वर्चुअल आईडी एक तरह से इंफॉर्मेशन वाला आधार क्लोन होगा. जिसमें यूज़र की सिर्फ बेसिक डीटेल्स जैसे नाम, पता और फोटो ही शेयर की जा सकेंगी. ये वर्चुअल आईडी कोई और नहीं सिर्फ कार्ड धारक ही UIDAI की वेबसाइट, आधार एप या आधार केंद्र के माध्यम से जेनरेट कर सकेगा. इस आईडी को एक से ज़्यादा बार जेनरेट किया जा सकता है लेकिन ये एक लिमिटेड टाइम के लिए ही वैलिड रहेगा और नया कोड जेनरेट होते ही पुराना वाला इनवैलिड हो जाएगा. इसकी एक खास बात ये भी है कि इसकी नकल या डुप्लीकेसी नहीं की जा सकेगी.

लगातार डाटा लीक होने की खबरों के बीच सरकार ने लिया ये फैसला.
UIDAI (Unique Identification Authority of India) की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि हाल में आधार से जुड़े डाटा की सेफ्टी को लेकर बहुत सारे सवाल उठे हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए आधार सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए इसमें कुछ बदलाव किए जा रहे हैं. अभी तक देश में 119 करोड़ लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं. पहचान के लिए आधार को स्कूल, बैंक, फोन, नौकरी से लेकर तकरीबन सभी जगह अनिवार्य किया जा रहा है. एक मार्च से वर्चुअल आईडी बनाने की सुविधा शुरू हो जाएगी और एक जून से से सभी संस्थानों में आधार कार्ड की जगह वर्चुअल आईडी को कंपल्सरी कर दिया जाएगा.
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