गुरुग्राम सेक्टर-12 में गोवर्धन पूजा के आयोजन के दौरान कपिल मिश्रा. (तस्वीर- पीटीआई)
गुरुग्राम (Gurugram) में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज का विरोध तेज हो गया है. शुक्रवार 5 नवंबर को गुरुग्राम के सेक्टर-12 में उसी जगह गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया, जहां जुमे की नमाज होती थी. इसके चलते जुमे की नमाज नहीं हो पाई. हिंदू संगठनों द्वारा आयोजित की गई गोवर्धन पूजा के कार्यक्रम में दिल्ली भाजपा के नेता और पूर्व विधायक कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) भी शामिल हुए. इस सबके बीच सियासी बयानबाजी ने जोर पकड़ा हुआ है.
कपिल मिश्रा ने मसले को शाहीन बाग प्रदर्शनों से जोड़ दिया
गोवर्धन पूजा कार्यक्रम में कपिल मिश्रा ने कहा कि अपनी राजनीति के लिए सड़कों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक ऐसा शाहीन बाग में देखा गया था. कपिल मिश्रा ने कहा,
उन्होंने (मतलब मुसलमान) सारे रास्ते जाम कर तमाशा किया था. क्या सीएए निरस्त कर दिया गया है? अगर सड़कें अवरुद्ध हो जाती हैं, तो शहर और देश रुक जाते हैं.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक कपिल मिश्रा ने आगे कहा-
मैं कहना चाहता हूं कि लोगों को अपने धार्मिक स्थलों पर पूजा करनी चाहिए. इस देश में वक्फ बोर्ड के पास सबसे ज्यादा जमीन है. वहां नमाज अदा करने की व्यवस्था करें. ये मामला सिर्फ गुड़गांव का नहीं है. इससे सभी परेशान हैं. इसे (गोवर्धन पूजा) करने से दूसरों को प्रेरणा मिलेगी कि हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी होगी. सड़कें घेरकर लोगों को स्कूलों, अस्पतालों और ऑफिस जाने से रोकना कोई विकल्प नहीं है.
कपिल मिश्रा ने खुले में नमाज पढ़ने का विरोध करने वाले लोगों को भी बधाई दी. उनका कहना था-
मैं उन लोगों को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इस आजादी के लिए लड़ाई लड़ी. जिन्होंने इन संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी. यही है आजादी की असली लड़ाई, वह नहीं जिसके लिए आजादी के नारे लगाए जाते हैं. हमें सड़कों पर चलने की आजादी चाहिए.
असदुद्दीन ओवैसी क्या बोले?
उधर AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने गुरुग्राम में नमाज पढ़ने से रोकने की घटना को मुसलमानों के प्रति सीधी नफरत बताया है. ओवैसी ने कहा-
गुरुग्राम में शुक्रवार की नमाज का विरोध इस बात का सटीक उदाहरण है कि ये प्रदर्शनकारी कितने कट्टरपंथी हो गए हैं. ये मुसलमानों के प्रति सीधी नफरत है. सप्ताह में एक बार 15-20 मिनट के लिए जुमे की नमाज अदा करना किसी को कैसे आहत कर रहा है?
कई हफ्तों से नमाज का हो रहा था विरोध
2018 से गुरुग्राम में मुस्लिम समुदाय को 37 सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने की अनुमति मिली हुई है. लेकिन, बीते करीब एक महीने से इनमें से कुछ स्थानों पर नमाज का जोरदार विरोध हो रहा है. विरोध करने वालों में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और कुछ अन्य हिंदू संगठनों से जुड़े स्थानीय लोग शामिल हैं. बीते महीने कई बार जुमे की नमाज के दौरान लाउडस्पीकर पर धार्मिक गीत बजाए गए और नारेबाजी की गई. वहीं बीते हफ्ते ये विरोध और ज्यादा बढ़ गया. तब सेक्टर-12 में नमाज के वक्त हिंदू संगठनों के कुछ कार्यकर्ता पहुंच गए और नमाज को बंद किए जाने की मांग करने लगे. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की. नमाज में बाधा पहुंचाने के चलते पुलिस ने करीब दो दर्जन से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था. हालांकि, इन लोगों को उसी दिन जमानत दे दी गई थी.
हिंदू संगठन ने प्रशासन को दी थी चेतावनी
गुरुग्राम में खुले में नमाज पढ़ने का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले हिंदू संगठन का नाम संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति बताया गया है. इंडिया टुडे/आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इस संगठन के सदस्य इस मसले पर काफी ज्यादा मुखर हैं. इसके नेताओं ने हाल में चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर गुरुग्राम प्रशासन मुस्लिमों को खुले में नमाज पढ़ने से नहीं रोक सकेगा, तो वे इस काम को पूरा करेंगे. महावीर भारद्वाज, हरियाणा में संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष हैं. बीती 26 अक्टूबर को उन्होंने गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर से मुलाकात की थी और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा था. इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था-
हम एक विनम्र चेतावनी दे रहे हैं. हम इसके बाद और किसी प्रकार का ज्ञापन नहीं देंगे. इसके बाद शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी, हमारी नहीं. हम लाठियों के लिए तैयार हैं, हम जेल जाने के लिए तैयार हैं.
8 जगहों पर नमाज की अनुमति रद्द
खुले में नमाज को लेकर हो रहे भारी विरोध का असर भी देखने को मिला है. बीती 2 नवंबर को जिला प्रशासन ने 37 में से 8 जगहों पर नमाज पढ़े जाने की अनुमति रद्द कर दी. साथ ही गुरुग्राम पुलिस ने अपने एक बयान में ये भी कहा कि अगर अन्य जगहों पर भी स्थानीय लोगों द्वारा नमाज पढ़ने को लेकर आपत्ति जताई जाती है, तो वहां भी प्रशासन द्वारा इस तरह का फैसला लिया जा सकता है. इस फैसले के साथ ही प्रशासन ने नमाज अदा करने के स्थानों की पहचान करने के लिए एक समिति गठित की, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को शामिल किया गया.
मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया
मोहम्मद अदीब, पूर्व राज्यसभा सांसद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं. शुक्रवार को इस मसले पर गुरुग्राम में हुई मुस्लिम समुदाय की बैठक में उन्होंने कहा-
भारत अब वो भारत नहीं रहा... इस देश की आज़ादी में हमारे पुरखों ने भी खून बहाया...लेकिन अब हमें 20 मिनट की जुमे की नमाज़ तक नहीं पढ़ने दी जा रही है...हम कानूनी और संवैधानिक तरीकों से अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे.
वहीं, नागरिक एकता मंच के मोहमद अल्ताफ़ ने जिला प्रशासन द्वारा गठित की गई समिति पर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने जानबूझ कर आरएसएस विचारधारा से जुड़े मुस्लिम नुमाइंदों को इस समिति में शामिल किया है. उनके मुताबिक समिति की बैठक में उन्हें बोलने तक नहीं दिया गया.