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इजरायल के मंत्री ने गाजा की मदद करने वालों से की बदसलूकी, जॉर्जिया मेलोनी बुरी तरह भड़कीं

इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर एक वीडियो में गाजा में सहायता पहुंचाने वाले एक्टिविस्टों के एक ग्रुप का मजाक उड़ाते हुए दिख रहे हैं. उनके इस व्यवहार की पूरी दुनिया ने निंदा की है. फ्रांस, इटली, स्पेन, आयरलैंड और साउथ कोरिया ने उनके इस व्यवहार की कड़ी निंदा की है.

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इजरायली मंत्री बेन ग्विर ने एक्टिविस्टों का मजाक उड़ाया है. (एक्स, बेन ग्विर)

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  • इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर ने 20 मई को गाजा फ्लोटिला के एक्टिविस्टों के साथ दुर्व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
  • गाजा फ्लोटिला के जहाजों को रोकने और एक्टिविस्टों को बंधक बनाने की कार्रवाई के पीछे इजरायल की गाजा की नाकेबंदी और सुरक्षा चिंताएं हैं।
  • इटली, फ्रांस सहित कई देशों ने इस व्यवहार की निंदा की है और उन्होंने अपने-अपने देशों में इजरायली राजदूतों को तलब कर के जवाब मांगा है।

इजरायल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर ने 20 मई को एक वीडियो क्लिप शेयर किया. वीडियो में बंधे हुए हाथ और जमीन पर घुटने टेके हुए लोग दिख रहे हैं और बेन ग्विर उनका मजाक उड़ा रहे हैं. इस वीडियो के आने के बाद पूरी दुनिया से बेन ग्विर को लानतें भेजी जा रही हैं.

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गाजा फ्लोटिला के एक्टिविस्टों के साथ बदसलूकी

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सिक्योरिटी मिनिस्टर इतामार बेन ग्विर के शेयर किए गए वीडियो क्लिप में गाजा में सहायता पहुंचाने वाले एक जहाजी बेड़े के एक्टिविस्ट हैं. इन सबको इजरायली नेवी ने बंधक बनाया है. इन एक्टिविस्टों के साथ यह बदसलूकी अशदोद पोर्ट फैसिलिटी में हुआ, जहां उनको डिपोर्ट करने की प्रक्रिया चल रही थी. 

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ये सभी 'गाजा फ्लोटिला' अभियान से जुड़े हैं. इनका काम गाजा की नाकेबंदी को तोड़ कर वहां के नागरिकों को राहत सामग्री पहुंचाना है. यह अभियान फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (FFC) और ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला जैसे अंतरराष्ट्रीय नागरिक संगठनों द्वारा चलाया जाता है. इन जहाजों के बेड़े में 40 से ज्यादा देशों के एक्टिविस्ट, डॉक्टर, पत्रकार और राजनेता शामिल होते हैं.

इस साल की शुरुआत में इजरायल द्वारा रोके गए इस जहाजी बेड़े में इटली और स्पेन के नागरिक भी शामिल थे. इन देशों की सरकारों ने कहा है कि बेन ग्विर के इस व्यवहार के लिए वे अपने-अपने देशों में इजरायली राजदूतों को तलब करेंगी. वहीं इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने कैबिनेट सदस्य बेन ग्विर के इस कदम की निंदा की है. उन्होंने कहा,

नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर का व्यवहार इजरायली मूल्यों के मुताबिक नहीं था.

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वीडियो की शुरुआत में एक महिला एक्टिविस्ट फ्री फिलिस्तीन के नारे लगाती है, जिसके बाद वहां मौजूद अधिकारी उनका सिर पकड़कर जमीन की ओर धकेलते हैं. फिर उनको बेन ग्विर के रास्ते से घसीटते हुए हटाया जाता है, जब वे पोर्ट फैसिलिटी के विजिट के लिए आए थे. इसके आगे वीडियो में दिखता है कि दर्जनों एक्टिविस्ट जमीन पर घुटने टेककर बैठे हुए हैं. वहीं बेन ग्विर हंसते हुए और एक बड़ा इजरायली झंडा लहराते हुए हिब्रू में चिल्लाते हुए दिख रहे हैं, 

इजरायल में आपका स्वागत है! यहां हम ही सत्ता में हैं!

इटली की प्रधानमंत्री ने जताई नाराजगी

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस वीडियो को अस्वीकार्य बताते हुए एक्टिविस्ट के साथ हुए व्यवहार की कड़ी निंदा की. इसे मानवीय गरिमा का उल्लंघन बताया. उन्होंने एक्स पर आगे लिखा, 

इटली की सरकार हिरासत में लिए गए सभी इतालवी नागरिकों की रिहाई के लिए शीर्ष स्तर पर सभी जरूरी कदम उठा रही है. इटली इन प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार और इतालवी सरकार की रिक्वेस्ट को पूरी तरह से नजरअंदाज करने के लिए माफी की मांग करता है.

पीएम मेलोनी ने आगे लिखा कि इटली का विदेश मंत्रालय तुरंत इजरायली राजदूत को तलब करके इस घटना पर सफाई मांगेगा. इटली के विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि हिरासत में लिए गए लोगों में देश के एक सांसद और एक पत्रकार भी शामिल हैं.

गाजा फ्लोटिला में फ्रांस के नागरिक भी शामिल थे. फ्रांस ने भी इजरायली मंत्री ग्विर के व्यवहार को लेकर पेरिस में इजरायल के राजदूत को तलब किया है. वहीं फ्रांस के विदेश मंत्र जीन-नोएल बैरोट ने भी इस घटना की निंदा की है. उन्होंने एक्स पर लिखा, 

इस नौसैनिक बेड़े के बारे में किसी की कुछ भी राय हो सकती है. हमने भी कई मौकों पर इस पहल से असहमति जताई है. लेकिन इसमें भाग लेने वाले हमारे देश के नागरिकों के प्रति सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए और उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए.

फ्रांस और इटली के अलावा गाजा फ्लोटिला में स्पेन, आयरलैंड और साउथ कोरिया के नागरिक भी शामिल थे. इन देशों ने भी बयान जारी करके बेन ग्विर के व्यवहार की आलोचना की है. 

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