धमकी देते अरविंद शर्मा जो बीजेपी नेताओं को बंधक बनाने के लिए काँग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहे है. फोटो- आजतक
हरियाणा के रोहतक से बीजेपी के लोकसभा सांसद अरविंद शर्मा ने किलोई शिव मंदिर में बीजेपी नेताओं के बंधक बनाने को लेकर हुए विवाद के बाद खुलेआम धमकी दी है. बीजेपी सांसद ने घटना के पीछे कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा की साजिश बताते हुए आंखें निकालने और हाथ काटने तक की बात कह डाली. रोहतक के किलोई गांव में भाजपा नेताओं को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया था. इसके विरोध में बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने रोहतक में प्रदर्शन किया. दीपेंद्र हुड्डा का पुतला जलाया. इसी प्रदर्शन में बीजेपी के सांसद अरविंद शर्मा भी मौजूद थे, जब उनके बोलने की बारी आई तो उन्होंने कहा,
"कांग्रेस और दीपेंद्र हुड्डा ये बात सुन लें. अगर किसी ने मनीष ग्रोवर (बंधक बने नेता) की तरफ आंख भी उठाई तो उसकी आंखें निकाल लेंगे और हाथ लगाया तो उसके हाथ काट लेंगे, ये लोग राज करने के लिए छटपटा रहे हैं. लेकिन ये बात लिख लो, 25 साल तक सिर्फ बीजेपी ही राज करने वाली है."
दीपेंद्र हुड्डा पर लगाए आरोप
बीजेपी लगतार घटना के पीछे कांग्रेस और दीपेंद्र हुड्डा को जिम्मेदार ठहर रही है. बीजेपी का आरोप है कि भाजपा से सत्ता छीनने के लिए इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. वहीं यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने अरविंद शर्मा की धमकी पर लिखा,
"ये 'अफ़ग़ानिस्तान' नही, रोहतक 'हरियाणा' है, ये 'तालिबानी' नही, BJP 'सांसद' अरविंद शर्मा है"
किलोई गांव में बनाया था बंधक
हरियाणा के रोहतक के किलोई गांव में शुक्रवार, 5 नवंबर को कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने भाजपा नेताओं को बंधक बना लिया था, जिन नेताओं को बंधक बनाया गया, उनमें पूर्व सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर भी शामिल थे. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ दौरे पर प्रदेश के हर जिले में शिव मंदिरों पर पीएम मोदी के कार्यक्रम का लाइव प्रसारण रखा गया था. रोहतक के किलोई गांव के शिव मंदिर में भी कार्यक्रम रखा गया था. मनीष ग्रोवर समेत तमाम भाजपा नेता इसमें शामिल होने के लिए पहुंचे थे.
इसी दौरान किसानों ने नेताओं को बंधक बना लिया. किसानों ने भाजपा नेताओं की गाड़ियों की हवा निकाल दी. इसके अलावा मंदिर में लगे टीवी के तार काट दिए थे. किसानों ने नेताओं को बंधक बनाने के लिए मुख्य द्वारों के बाहर पत्थर और झाड़ियां रख दीं. पुलिस द्वारा किसानों को समझाने के बाद ग्रामीणों ने नेताओं को छोड़ दिया था.