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सारस के बारे में ये खास बातें जो शायद आरिफ को भी नहीं पता होंगी!

सारस प्रेम का प्रतीक, एक ऐसा पक्षी जिसे भारत में पूजा तक जाता है

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सारस पक्षी (फोटो- ट्रूपर अकाउंट ट्विटर)

उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी सारस (Sarus And Arif Viral News) काफी चर्चा में है. सारस के साथ दोस्ती के बाद चर्चा में आए अमेठी के आरिफ. लेकिन अब आरिफ सारस से बिछड़ चुके हैं. और इस वजह से काफी परेशान हैं. आरिफ अपने दोस्त सारस से मिलना चाहते हैं, लेकिन सारस उनसे दूर है. हम आपको सारस की कुछ ऐसी खास बातें बताते हैं जो आप शायद ही जानते होंगे.

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1. भारत में सारस की आबादी सबसे ज्यादा

वैसे तो सारस भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है. लेकिन भारत में इसकी आबादी सबसे ज्यादा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में सारस की संख्या 15 से 20 हजार के आसपास है. ये उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार में पाए जाते हैं. ये अक्सर वेटलैंड्स यानी दलदली भूमि में पाए जाते हैं. इनका घोंसला छिछले पानी के पास हरी-भरी झाड़ियों और घास में पाया जाता है. सारस आमतौर पर 2 से 5 के ग्रुप में रहते हैं.

2. रामायण से संबंध

सारस का रामायण की कथा से भी संबंध माना जाता है. रामायण की कथा की शुरुआत सारस के एक जोड़े की कहानी से होती है. महर्षि वाल्मीकि कथा में इस प्यारे जोड़े को देख रहे होते हैं. तभी अचानक एक शिकारी तीर चलाकर एक सारस को अपना शिकार बना लेता है. जिसके बाद दूसरा सारस अपने साथी के बिछड़ने के दुख में अपने प्राण त्याग देता है. इस घटना के बाद महर्षि वाल्मीकि शिकारी को श्राप दे देते हैं.

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3. गोंड जनजाति सारस को पवित्र मानती है

उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तराखंड और असम जैसे कुछ राज्यों में पाई जाने वाली गोंड जनजाति के लोग सारस को पवित्र मानते हैं. गोंड जनजाति सारस पक्षी को ‘पांच देवताओं के उपासक’ के रूप में पूजते हैं.

4. प्रेम का प्रतीक माना जाता है

सारस को प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. अपने जीवन काल में सारस जिसे एक बार अपना साथी बना लेते हैं, उसके साथ पूरा जीवन गुजारते हैं. भारत में इस पक्षी को दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है. कई जगहों, जैसे गुजरात में नवविवाहित जोड़ों के लिए सारस युगल का दर्शन करना जरूरी परंपरा की तरह माना जाता है.

5. पैर और चोंच एक साथ चलते हैं

सारस के बारे में एक खास बात ये है कि इस पक्षी के पैर और चोंच एक लय में चलते हैं. सारस के पैर और चोंच एक साथ मिलकर चलते हैं. इसके अलावा अगर सारस दो अंडे देती है, तो पहले और दूसरे अंडे के बीच में 48 घंटे का अंतर होता है. प्रजनन के समय सारस के लाल पैर, सिर और गर्दन चमकीले हो जाते हैं.

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