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'चीन ने अरुणाचल प्रदेश में गांव बना लिया', पेंटागन की रिपोर्ट पर भारत ने की सीधी बात

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पेंटागन रिपोर्ट पर भारत का रुख रखा है.

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सुबनसिरी ज़िले में चीन ने बनाया गांव (सांकेतिक फोटो)
पेंटागन. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय. हाल में भारत में चीनी घुसपैठ को लेकर पेंटागन की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें दावा किया गया था कि चीन अरुणाचल प्रदेश से लगे एक विवादित क्षेत्र में गांव का निर्माण कर रहा है. अब इस रिपोर्ट पर भारत की प्रतिक्रिया आई है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसने पेंटागन की रिपोर्ट पर गौर किया है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक बयान में विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत ने न तो अपने इलाके में चीन द्वारा किसी अवैध क़ब्ज़े को स्वीकारा है और न ही उसने चीन के ऐसे ग़लत दावों को कभी माना है. बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा,
“भारत सरकार ने हमेशा राजनयिक माध्याओं से ऐसी गतिविधियों का कड़ा विरोध किया है. और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रहेगा."
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा को प्रभावित करने वाले सभी घटनाक्रमों पर लगातार नज़र रखता है और अपनी अखंडता की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी उपाय करेगा. इसके अलावा अरिंदम बागची ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि चीन की सीमा से लगे क्षेत्रों में तेजी से सड़क और पुल बनाने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा बुनियादी ढांचे से जुड़े दूसरे निर्माण कार्यों में भी तेज़ी लाई गई है. मंत्रालय का कहना है कि इससे सीमा पर जो स्थानीय आबादी है उसको कनेक्टिविटी के लिए सुविधा मिलेगी.

क्या थी रिपोर्ट?

अमेरिकी रक्षा विभाग या कहें पेंटागन ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC के पास पूर्वी क्षेत्र में एक बड़े गांव का निर्माण कर लिया है. रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा कि ये इलाका तिब्बत अटॉनमस रीजन और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सेक्टर के बीच पड़ता है. पेंटागन ने ये भी दावा किया कि चीन करीब साढ़े चार किलोमीटर अंदर घुसकर यहां लगभग 100 घरों वाला गांव बसा चुका है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबनसिरी नाम के जिस इलाके में ये गांव बनाया गया है वहां चीन ने 6 दशक पहले ही क़ब्ज़ा कर लिया था. रक्षा मामलों से जुड़े एक सरकारी सूत्र ने बताया था कि 1959 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने असम राइफ़ल पोस्ट पर क़ब्ज़ा कर ये इलाक़ा हथियाया था.

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