ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज डील पर बात लगभग तय हो गई है. होर्मुज से ही दुनियाभर का 20 फीसदी कच्चा तेल गुज़रता है. ईरान ने बताया कि डील अपने ‘फाइनल स्टेज’ में है. साथ ही, ये भी पता चला है कि अब होर्मुज में जहाज नए रास्ते से गुज़रेंगे. रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया है कि नए डील के मुताबिक, गल्फ में एंटर कर रहे जहाजों पर तेहरान का कंट्रोल होगा.
ईरान और ओमान की डील! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर रहेगा तेहरान का दबदबा, अब क्या करेंगे ट्रंप?
Iran-Oman Hormuz deal: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच नई डील पर बातचीत फाइनल स्टेज में है. अगर यह डील होती है, तो सबसे बड़ा सवाल है कि डॉनल्ड ट्रंप क्या करेंगे?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने बताया कि तेहरान और मस्कट होर्मुज में नए शिपिंग रूट पर राज़ी हो गए हैं. बताया जा रहा है कि मौजूदा ज़रूरतों को समझते हुए डील हुई है. ईरान ने ये भी दावा किया कि होर्मुज में कमर्शियल जहाजों का आना-जाना दोनों ईरान के अधिकार क्षेत्र वाले समुद्री पानी से होगा. अमेरिका ने इस डील पर अभी तक कुछ नहीं कहा है. चलिए समझते हैं कि इस डील से क्या कुछ बदल जाएगा?
ईरान-ओमान होर्मुज डीलफिलहाल तो फारस की खाड़ी में एंटर करने या उससे बाहर निकलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन होता है. इसमें ईरान या ओमान से परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती. लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि तय एग्रीमेंट के मुताबिक, खाड़ी में एंटर कर रहे जहाज ईरान द्वारा नियंत्रित जलक्षेत्र से होकर गुज़रेंगे. अब सवाल ये है कि क्या बाहर निकलने के लिए भी जहाजों को यही रास्ता चुनना होगा?
ईरान ने जिस नए शिपिंग मॉडल का ज़िक्र किया है उसके मुताबिक, शिपिंग रूट का ज्यादातर हिस्सा ईरान के कंट्रोल में आता है. केवल कुछ हिस्सा ओमान कंट्रोल करेगा. होर्मुज के मौजूदा रूट में उत्तर और दक्षिण दो रास्ते हैं. उत्तर वाला ईरान के लरक आइलैंड से लगता है और दक्षिण वाला ओमान से. एग्रीमेंट में इसे रीप्लेस कर नया रास्ता बनाया जाएगा. नए रूट के कॉर्डिनेट्स पर फाइनल बात चल रही है.
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जहाजों पर क्या असर पड़ेगा?होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की जांच कौन करेगा? ये सवाल भी डिबेट का मुद्दा बना हुआ है. मिडिल ईस्ट के कुछ अधिकारियों का कहना है कि इसे रीजनल अधिकारियों को सौंप देना चाहिए. केवल ईरान के पास ये हक़ नहीं होना चाहिए. एक और मुद्दा चर्चा का विषय है कि क्या अब होर्मुज में टोल लगेगा? रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से 5 से 7 फीसदी टोल लेने की मांग कर रहा है. जबकि ओमान केवल 3 फीसदी की मांग कर रहा है.
अमेरिका शुरू से टोल के खिलाफ रहा है. ईरान जंग से पहले सभी जहाज होर्मुज से टोल फ्री ही गुज़रते थे. लेकिन जंग के दौरान कई दफा टोल लगाने की बात कही गई. डील अपने फाइनल स्टेज में ज़रूर है मगर अब तक साइन नहीं हुई है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अगर अमेरिका जून में साइन हुए मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग की शर्तें मान लेगा तो होर्मुज खोल दिया जाएगा. ईरान का कहना है कि उसे अमेरिका से पॉजिटिव मैसेज तो मिल रहे हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों में कोई डायरेक्ट बातचीत नहीं हुई है.
वीडियो: दुनियादारी: ईरान-ओमान की होर्मुज डील में क्या शर्तें हैं?









