The Lallantop

iPhone 18 Pro के कैमरे पर संभलकर इतराना, सामने चीनी स्मार्टफोन न पड़ जाए

18 प्रो सीरीज में यूजर्स को वेरिएबल-अपर्चर मिलने वाला है जिसकी रेंज f/1.48 से f/4 तक होने वाली है. अब जो आप ऐप्पल पगलू हैं तो आप पर्याप्त खुश हो लीजिए. लेकिन हम आपको थोड़ा नहीं बल्कि दुख प्रो मैक्स (Variable aperture is a minor tweak) देने आए हैं. सैमसंग ने ये काम आज से आठ साल पहले कर डाला था और चीनी फ्लैगशिप कंपनियों की बात तो करते ही नहीं. कैमरा असेंबली में चीनी कंपनियों ने लेंस फाड़ काम कर दिया है.

Advertisement
post-main-image
iPhone 18 प्रो सीरीज में वेरिएबल-अपर्चर मिलने वाला है

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • Apple ने iPhone 18 लॉन्च को टालकर अपना पूरा ध्यान पहले फोल्डेबल डिवाइस iPhone Duo और iPhone 18 प्रो सीरीज के कैमरा फीचर्स पर केंद्रित किया है।
  • iPhone 18 प्रो में वेरिएबल अपर्चर तकनीक देने का कारण कैमरा एक्सपोजर और डेप्थ ऑफ फील्ड पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करना है, जबकि सेंसर साइज सीमित रहना इसकी सीमा निर्धारित करता है।
  • इस फैसले से Apple कैमरा फीचर्स में अग्रणी बने रहने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चीनी स्मार्टफोन कंपनियां कैमरा टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

Apple ने अपने पहले फोल्डेबल डिवाइस iPhone Duo को पूरा फोकस देने के लिए iPhone 18 लॉन्च नहीं किया. लेकिन इस चक्कर में 18 प्रो सीरीज पर भी फोकस कम रहा. हालांकि प्रो सीरीज के दोनों डिवाइस हर मामले में iPhone Duo से आगे हैं, स्पेशली कैमरा वाले इलाके में. 

Advertisement

18 प्रो सीरीज में यूजर्स को वेरिएबल-अपर्चर मिलने वाला है. नया 48MP का मेन कैमरा f/1.48, f/1.8, f/2.8 और f/4.0 के बीच स्विच कर सकता है. यह अपने-आप अपर्चर चुन सकता है या यूज़र को प्रो कंट्रोल के जरिए मैन्युअली अपर्चर चुनने की सुविधा भी देता है. अब जो आप ऐप्पल फैन हैं तो पर्याप्त खुश हो लीजिए. लेकिन हम आपको थोड़ा नहीं बल्कि ‘दुख प्रो मैक्स’ (Variable aperture is a minor tweak) देने आए हैं. लेकिन उसके पहले जरा समझते हैं कि वेरिएबल अपर्चर क्या बला है.

क्या है वेरिएबल अपर्चर?

कागज पर वेरिएबल अपर्चर स्मार्टफोन फोटोग्राफर्स को एक्सपोज़र और डेप्थ ऑफ फील्ड (depth of field) को कंट्रोल करने का एक और तरीका देता है. अपर्चर यानी लेंस का मुंह खोलने से सेंसर तक ज्यादा रोशनी पहुंचती है, जिससे शटर स्पीड तेज हो सकती है या ISO सेटिंग कम हो सकती है. इसे कम करने से बोकेह (bokeh) यानी पोर्ट्रेट मोड कम हो सकता है और सीन का ज्यादा हिस्सा फोकस में रह सकता है. वेरिएबल अपर्चर खास तौर पर पोट्रेट और मैक्रो फोटोग्राफी के काम का है, जहां स्मार्टफोन कैमरे अक्सर जरूरत से ज्यादा ब्लर (धुंधलापन) पैदा कर सकते हैं.

Advertisement

ये भी पढ़ें: iPhone Duo लेफ्ट हैंड के लिए मुसीबत, इसे केवल राइट के लिए ही बनाया गया?

हालांकि-हालांकि-हालांकि, ये पूरा गेम कैमरे के सेंसर के साइज पर डिपेंड करता है. स्मार्टफोन स्टैंडर्ड के हिसाब से iPhone 18 Pro Max का 1/1.28-इंच का मेन सेंसर वाकई काफी बड़ा है, लेकिन फिर भी यह डेडिकेटेड APS-C और फुल-फ्रेम कैमरों में मिलने वाले सेंसर के मुकाबले काफी छोटा है. इसका मतलब ये नहीं है कि अपर्चर बेकार है. f/1.48 सेटिंग, पिछले साल के 17 प्रो सीरीज के थोड़े कम चौड़े f/1.8 फिक्स्ड अपर्चर के मुकाबले कम रोशनी में बेहतर परफॉर्मेंस दे सकती है. लेकिन बड़े सेंसर वाले कैमरों की तुलना में, iPhone का छोटा सेंसर उसकी रोशनी सोखने की क्षमता और इमेज क्वालिटी के लिए एक बड़ी रुकावट बना रहेगा. 

