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इम्यून सिस्टम से ही ठीक हो जाएगा HIV? वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली, लेकिन ट्रंप ने फंडिंग रोक दी

HIV Cure research Immune therapy: डॉक्टर स्टीवन डीक्स और उनके साथियों के पास ऐसा रिसर्च थी जो ये बताता है कि इम्यून सिस्टम को ही HIV को कंट्रोल करने के लिए तैयार किया जा सकता है.

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एक व्यक्ति में 18 महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी HIV का लेवल काफी कम था. (Courtesy-इंडिया टुडे)

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  • डॉक्टर स्टीवन डीक्स और उनकी टीम ने एक रिसर्च में संकेत पाया कि एंटीरेट्रोवायरल दवाएं बंद करने के बाद भी कुछ HIV मरीजों में वायरस को इम्यून सिस्टम कंट्रोल कर सकता है।
  • ट्रंप प्रशासन ने घरेलू और विदेशी स्तर पर HIV प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग में कटौती की, जिससे 100 कम्युनिटी-बेस्ड संगठनों की फेडरल ग्रांट बंद हो गई।
  • फंडिंग की रोक के कारण HIV पर फंक्शनल क्योर खोजने वाली रिसर्च पर असर पड़ा है और वैज्ञानिक अब आगे की तफ्तीश और प्रक्रिया को जारी रखने में बाधाओं का सामना कर रहे हैं।

क्या HIV को कंट्रोल करने के लिए इम्यून सिस्टम को तैयार किया जा सकता है? क्या बिना एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लिए भी HIV का मरीज ठीक रह सकता है? ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब साइंटिस्ट ढूंढ रहे हैं. या कहें कि उन्हें ऐसे संकेत मिले है कि बिना दवा के HIV पर कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन रिसर्च को और आगे बढ़ाया जाता उस बीच ही खबर आती है कि अमेरिकी सरकार HIV के लिए फंडिंग लिमिटेड कर रही है.

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ट्रंप प्रशासन ने घरेलू और विदेशी स्तर पर HIV प्रोजेक्ट से जुड़ी कई फंडिंग पर रोक लगा दी है. एक रिपोर्ट में बताया गया कि हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने 100 कम्युनिटी-बेस्ड संगठनों की फेडरल HIV-रोकथाम ग्रांट (अनुदान) बंद कर दी है.  

सरकार के इस फैसले का असर उन साइंटिस्ट और डॉक्टर्स के रिसर्च पर पड़ रहा है, जो HIV का फंक्शनल क्योर ढूंढ रहे थे. फंक्शनल क्योर यानी बिना दवा के वायरस को नियंत्रित रखना. इनमें डॉक्टर स्टीवन डीक्स का नाम भी है. डॉक्टर स्टीवन और उनके साथियों को रिसर्च के दौरान ऐसे संकेत मिले थे कि HIV को कंट्रोल करने के लिए इम्यून सिस्टम को तैयार किया जा सकता है.

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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में स्टीवन डिस्क ने एक स्टडी की. उन्होंने HIV से पीड़ित 10 लोगों को जकरबर्ग सैन फ्रांसिस्को जनरल हॉस्पिटल में बुलाया. मरीजों ने अस्पताल में लगभग 50 बार विजिट किया. उन्हें कई तरह के एक्सपेरिमेंटल इलाज दिए गए. ताकि उनके इम्यून रिस्पॉन्स के अलग-अलग हिस्से मजबूत रहें. फिर कड़ी मेडिकल निगरानी में मरीजों ने रोजाना ली जाने वाली एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लेना बंद किया.

18 महीने तक HIV नहीं हुआ डिटेक्ट

दवा बंद करने के बाद HIV आमतौर पर कुछ ही हफ्तों में वापस आ जाता है. लेकिन स्टडी में पता लगा कि 10 में से सात लोगों ने बिना इलाज के वायरस को कंट्रोल में रखा. छह लोगों में वायरस का लेवल काफी कम रहा. स्टीवन डीक्स  और उनके साथियों ने बताया कि एक व्यक्ति में 18 महीने से ज्यादा समय तक HIV डिटेक्टबल नहीं हुआ.  

जून में एक फॉलो-अप एनालिसिस जारी हुआ. इसमें ऐसे संकेत मिले कि HIV के दोबारा डिटेक्ट होने से कुछ हफ्ते पहले ही इम्यून सिस्टम एक्टिव हो गया था. इससे पता चला कि ट्रीटमेंट ने शायद कुछ लोगों के शरीर को वायरस को रोकने के लिए तैयार कर दिया था. मगर ये स्टडी काफी छोटी थी और इसमें कोई कंट्रोल ग्रुप नहीं था. इसलिए इसके नतीजों को अभी फंक्शनल क्योर का सबूत नहीं माना जा सकता. 

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लगभग 6 लाख लोगों की AIDS से मौत

डॉक्टर और उनकी टीम आगे रिसर्च कर ये जानने की कोशिश करना चाहते हैं कि ट्रीटमेंट के किस हिस्से ने वायरस को कंट्रोल किया. जब इसकी जानकारी मिल जाएगी, तो इसे ज्यादा लोगों में दोहराने के आसान तरीके खोजे जाएंगे. लेकिन सरकार ने इन रिसर्च के लिए फंडिंग पर ही रोक लगा दी है. जिससे इन वैज्ञानिकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में लगभग 4 करोड़ लोग HIV के साथ जी रहे थे. उस समय AIDS से 5.7 लाख मौतें हुईं. वहीं, HIV संक्रमण के 12 लाख नए मामले सामने आए.

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