भारत की एक महिला व्लॉगर ने दावा किया कि उन्हें अफगानिस्तान में महिला होने के कारण मुसीबत का सामना करना पड़ा. ये दावा केरल की रहने वाली अरुणिमा ने किया है. सोमवार, 14 सितंबर को उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के बामियान में मुजाहिदीन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी मदद का पोस्ट करने के करीब तीन घंटे बाद तालिबान से जुड़े लोगों ने सेटलमेंट करके उन्हें छोड़ा.
'महिला होने के कारण मुजाहिदीन ने पकड़ा', अफगानिस्तान में अकेले घूम रहीं इंडियन व्लॉगर की आपबीती
अफगानिस्तान में एक भारतीय महिला व्लॉगर से कहा गया कि उन्होंने कानून तोड़ा है. यह सुनकर वे काफी घबरा गईं. उनका कहना है कि मुजाहिदीन ने उन्हें काफी समय तक पकड़ कर रखा. उनके साथ और क्या-क्या हुआ, कैसे छूटीं फिर? सब जानिए.

अरुणिमा फेसबुक और इंस्टाग्राम पर 'Backpacker Arunima' के नाम से पेज चलाती हैं. इसमें वे देश और दुनिया घूमने का अपना एक्सपीरियंस शेयर करती हैं. वीडियो डालती हैं. अफगानिस्तान में मुसीबत झेलने के बाद मंगलवार, 15 सितंबर को उन्होंने फेसबुक पर बताया, "मैं अब सेफ हूं."

इससे पहले, उन्होंने एक पोस्ट शेयर करके अपनी तकलीफ बताई थी. ये एक ट्रांसलेशन था. अरुणिमा के मुताबिक, एक आधिकारिक ट्रांसलेशन था, जिसमें उन्हें बताया गया कि मुजाहिदीन ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. सोमवार को डाले गए पोस्ट में दिख रहा ट्रांसलेशन था,
"मुजाहिदीन ने आपको अभी-अभी गिरफ्तार कर लिया है, क्योंकि आपके पास कोई ऑफिशियल लेटर नहीं है."
सोमवार देर रात काबुल स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने में मदद मांगते हुए उन्होंने ये पोस्ट किया. ये ट्रांसलेशन भी उसी पोस्ट में है. उन्होंने लिखा,
"प्लीज अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास या किसी और से संपर्क करने में मेरी मदद करें. मैं मुसीबत में हूं और बामियान में हूं!!!!!!"

अरुणिमा के पोस्ट में उन लोगों की पहचान उजागर नहीं की गई, जिन्होंने उन्हें कथित तौर पर अरेस्ट किया. काबुल और नई दिल्ली में मौजूद भारतीय अधिकारियों ने भी इस मामले में कोई अपडेट नहीं दिया. खुद को कथित तौर पर गिरफ्तार किए जाने की डिटेल बताते हुए अरुणिमा कहती हैं,
"इस देश के कानून के मुताबिक, एक महिला अकेले सफर नहीं कर सकती."
अरुणिमा के मुताबिक, बामियान में अधिकारियों ने भी उन्हें यही बताया. उन्हें बताया गया कि उन्होंने देश का कानून तोड़ा है, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया जाएग. वो बताती हैं कि बतौर महिला अकेले ट्रैवल करके उन्होंने जुर्म किया, एक ऐसे देश में जहां महिलाओं को अकेले ट्रैवल करने की इजाजत नहीं है.
महिला व्लॉगर ने कहा कि अकेले होने के कारण उन्हें परमिट भी जारी नहीं किया गया. उन्होंने दावा किया कि पहले जलालाबाद में भी उन्हें परमिट देने से मना कर दिया गया था, क्योंकि वे महिला होकर अकेले सफर कर रही थीं.
उन्होंने बताया कि जब उन्हें कहा गया कि उन्होंने कानून तोड़ा है, तो वे बुरी तरह घबरा गई थीं. उन्होंने उस शख्स से कॉन्टैक्ट किया, जिसने उन्हें बामियान तक पहुंचाने में मदद की थी. फिर उसी शख्स ने वहां मौजूद अधिकारियों से उनकी तरफ से बात की.
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अरुणिमा के मुताबिक, मुजाहिदीन लगातार कहते रहे कि उन्हें सफर करने के लिए परमिट लेना होगा, और एक गाइड भी साथ रखना होगा. हालांकि, कुछ समझौता होने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. महिला व्लॉगर ने बताया,
“मैंने उन्हें बताया कि मैं ये देश छोड़कर उज्बेकिस्तान जा रही हूं. उन्होंने कहा कि चूंकि मैंने नियमों का उल्लंघन करते हुए इतने दिनों तक देश में समय बिताया था, इसलिए मुझे जुर्माना भरना होगा और जब तक मैं जुर्माना नहीं भरती, मुझे कहीं भी जाने की इजाजत नहीं मिलेगी. इसलिए मैंने उनसे बात की और मामला सुलझा लिया. आखिरकार उन्होंने मुझसे कहा कि मैं बिना परमिट के अगले देश के लिए रवाना हो सकती हूं.”
अरुणिमा आगे कहती हैं,
“मुझे ये सब इसलिए झेलना पड़ा क्योंकि मैं एक महिला हूं. मेरे कई पुरुष दोस्तों ने इस देश की यात्रा की है. उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. मेरी कुछ महिला दोस्तों ने भी यहां यात्रा की है, लेकिन वे सभी या तो किसी गाइड के साथ या किसी पुरुष के साथ ही यात्रा कर पाईं.”
अपनी मुश्किलों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "यहां उनके फैसले ही कानून हैं. यहां कोई पुलिस, जेल या ऐसी कोई चीज नहीं है. यहां हर शख्स तालिबान जैसा है. इसका मतलब ये नहीं है कि हर कोई तालिबान है. यहां बहुत से लोग हैं, लेकिन फैसले वही लोग लेते हैं."
अरुणिमा कुछ हफ्ते पहले अफगानिस्तान पहुंची थीं. उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान के सफर के दौरान कई बार तालिबान के सदस्यों ने उन्हें जांच के लिए रोका और उनसे पूछताछ की.
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