Advertisement

यही बात 'डेप्थ ऑफ फील्ड' पर भी लागू होती है. ऑप्टिकल बैकग्राउंड ब्लर कम होगा तो सही, लेकिन इस फर्क का क्रिएटिव तरीके से फायदा उठाना मुश्किल होगा. इतना पढ़कर आपको लगेगा कि कोई बात नहीं, सेंसर डिजिटल कैमरे से छोटा है लेकिन स्मार्टफोन में तो हम ही राजा हुए.

apple
ऐप्पल ने iPhone 7 Plus से पोट्रेट मोड दिया था 
सैमसंग कोने में खड़ा हंस रहा है

अब आपके दुखी प्रो होने का 'टेम' आ गया है. सैमसंग ने साल 2018 में ही Galaxy S9 and S9+ में इस तकनीक का इस्तेमाल किया था. Galaxy S9 f/1.5 और f/2.4 के बीच स्विच कर सकता था. यह अंधेरे में f/1.5 का इस्तेमाल करता था और तेज रोशनी में f/2.4 पर स्विच हो जाता था. इसी साल लॉन्च हुए Galaxy S26 Ultra के मेन कैमरे में फिक्स्ड f/1.4 अपर्चर है. माने जो काम सैमसंग ने आठ साल पहले किया वो ऐप्पल अभी कर रहा.

मुन्ना तुमने चाइनीज फ्लैगशिप नहीं देखे 

साउथ कोरिया से अब चलते हैं चीन. अब आपके पूरे दुखी प्रो मैक्स होने का टेम आ गया है. क्योंकि कैमरा असेंबली में चीनी कंपनियों ने जबरदस्त काम कर दिया है. Xiaomi, Vivo, Oppo के फ्लैगशिप से क्लिक किया हुआ फोटो देखकर आपको लगेगा ही नहीं कि इनको स्मार्टफोन से क्लिक किया गया है. Xiaomi 17 Ultra, OPPO Find X9 Ultra और vivo X300 Ultra कैमरा क्वालिटी में बहुत आगे जा चुके हैं.

vivo, oppo, xiaomi
vivo, oppo, xiaomi 

ये डिवाइस बेहतरीन पोर्ट्रेट क्लिक करते हैं, जिसकी वजह है 70mm के बराबर फोकल लेंथ, बड़े सेंसर और वाइड अपर्चर का कॉम्बिनेशन. साथ ही, ज्यादा मेगापिक्सल की वजह से इनके टेलीफ़ोटो कैमरों में इतना रिज़ॉल्यूशन होता है कि दूसरे पेरिस्कोप कैमरे की ज़रूरत के बिना ही 6x से 12x तक ज़ूम करके अच्छी फ़ोटो ली जा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक OPPO Find X10 Pro Max में कंपनी 200MP का सेंसर और DeepPix HDR तकनीक देने वाली है.

ऐप्पल अटक गई है

जहां चीनी कंपनियां कैमरा लेंस को हर साल अपग्रेड कर रही हैं वहीं ऐप्पल चार साल पीछे चल रहा. उदाहरण के लिए, iPhone 18 Pro के मेन कैमरे में अभी भी iPhone 14 Pro Max जैसा ही 48MP, 1/1.28-इंच का सेंसर इस्तेमाल किया गया है. हालांकि इसके हार्डवेयर और प्रोसेसिंग में समय के साथ सुधार किए गए हैं. iPhone 16 Pro के साथ 48MP का अल्ट्रावाइड कैमरा आया, लेकिन इसमें अभी भी तुलनात्मक रूप से छोटा 1/2.55-इंच का सेंसर इस्तेमाल किया गया है. वही साइज जिसे Apple ने iPhone 14 सीरीज़ के बाद से ही अपने अल्ट्रावाइड कैमरे के लिए बनाए रखा है. 48MP का टेलीफोटो लेंस सबसे नया मॉडल है, जो पिछले साल के iPhone 17 Pro में आया था, लेकिन यह भी अभी कॉम्पैक्ट 1/2.55-इंच फ़ॉर्मैट का ही है, जिसे कम रोशनी में मुश्किल होती है.

आईफोन 'बूढ़ा' हो रहा है

लुब्ब-ए-लुबाब ये कि आईफोन कैमरा असेंबली में उम्रदराज हो रहे हैं. शर्ट वही है, बस बटन बदले जा रहे हैं. हालांकि ऐप्पल फैन के लिए तो कोई भी अपग्रेड बड़ी बात है. लेकिन हकीकत में मामला अलग है. इसलिए अगर आपके पास 18 प्रो सीरीज का फोन है तो आप खूब फ्लैक्स कीजिए. मगर ध्यान रहे, अगर सामने वाले के पास कोई चीनी फ्लैगशिप है तो जरा ध्यान से. कांसे का सुर कांसे में रहे तो अच्छा. मतलब ऐप्पल की बात ऐप्पल तक रहे तो अच्छा.

वीडियो: iPhone 18 सीरीज लॉन्च के बाद iPhone 17 का दाम बढ़ा

Advertisement