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लखनऊ के युवक ने खुद को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति का करीबी बताकर 440 करोड़ का गेम कर दिया

गौरव श्रीवास्तव ने प्रबोवो सुबियांतो के छोटे भाई हाशिम दजोयोहादिकुसुमो और उनकी कंपनी Arsari Group के साथ भी कारोबारी रिश्ते बनाए.

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भारत से डिफेंस होने से एक दिन पहे इंडोनेशिया के मीडिया में गौरव श्रीवास्तव की ही चर्चा थी. (तस्वीर- इंडिया टुडे)

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  • गौरव श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने खुद को CIA अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से जुड़ी अरबों डॉलर की रक्षा डील के शुरुआती समझौते हासिल किए।
  • 2020 से 2022 के बीच गौरव की कंपनियों ने ऐसी रक्षा डील्स की पेशकश की, जबकि जांच में पता चला कि ये कंपनियां सिर्फ कागज़ों पर मौजूद शेल कंपनियां थीं और उनके पास रक्षा क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था।
  • इंडोनेशिया की वित्तीय खुफिया एजेंसी PPATK इस मामले की जांच कर रही है और संभावित मनी लॉन्ड्रिंग या वित्तीय अपराध के सबूत मिलने पर मामला पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को दिया जाएगा।

लखनऊ में जन्मे भारतीय मूल के अमेरिकी बिजनेसमैन गौरव श्रीवास्तव चर्चा में हैं. उन पर आरोप है कि उन्होंने खुद को CIA से जुड़ा अधिकारी बताकर इंडोनेशिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री और मौजूदा राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके करीबी लोगों तक पहुंच बनाई. फिर इसी भरोसे के दम पर अरबों डॉलर की संभावित रक्षा डील से जुड़े शुरुआती समझौते हासिल किए. लेकिन बाद में जांच में दावा किया गया कि जिन कंपनियों के नाम पर ये डील्स ली गई थीं, वे सिर्फ कागज़ों पर मौजूद शेल कंपनियां थीं.

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ये खुलासे ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट यानी OCCRP और इंडोनेशिया की मैगजीन Tempo की इंवेस्ट‍िगेशन में सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ये कथित फर्जीवाड़ा 2020 से 2022 के बीच हुआ. इस दौरान गौरव श्रीवास्तव से जुड़ी कंपनियों को इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और सरकारी एयरोस्पेस कंपनी PT Dirgantara Indonesia की ओर से रक्षा क्षेत्र के पांच Letter of Intent यानी LOI मिले.

ध्यान रहे, Letter of Intent कोई अंतिम कॉन्ट्रैक्ट नहीं होता. ये सिर्फ़ इस बात का शुरुआती संकेत होता है कि दोनों पक्ष किसी संभावित सौदे पर आगे बातचीत करना चाहते हैं. इन प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल थे,

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- 36 F-15 लड़ाकू विमान खरीदने की योजना.
- 30 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर खरीदने का प्रस्ताव.
- C-130 हरक्यूलिस विमानों के रखरखाव का प्रोजेक्ट.
- आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाने की योजना.

इनमें सबसे बड़ी डील 36 F-15 लड़ाकू विमानों की थी, जिसकी अनुमानित कीमत 13.9 अरब डॉलर, यानी करीब 1.19 लाख करोड़ रुपये बताई गई.

ये शुरुआती समझौते पांच कंपनियों Orbimo Corporation, Zegasus Corporation, Constentis Corporation और Unity Accipiter Corporation के नाम पर हुए थे. लेकिन जांच में दावा किया गया कि इन कंपनियों के पास रक्षा क्षेत्र का कोई अनुभव नहीं था. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि कुछ कंपनियां उसी दिन अमेरिका के वायोमिंग राज्य में रजिस्टर हुईं, जिस दिन उन्हें इंडोनेशिया से Letter of Intent मिला था. यानी जिन कंपनियों को अरबों डॉलर के रक्षा प्रोजेक्ट मिलने की बात हो रही थी, उनमें से कुछ तो उसी दिन अस्तित्व में आई थीं. बाद में टैक्स नियमों का पालन नहीं करने के कारण इनमें से कई कंपनियां बंद भी हो गईं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव श्रीवास्तव ने प्रबोवो सुबियांतो के छोटे भाई हाशिम दजोयोहादिकुसुमो और उनकी कंपनी Arsari Group के साथ भी कारोबारी रिश्ते बनाए. Wall Street Journal की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, गौरव ने अपने डच बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट से दावा किया कि उनके CIA से मजबूत संबंध हैं और इसी वजह से उनकी कंपनी को बड़े सरकारी प्रोजेक्ट मिलते हैं. ट्रोस्ट ने इन दावों पर भरोसा किया और उनकी कंपनी ने Arsari Group को 51 मिलियन डॉलर, यानी करीब 440 करोड़ रुपये का कर्ज़ दिया.

