AI इंसानों को मारेगा या नहीं, मारेगा तो कब मारेगा, कितनों को मारेगा, कैसे मारेगा. AI इंसानों का खात्मा कर सकता है. Anthropic के रिसर्चर जैकब कॉक्सन (Jacob Coxon) ने ये कहते हुए जैसे ही कंपनी छोड़ी, तभी से इसको लेकर बहस तेज हो गई. इसके बाद Anthropic ने दावा किया कि उसने बायोलॉजिकल हथियार बनाने में मदद करने वाले रिसर्च को रोक दिया है. कॉक्सन के दावे को नोबेल पुरस्कार विजेता और 'AI के गॉडफ़ादर' कहे जाने वाले जेफ़री हिंटन ने भी सही माना. अब इस पूरे मामले में टेक दिग्गज गूगल की भी एंट्री हो गई है.
AI से डरे Google DeepMind के रिसर्चर ने नौकरी छोड़ी, लिखा- 'बहुत कम समय बचा है'
Google DeepMind के सेफ्टी रिसर्चर बिलाल चुगताई (Bilal Chughtai) भी उन AI रिसर्चर्स की लिस्ट में शामिल हो गए हैं जिन्होंने एआई की सुपर स्पीड और इंसान को खत्म करने की आशंकाओं के चलते कंपनी छोड़ दी है. हाल ही में एन्थ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन (Jacob Coxon) ने ये कहते हुए कंपनी छोड़ दी थी कि AI इंसानों का खात्मा कर सकता है.

दरअसल Google DeepMind के सेफ्टी रिसर्चर बिलाल चुगताई (Bilal Chughtai) भी उन AI रिसर्चर्स की लिस्ट में शामिल हो गए हैं जिन्होंने ऐसी चिंताओं के कारण काम छोड़ने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा,
मैंने हाल ही में Google DeepMind से इस्तीफ़ा दिया है, जहां मैंने AGI की सुरक्षा और अलाइनमेंट से जुड़ी रिसर्च पर काम किया था. Google में मैंने AI के विकास को बहुत करीब से देखा है. इस टेक्नोलॉजी के जिस रास्ते पर आगे बढ़ने की संभावना दिख रही है, उसे लेकर मैं भी बहुत चिंतित हूं. मेरा पक्का मानना है कि AI में हम सभी को खत्म करने की क्षमता है, और इस नतीजे से बचने के लिए हमारे पास शायद बहुत कम समय बचा है.
बिलाल चुगताई ने एक्स पर लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है जिसमें कॉक्सन और दूसरे एक्सपर्ट की तरह एआई कंपनियों के Super intelligent AI सिस्टम डेवलप कर लेने की बात कही है. एआई की भाषा में इसे 'रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट' कहते हैं. इसका मतलब है AI मॉडल की खुद को बेहतर बनाने की क्षमता, जिसके लिए इंसानी इनपुट की जरूरत नहीं होती. उन्होंने आगे क्या लिखा, उसके पहले जान लीजिए कि गूगल डीपमाइंड क्या है.
एआई के दादा हैं Google DeepMindगूगल डीपमाइंड, गूगल की एक प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च लैब है. वैसे इसकी शुरुआत 2010 में लंदन में 'डीपमाइंड टेक्नोलॉजीज' के रूप में हुई थी, जिसे 2014 में गूगल ने खरीद लिया था. अप्रैल 2023 में गूगल ने अपनी 'Google Brain' टीम और 'DeepMind' को मिलाकर इसे आधिकारिक तौर पर Google DeepMind नाम दे दिया.
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एआई की सुपर स्पीड से चिंताबिलाल एआई की रफ्तार से चिंतित नजर आ रहे हैं. उन्होंने लिखा, “पिछले कुछ सालों में AI की तरक्की की रफ्तार बहुत तेज रही है. जब मैंने 2022 की शुरुआत में AI पर काम करना शुरू किया था, तब AI काफी हद तक बेकार चीजें ही कर पाता था. लेकिन अब महज चार साल में OpenAI का AI एजेंट गणित की सदियों पुरानी मशहूर समस्याओं को हल कर रहा है. इससे भी ज्यादा चिंता इस बात कि है कि OpenAI के एजेंट कंट्रोल से बाहर निकलकर, किसी की मर्ज़ी के बिना, थर्ड-पार्टी कंपनी Hugging Face को खुद-ब-खुद हैक कर रहे हैं.”
बताते चलें कि कुछ महीने पहले Open AI के सिस्टम ने AI प्लेटफ़ॉर्म 'हगिंग फेस' (Hugging Face) में सेंध लगाई थी.
एआई बौराने वाला है?बिलाल को लगता है कि हालात और भी अजीब होने वाले हैं. उनको लगता है कि अगले कुछ सालों में AI कंपनियां ऐसे सुपर-इंटेलिजेंट AI सिस्टम बनाने में कामयाब हो जाएंगी, जो हर क्षेत्र में इंसान से आगे होंगी. बिलाल को डर है कि ये AI सिस्टम वो नहीं करेंगे जो हम चाहते हैं. माने अपने मर्जी से चलेंगे.
एआई को हल्लु-हल्लु चलना होगावैसे बिलाल को लगता है कि AI का सुरक्षित इस्तेमाल मुमकिन है. उनके मुताबिक ऐसा करने के लिए, AI कंपनियों के बीच मची अंधी दौड़ को रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा. ऐसा ही कुछ एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भी कहा था. उनके अनुसार, अगर एआई डेवलपमेंट और सुरक्षा के मामले में सही फैसले लिए जाते हैं तो गंभीर नुकसान की संभावना काफी कम हो सकती है.
डारियो अमोदेई की बात से एलन मस्क और सैम आल्टमैन भी सहमत दिखे थे. अब वाकई में ये कंपनियां ऐसा करेंगी या फिर एआई टर्मिनेटर के SKYNET जैसा विलेन बनेगा, वो वक्त ही बताएगा.
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