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ट्रंप ने ईरान का कौन सा ऑफर रिजेक्ट किया, जिसके बाद तेहरान पर बमबारी की बात छिड़ गई?

अमेरिकी अफसरों के मुताबिक, ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू करने को लेकर डॉनल्ड ट्रंप को थोड़ी हिचकिचाहट है. इसकी एक वजह अमेरिका के हथियारों के घटते भंडार को दूसरी संभावित इमरजेंसी के लिए बचाकर रखना है.

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डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान का प्रस्ताव ठुकराया. (Courtesy: @WhiteHouse/ X)

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  • ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को सात दिनों का एक प्रस्ताव दिया जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ठुकरा दिया।
  • ईरान ने इस प्रस्ताव को कतर के माध्यम से भेजा जबकि ट्रंप को इस बात पर संदेह था कि ईरान उनकी शर्तों का पालन करेगा या नहीं।
  • ट्रंप ने मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमलों की संभावना पर चर्चा शुरू कर दी है।

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को 7 दिन का एक प्रस्ताव दिया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रिजेक्ट कर दिया. ये दावा अमेरिकी अधिकारियों ने किया है. उनके मुताबिक, ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ नए सिरे से भारी-भरकम एयर स्ट्राइक शुरू की जा सकती हैं.

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शनिवार, 26 सितंबर की देर रात ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क स्थित यूनाइटेड नेशंस के हेडक्वार्टर में ईरानी प्रपोजल के बारे में बताया था. उन्होंने कहा था कि ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को होर्मुज खोलने से जुड़ा 7 दिन का प्लान भेजा है. प्लान की पूरी डिटेल सामने नहीं आई है.

ट्रंप को ईरान पर शक

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान का प्लान ठुकरा दिया है. ट्रंप खुले तौर पर कहते हैं कि मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान एक ऐसे समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है, जिससे उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म हो जाएगा.

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लेकिन, ये इतना आसान नहीं नजर आता. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप को खुद इस बात पर शक है कि ईरान उनकी शर्तों को मानेगा या नहीं. इसी वजह से उन्होंने अपने स्टाफ से ईरान के खिलाफ दोबारा मिलिट्री एक्शन शुरू करने की संभावना पर चर्चा की है.

अमेरिका का घटता हथियार भंडार

अमेरिकी अफसरों का कहना है कि अभी ये साफ नहीं है कि ट्रंप किस लेवल का मिलिट्री एक्शन चाहते हैं. फिर से बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू करने को लेकर उन्हें थोड़ी हिचकिचाहट भी है. इसकी एक वजह अमेरिका के हथियारों के घटते भंडार को दूसरी संभावित इमरजेंसी के लिए बचाकर रखना है.

ट्रंप का बार-बार बदलता रुख

पिछले कुछ महीनों में डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े रुख के साथ-साथ बातचीत का रास्ता भी अपनाया है. कई बार उन्होंने मिलिट्री एक्शन की धमकी दी और कुछ मौकों पर हमले भी किए. तो पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान के साथ 'इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (Islamabad MoU) पर साइन किया.

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अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप की सबसे कड़ी धमकियों को हमेशा अमल में भी नहीं लाया गया. जैसे- ईरान की सभ्यता को पूरी तरह मिटाना.

यह भी पढ़ें: '7 दिन में होर्मुज स्ट्रेट खोले देंगे, अगर...' ईरान ने अमेरिका को बड़ा ऑफर दे दिया

अमेरिकी अधिकारियों का ये भी कहना है कि आने वाले हफ्तों में ट्रंप का रुख बदल सकता है. युद्ध की स्थिति, कूटनीतिक बातचीत और नवंबर के मिडटर्म चुनावों के नतीजे उनकी आगे की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं. इस बीच, ट्रंप ने इस हफ्ते यूनाइटेड नेशंस में कहा कि ईरान से परमाणु ईंधन हासिल करने की कोशिश करते समय उनके दिमाग में राजनीति नहीं होती.

वीडियो: अमेरिका-ईरान की 3 घंटे बातचीत के बाद ट्रंप की चेतावनी, आगे क्या होने वाला?

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