ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वो किसी के दबाव में डील नहीं करेगा. दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तेहरान के प्रपोजल को ठुकरा दिया है. ईरान ने 26 सितंबर को 7 दिन के अंदर फिर से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खोलने का अमेरिका को प्रपोजल भेजा था. होर्मुज से दुनिया का तकरीबन 20 फीसदी तेल और गैस गुज़रता है. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज महीनों से ईरान और अमेरिका के बीच चोकपॉइंट बना हुआ है और बात फिर वहीं आकर अटक गई है.
'हम जंग बेचने न्यूयॉर्क नहीं गए थे', होर्मुज के नए प्लान पर बात न बनने के बाद बोला ईरान
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन और वो न्यूयॉर्क में जंग का प्रस्ताव लेकर नहीं, बल्कि शांति बहाल करने के लिए बातचीत करने आए थे. एक होर्मुज प्लान का भी ज़िक्र किया जिसे डॉनल्ड ट्रंप ने ठुकरा दिया है.

अब्बास अराघची ने X पर पोस्ट कर लिखा,
“राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन और मैं न्यूयॉर्क में जंग बेचने नहीं, बल्कि शांति बहाल करने के मकसद से बातचीत करने गए थे."
आगे लिखा, ‘ईरान भले ही कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार है, मगर उसपर कोई हमला हुआ तो वो जंग के लिए भी तैयार है, चाहें वो विनाशकारी जंग ही क्यों न हो.’ ये बयान न्यूयॉर्क में हुए UNGA (यूनाइटेड नेशन जनरल असेंब्ली) के 81वें सत्र के बाद आया है. UNGA मीटिंग को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू करने के लिए एक मौके के तौर पर देखा गया. ट्रंप ने बताया था कि दोनों देशों के डेलीगेशन के बीच तीन घंटे तक बातचीत हुई है.
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ईरान ने बताया कि उसने क़तर के ज़रिए अमेरिका के सामने ठोस प्लान रखा है. लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस होर्मुज प्लान को ठुकरा दिया है. वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान के नेता होर्मुज़ को तुरंत खोलने के लिए समझौता इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि उन्हें बहुत बुरी तरह हार का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी तरफ एक्सिओस से बातचीत में उन्होंने बताया कि अमेरिका ईरान से और बातचीत करना चाहता है. यानी उन्होंने कूटनीतिक बातचीत के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं किए हैं.
ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका होर्मुज डील पर मान जाता तो आगे अन्य मुद्दों (न्यूक्लियर प्रोग्राम) पर भी बातचीत हो सकती थी. हालांकि ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि अमेरिकी रिजेक्शन की बात आधिकारिक तौर पर मीडिएटर के ज़रिए नहीं आई है. इसलिए वे अमेरिका के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं.
डील फिर लटक गईईरान का ये कहना है कि उसकी शर्तें बिल्कुल क्लियर हैं इसलिए किसी भी बातचीत का अंत ये है कि ये शर्तें मान ली जाएं. दूसरी तरफ अमेरिका ईरान पर भरोसा नहीं जता पा रहा है, उसे लगता है कि बातचीत होने के बाद भी पक्का नहीं है कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम ख़त्म करने की बात मान लेगा.
यानी सुई फिर वहीं आकर अटक गई है. होर्मुज खुलेगा या नहीं? कब खुलेगा किसी को नहीं पता. इसके अलावा होर्मुज के बाद अब बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट भी जंग का मैदान बन चुका है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है. यमन में हूती लड़ाके आगे बढ़ रहे हैं, सऊदी-समर्थित सरकार की सेनाओं को हरा रहे हैं और रेड सी के रास्ते सऊदी तेल निर्यात के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं. इस खतरे को देखते हुए सऊदी अरब में बच्चों के स्कूल भी ऑनलाइन कर दिए गए हैं.
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