बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने दिया इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया है. यह जानकारी खुद उनके ऑफिस की ओर से जारी की गई है. शहाबुद्दीन को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का खास और महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है. ऐसा माना जा रहा है कि उनके इस्तीफा देने के बाद अब बांग्लादेश सरकार में शेख हसीना की कोई ठोस पहुंच नहीं है. देश में हुए छात्रों के प्रदर्शन के बाद से ही हसीना को बांग्लादेश छोड़कर पड़ोसी देश भारत में शरण लेनी पड़ी थी.
बांग्लादेश के राष्ट्रपति का इस्तीफा, शेख हसीना के लिए ये बहुत बड़ा झटका क्यों है?
Bangladesh के राष्ट्रपति Mohammad Shahabuddin ने Resign कर दिया है. Shahabuddin को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina का खास और महत्वपूर्ण सहयोगी माना जाता है.

हालांकि, बीते कुछ दिन पहले शेख हसीना ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को एक टेलिफोनिक इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू में हसीना ने बताया था कि वो और उनकी पार्टी ‘आवामी लीग’ के कई नेता दिसंबर 2026 तक अपने देश के कोर्ट में सरेंडर कर सकते हैं.
छात्रों के विद्रोह के समय पद पर थेरॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद शहाबुद्दीन साल 2023 से बांग्लादेश के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे थे. इनके कार्यकाल के दौरान साल 2024 में शेख हसीना के खिलाफ छात्रों का ‘बड़ा और हिंसक’ विरोध प्रदर्शन हुआ था. छात्रों के विद्रोह के बाद ही हसीना को अपना देश छोड़कर भागना पड़ा था. तब से अब तक हसीना भारत में ही रह रही हैं. शहाबुद्दीन ने अपने प्रेस सेक्रेटरी के जरिए एक बयान जारी करवाया. उनके बयान में कहा गया,
‘हाल की मेडिकल टेस्ट में मुझे ऑटोनोमिक न्यूरोपैथी नाम की एक बीमारी के बारे में पता चला. इस बीमारी की वजह से मुझे कभी-कभी कुछ समय के लिए होश खोने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है.’
शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद अब हसीना का कोई बड़ा और दमदार सहयोगी बांग्लादेश की सत्ता में किसी बड़े पद पर नहीं होगा. हालांकि, अगले 5 महीने बाद हसीना ‘वतन वापसी’ कर सकती हैं. हसीना की पार्टी ‘आवामी लीग’ बांग्लादेश में बैन कर दिया गया है. इसके अलावा उनके पार्टी के कई नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया है या वो खुद ही ‘अंडरग्राउंड’ हो गए हैं.
सेक्रेटरी ने राष्ट्रपति का बयान बतायाहसीना को खुद बांग्लादेश की एक अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है, लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में. शहाबुद्दीन के सेक्रेटरी ने आगे उनके बयान में कहा कि जब तक देश में नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राष्ट्रीय संसद के स्पीकर राष्ट्रपति के कामों को संभालेंगे. यानी जो बांग्लादेशी संसद के स्पीकर हैं, उनके पास राष्ट्रपति का चार्ज होगा.
जिस तरह भारत में राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ हैं, ठीक उसी तरह बांग्लादेश में भी शहाबुद्दीन तीनों सेनाओं के कमांडर-इन-चीफ थे. हालांकि, देश की सारी कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट के पास ही होती है.
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