बाद में ट्रोस्ट ने आरोप लगाया कि इस रकम का लगभग आधा हिस्सा गौरव से जुड़ी कंपनियों में वापस पहुंच गया. उनका दावा है कि इसी पैसे से अमेरिका के लॉस एंजेलिस में करीब 215 करोड़ रुपये की एक आलीशान हवेली खरीदी गई.

अब सवाल उठता है कि आखिर गौरव श्रीवास्तव को इतनी बड़ी पहुंच मिली कैसे? Tempo की रिपोर्ट के मुताबिक, नील्स ट्रोस्ट ने बताया कि 2022 में गौरव उन्हें सीधे प्रबोवो सुबियांतो के घर लेकर गए थे. रास्ते में उन्हें सरकारी सुरक्षा एस्कॉर्ट मिला, जिसकी वजह से बिना किसी ट्रैफिक रुकावट के वे सीधे वहां पहुंच गए.

ट्रोस्ट के मुताबिक, इससे उन्हें यकीन हो गया कि गौरव की इंडोनेशिया के सबसे प्रभावशाली लोगों तक पहुंच है. रास्ते में गौरव ने दावा किया कि वे अक्सर प्रबोवो के घर आते-जाते हैं और कई बार वहीं ठहरते भी हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़ने में मदद करने की वजह से प्रबोवो उनका बहुत सम्मान करते हैं.

इतना ही नहीं, गौरव ने यह दावा भी किया कि उन्होंने ही प्रबोवो का नाम अमेरिका की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में भूमिका निभाई थी. गौरतलब है कि मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के कारण प्रबोवो को करीब 20 वर्षों तक अमेरिका का वीज़ा नहीं मिला था.

रिपोर्ट के मुताबिक, गौरव राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी ऐसी बातें भी बताते थे, जिन्हें केवल बेहद करीबी लोग जानते थे. उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कहा कि प्रबोवो अपने घर में लगे मकड़ी के जालों को प्रकृति का हिस्सा मानते हैं और उन्हें साफ़ नहीं करवाते.

नील्स ट्रोस्ट ने अमेरिका की अदालत में गौरव श्रीवास्तव के खिलाफ कई सिविल मुकदमे भी दायर किए हैं. इनमें धोखाधड़ी, जबरन वसूली और गलत जानकारी देकर आर्थिक लाभ लेने जैसे आरोप लगाए गए हैं. मुकदमों में रिकॉर्ड की गई बातचीत का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कथित तौर पर गौरव खुद को CIA के लिए काम करने वाला बताते सुनाई देते हैं.

हालांकि, गौरव श्रीवास्तव इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं. उनका कहना है कि उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर नील्स ट्रोस्ट उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. गौरव का दावा है कि उन्होंने कभी खुद को CIA अधिकारी नहीं बताया और अदालत में पेश की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग भी फर्जी हैं.

इस पूरे मामले की जांच इंडोनेशिया की वित्तीय ख़ुफ़िया एजेंसी PPATK कर रही है. एजेंसी का कहना है कि वह दूसरे देशों की संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है. अगर जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य फाइनेंश‍ियल क्राइम के सबूत मिलते हैं, तो मामला पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है.

वीडियो: इंडोनेशिया के रिसॉर्ट से तौलिया, चम्मच चुराते पकड़े गए भारतीय टूरिस्ट्स

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