भारत ने इज़राइली कंपनी राफेल के साथ हुआ 500 मिलियन डॉलर (करीब 3,175 करोड़ रुपए) का रक्षा करार खत्म कर दिया है. इस करार के तहत राफेल भारतीय कंपनी कल्याणी ग्रुप के साथ मिलकर 1600 स्पाइक मिसाइल बनाने जा रही थी. हाल ही में राफेल ने हैदराबाद में अपने प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया था. हालांकि, भारत ने राफेल के साथ 70 मिलियन डॉलर के दूसरे करार को जारी रखा है. इस करार के तहत इज़राइली कंपनी भारत को सतह से जमीन पर मार करने वाली 131 मिसाइल बनाकर देने वाली है.
क्या है स्पाइक मिसाइल, जिसके बिना भारतीय सेना पाकिस्तान के सामने कमजोर पड़ रही है
भारत ने इजराइल से किया 3175 करोड़ रुपए का रक्षा करार अचानक से क्यों रद्द कर दिया.

क्या है स्पाइक मिसाइल
भारत युद्ध के मोर्चे पर जिस एक जगह पकिस्तान से मात खा सकता है, वो है एंटी टैंक मिसाइल. भारत के पास फिलहाल फ़्रांस की Milan 2T मिसाइल उपलब्ध हैं. उनकी मारक क्षमता 2 किलोमीटर तक है, जबकि पाकिस्तानी लश्कर के पास चीन में बनी HJ-8 पोर्टेबल एंटी टैंक मिसाइल है. इसे पाक सेना ने 'बख्तर शेख' नाम दे रखा है. यह भारत की मिसाइल से से दोगुनी दूरी पर मार करने वाली एंटी टैंक मिसाइल हैं. इसके अलावा पाकिस्तानी इन्फेंट्री के पास अमेरिका में बनी TOW मिसाइल भी है. यह भी भारतीय एंटी टैंक मिसाइल से कहीं बेहतर है. भारतीय सेना लंबे समय से अच्छी एंटी टैंक मिसाइल की मांग कर रही थी.

स्पाइक मिसाइल
स्पाइक इज़राइल की डिजाइन की हुई चौथी पीढ़ी की मिसाइल है. इस मिसाइल की ख़ास बात यह है कि यह गाइडेड मिसाइल है. माने आप मिसाइल दागिए और भूल जाइए. वो अपने-आप निशाने पर जाकर लग जाएगी. दूसरा, इस मिसाइल को आसानी से लादकर इधर से उधर लेकर जाया जा सकता है. इसकी ये दो खासियत आमने-सामने के मोर्चे में बहुत मददगार साबित होती हैं. इससे चलते हुए टैंक पर बिना चूक के निशाना लगाया जा सकता है. मिसाइल दागने के बाद अपनी पोजीशन बदल सकते हैं, ताकि दुश्मन के निशाने पर आने से बच जाएं. फिलहाल इटली, जर्मनी, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्पेन आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कुल 26 देश इस मिसाइल का प्रयोग कर रहे हैं.
स्पाइक ही क्यों?
2014 में सेना की एंटी टैंक मिसाइल की मांग पूरी करने की कवायद शुरू हुई. उस समय भारत के पास दो विकल्प थे. पहला, इज़राइल की बनी हुई स्पाइक मिसाइल और दूसरा, अमेरिका में बनी जेवलिन मिसाइल. भारत ने लंबी सौदेबाजी के बाद राफेल को मिसाइल बनाने की जिम्मेदारी दी. इस करार में भारत की तरफ से दो मुख्य शर्तें रखी गई थीं. पहली कि इजराइल मिसाइल का निर्माण भारत में करेगा. दूसरी कि इजराइल इस मिसाइल को बनाने की टेक्नॉल्जी भारत के साथ साझा करेगा. राफेल ने इन शर्तों को बड़ी हुज्जत के बाद मान लिया था.

स्पाइक मिसाइल
क्यों कैंसिल हुई डील
भारत की तरफ से डील कैंसिल होने की जानकारी एक सप्ताह पहले ही दे दी गई थी. राफेल ने करार रद्द होने पर बयान जारी करके अफ़सोस जताया है, लेकिन करार रद्द होने के कारणों पर इस बयान में कुछ भी नहीं कहा गया है. भारत में रक्षा हथियार बनाने की जिम्मेदारी सरकरी एजेंसी DRDO (Defence Research and Development Organisation) के पास है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार DRDO ने रक्षा मंत्रायल को भरोसा दिलाया है कि वो चार साल के भीतर कहीं कम लागत में स्पाइक के स्तर की एंटी टैंक मिसाइल बनाकर दे देगा. इस मंत्रालय ने DRDO में भरोसा जताते हुए राफेल के साथ अपने करार को रद्द कर दिया है.
इसी महीने की 14 तारीख को इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत दौरा होना है. राफेल वहां की सरकारी कंपनी है और इसके सीईओ भी नेतन्याहू के साथ भारत आ रहे हैं. ऐसे में एक संभावना यह भी है कि पूरी डील पर नए सिरे से सौदेबाजी शुरू हो.
यह भी पढ़ें
माघ मेले में ऐसा क्या है कि करीब 5 करोड़ लोग आते हैं
आंध्र प्रदेश के संगीत कुमार राय ने कहा, 15 की उम्र में ही मां बन गई थी ऐश्वर्या राय
बम ब्लास्ट में मरे रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र के हत्या की पूरी कहानी











