड़क की चौड़ाई 5.5 मीटर चौड़ी रखने की सिफ़ारिश की थी. दूसरी तरफ, 21 सदस्यों वाले दूसरे पक्ष ने सड़क की चौड़ाई 12 मीटर रखने की सलाह दी थी.
लंबी बहस के बाद दिसंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर फैसला दिया. सड़कों को 10 मीटर तक चौड़ा करने की अनुमति दी. साथ ही सरकार को कमिटी की सिफारिशों की निगरानी के लिए पूर्व जज जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता में एक और कमिटी बनाई. तब से इस प्रोजेक्ट पर काम जारी है.
पहले कहा जा रहा था कि इसे मार्च 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा. हालांकि पर्यावरण मंजूरी और दूसरे कारणों से प्रोजेक्ट में देरी हुई. इस साल जुलाई में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जवाब दिया था. बताया कि अब तक 601 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है.
बहरहाल उत्तरकाशी हादसे को 36 घंटे हो चुके हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आपदा बलों के जवान और अधिकारी सभी मजदूरों को सुरक्षित टनल से निकाल पाएंगे.
आप सभी को दिवाली की शुभकामनाएं. खुद का और अपनों का खयाल रखिये. शुभ रात्रि. उम्मीद करिये कि टनल में मजदूर जल्द से जल्द बाहर निकलें.