The Lallantop

अयातुल्लाह मारे गए, मोजतबा घायल हैं, ईरान को असल में चला रहे 'बिरादर'

‘बैंड ऑफ ब्रदर्स’ कहे जा रहे इस ग्रुप में ज्यादातर लोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े थे. IRGC को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सुप्रीम लीडर की सुरक्षा के लिए बनाया गया था.

Advertisement
post-main-image
मोजतबा खामेनेई को ईऱान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है. (फोटो- India Today)

ईरान को अभी कौन चला रहा है? 37 साल तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई को अमेरिका-इजरायल ने 28 फरवरी को मार दिया. इसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने उनकी गद्दी संभाली. लेकिन हमले में घायल होने के चलते वे कामकाज नहीं देख रहे हैं और 86 साल के दिवंगत नेता खामेनेई जैसी ताकत और रुतबा पाने के लिए उन्हें अभी काफी वक्त लगेगा.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

ईरान के तमाम बड़े अधिकारी कहते तो हैं कि देश के सभी बड़े फैसले मोजतबा के हाथ में हैं, लेकिन क्या सच में ऐसा है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया है कि ईरान में फिलहाल फैसले लेने में किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं होता. ये काम एक छोटे, लेकिन ताकतवर ग्रुप की सलाह पर होता है, जिन्हें ‘बिरादरों का समूह’ या बैंड्स ऑफ ब्रदर्स कहा जाता है. 

बिरादरों के इस जुटान में कौन- कौन हैं, उनके नाम भी हम आपको बताएंगे. लेकिन इससे पहले जान लेते हैं कि यहां तक पहुंचने में उनकी यात्रा क्या और कैसे रही थी?

Advertisement
‘बैंड ऑफ ब्रदर्स’

‘बैंड ऑफ ब्रदर्स’ कहे जा रहे इस ग्रुप में ज्यादातर लोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े थे. IRGC को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सुप्रीम लीडर की सुरक्षा के लिए बनाया गया था. सैनिकों के इस संगठन ने ऐसे बहुत से लोगों को बेहद कम उम्र में कमांडर से जनरल बना दिया, जो अभी जवान हो रहे थे. वह अपने 20s के आखिर और 30s के शुरुआती दौर में थे. इन लोगों ने इराक और ईरान के बीच चले लंबे युद्ध के दौरान अपने सैन्य अनुभव जुटाए. युद्ध में इराक को पश्चिमी देशों का खूब सपोर्ट मिला. इस घटना ने उन्हें सीख दी कि ईरान को अपना रास्ता खुद बनाना होगा. वह इसी के हिसाब से ट्रेन्ड हुए. 

जब जंग खत्म हुई तो इनमें से कई लोग खुफिया और सिक्योरिटी एजेंसियों पर कंट्रोल रखने लगे. अभी के जो सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई हैं, उनसे इन सबके व्यक्तिगत संबंध हैं. मोजतबा अपने पिता खामेनेई का दफ्तर देखते थे. उसी समय ईरान के इन कट्टर नेताओं से उनकी करीबी बढ़ी थी. ये लोग सिर्फ इस्लामी क्रांति को आगे बढ़ाने में ही काम नहीं आए बल्कि खामेनेई शासन के दमनकारी तरीकों के भी बड़े सपोर्टर बनकर उभरे. इनकी एकजुटता और पावर का अंदाजा इससे लगाइए कि सुप्रीम लीडर समेत 50 से ज्यादा बड़े ईरानी नेताओं की युद्ध में मौत के बाद भी अब तक जंग थमी नहीं है. ईरान अमेरिका के आगे झुका नहीं है. न तो ईरान की सरकार गिरी और न कमजोर हुई.

खामेनेई की मौत के बाद ये लोग आज के ईरान के सबसे ताकतवर और प्रभावशाली लोग माने जाते हैं.

Advertisement

इस लिस्ट में सबसे पहला नाम मोहम्मद बागेर गालिबाफ का है. वह साल 2020 से ईरानी संसद के स्पीकर हैं. इससे पहले वह IRGC की वायुसेना के कमांडर थे. ईरान की राष्ट्रीय पुलिस की कमान भी संभाल चुके हैं. तेहरान के मेयर भी रहे हैं. गालिबाफ की सरकार से वफादारी इस एक घटना से समझिए. साल 1999 में सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे थे. गालिबाफ का दावा है कि इस दौरान वह एक आम मिलिशिया मेंबर की तरह मोटरसाइकिल पर बैठकर सड़कों पर उतर गए. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर डंडों से पीटा था. गालिबाफ सेना और पॉलिटिक्स के बीच की कड़ी माने जाते हैं. पिछले महीने जब पाकिस्तान में अमेरिका से शांति वार्ता चल रही थी, तब ईरान की ओर से गालिबाफ ही इस्लामाबाद गए थे. 

अहमद वाहिदी बैंड ऑफ ब्रदर्स के दूसरे सदस्य हैं. वह पूर्व खुफिया अधिकारी रहे हैं. मार्च में जब अमेरिका और इजरायल के हमले में IRGC के प्रमुख की मौत हो गई थी, तब वाहिदी ने भी सेना की कमान संभाली थी. वह पहले देश के रक्षामंत्री और गृहमंत्री रह चुके हैं. अहमद वाहिदी 1988 में कुद्स फोर्स के कमांडर बने थे. इसी दौरान 1994 में ब्यूनस आर्यस में एक यहूदी कम्युनिटी सेंटर पर हमला हुआ था. इसमें 85 लोगों की मौत हो गई थी. माना जाता है कि कुद्स फोर्स ने ही हिजबुल्लाह जैसे मिलिशिया ग्रुप्स को खड़ा किया. वाहिदी पर इन ग्रुपों में हिंसक और आतंकवादी रणनीतियों को जगह देने के आरोप भी लगते हैं. 

मोहम्मद अली जाफरी टू-स्टार जनरल हैं. वो ईरान के सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार भी रह चुके हैं. अभी तो उनके पास कोई आधिकारिक पद नहीं है, लेकिन 2007 से 2019 तक उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कमान संभाली थी. यह उसके सबसे लंबे कार्यकालों में से एक माना जाता है. साल 2015 में जाफरी ने ही कहा था कि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स जायोनी शासन (इजरायल) के अंत तक लड़ाई जारी रखेंगे. जब तक इस बुराई के प्रतीक को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता वो चैन से नहीं बैठेंगे.

मोहम्मद बाघेर जोलगद्र भी सेना और ईरान की राजनीतिक व्यवस्था का मेल हैं. उनकी पहचान एक स्ट्रिक्ट लीडर के तौर पर है. मार्च 2026 में उन्हें सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का सेक्रेट्री बनाया गया. इससे पहले ये जिम्मेदारी अली लारिजानी के पास थी. उनकी इजरायल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई.

वीडियो: प्रधानमंत्री मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाले को पाकिस्तान से कौन धमकी दे रहा?

Advertisement