यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने गुरुवार, 11 सितंबर को मुखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया. ये बंदरगाह लाल सागर (Red Sea) तट पर स्थित दुनिया के अहम समुद्री रास्तों में से एक है. हूती से भीषण लड़ाई के बाद लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की नेतृत्व वाली यमन की नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. आरोप है कि NRF को गुमराह करने और उसके लड़ाकों का मनोबल तोड़ने के लिए हूती लड़ाकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया है. आगे बताएंगे कि ये कैसे हुआ.
हूती ने AI से दुश्मन जनरल की आवाज बनाई, पूरी फोर्स को कंफ्यूज कर यमन की जमीन कब्जा ली
Houthi लड़ाकों ने Yemen के मुखा पर कब्जा कर लिया है. यह इलाका Red Sea के तट से बेहद करीब है. दावा है कि इलाके पर कब्जा करने के लिए हूती लड़कों ने Artificial Intelligence का इस्तेमाल किया.

मिसाइल और ड्रोन के बाद चप्पल पहने हूती लड़ाकों के जखीरे में AI जनरेटेड आवाज भी जुड़ गई है. मोखा पर नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज (NRF) का कब्जा था. 11 सितंबर को यमन के हूती ग्रुप और NRF के बीच जंग चली. लड़ाई के बीच कथित तौर पर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह के नाम से सर्कुलेट किया गया.
AI से लेफ्टिनेंट सालेह की आवाज क्लोन कीइंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल सालेह के नाम से फैलाए गए कथित AI ऑडियो में NRF को पीछे हटने का निर्देश दिया गया था. NRF ने AI एंगल निकाते हुए हूती पर आरोप लगाए. फोर्स ने कहा,
‘हूतियो ने सैनिकों को कंफ्यूज करने और उनका हौसला कमजोर करने के लिए AI का इस्तेमाल करके लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की आवाज का क्लोन बनाया था.’
लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की आवाज में सर्कुलेट हुए कथित अरबी रिकॉर्डिंग में कहा गया,
‘हीरो, इन नौजवानों ने सीख लिया है कि लड़ाई में पासा पलट सकता है. जंग में आगे बढ़ना और पीछे हटना दोनों जरूरी है. कुछ दिन आपके साथ होते हैं और कुछ नहीं, और इसमें कोई शर्म की बात नहीं है. हमारे पास रिजर्व, ज्यादा ताकत और लड़ाई जारी रखने के लिए लोग हैं.’
रिकॉर्डिंग में आगे कहा गया,
हथियार बनाने में Claude AI का यूज‘हालात का अंदाजा लगाने, अंदर से धोखा मिलने, साथियों की नाकामी और देश को हुए भारी नुकसान के बाद, सभी यूनिट्स को मुखा से पीछे हटना होगा. ताकि, दुश्मन को खुले इलाके में टारगेट किया जा सके. मैं दोहराता हूं कि सभी यूनिट्स को मुखा से वापस जाना होगा, ताकि दुश्मन को खुले इलाके में टारगेट किया जा सके.’
AI को लेकर NRF का दावा ऐसे समय पर आया है, जब दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों में से एक Anthropic ने यमन में हथियारों के लिए AI के इस्तेमाल के बारे में बताया. एंथ्रोपिक की एक थ्रेट इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, एक 154 पेज की रिपोर्ट जारी की गई.
रिपोर्ट में बताया गया कि नॉर्थ यमन मौजूद ‘खतरा पैदा करने वाले लोगों’ के एक ग्रुप की पहचान की, जिसने गाइडेड मिसाइलों के लिए सॉफ्टवेयर बनाने में एंथ्रोपिक के Claude AI मॉडल का इस्तेमाल किया. ‘खतरा पैदा करने वाले लोगों’ के लिए Anthropic ने सीधे हूती लड़ाकों का नाम नहीं लिया.
मगर, NRF को सपोर्ट करने वाले मुखा से चलने वाले अलजौम्हौरिया टीवी ने हूतियों के AI इस्तेमाल करने वाली बात की पुष्टि जरूर की. अलजौम्हौरिया टीवी ने बताया कि NRF के सैनिकों का मनोबल तोड़ने के लिए हूती लड़ाकों ने लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की आवाज का क्लोन बनाया.
हूती को मिली अहम बढ़तमुखा, लाल सागर के तट पर यमन का अहम स्ट्रेटेजिक इलाका है. ये ‘बाब अल-मंडेब स्ट्रेट’ के बेहद करीब है. इसके अलावा, मुखा दुनिया के सबसे अहम समुद्री चोकपॉइंट में से एक है. हूती लड़ाकों का इस पर कब्जा करना उनकी सबसे बड़ी जमीनी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है.
NRF क्या है?NRF को लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह लीड करते है. ये एक एंटी-हूती फोर्स है, जो हूतियों के साथ चल रही जंग में मोर्चा संभाल रही है. लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह, यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के भतीजे हैं.
अली अब्दुल्ला सालेह ने एक दशक पहले हूतियों के साथ गठबंधन किया था, लेकिन बाद में हूतियों ने ही उनकी हत्या कर दी. लेफ्टिनेंट जनरल तारेक सालेह की NRF को पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का समर्थन हासिल था, लेकिन इस साल की शुरुआत में उन्होंने सऊदी अरब का साथ देना शुरू कर दिया.
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