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जर्मनी की ये दिग्गज कार कंपनी एक लाख नौकरियां खत्म करेगी, चीन भी वजह है

Volkswagen to slash 1 lakh jobs: Volkswagen साल के आखिरी तक 1 लाख नौकरियां कम करने वाला है. बताया गया कि 50 हजार नौकरियों की कटौती पर पहले ही सहमति जताई थी. अब 50 हजार और नौकरियों को कम करने की बात कही है.

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नौकरियों में कटौती से Volkswagen के ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 15% हिस्सा प्रभावित होगा. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • फॉक्सवैगन ने फ्यूचर प्लान के तहत 50 हजार नौकरियों की कटौती के लिए यूनियन और मैनेजमेंट के बीच सहमति बनाई है, जिससे कुल कटौती का आंकड़ा 1 लाख हो जाएगा।
  • कंपनी को अमेरिकी टैरिफ, इलेक्ट्रिक वाहनों की घटती मांग और चीनी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के कारण आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे छंटनी की योजनाएं बन रही हैं।
  • इस बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान के परिणामस्वरूप कंपनी के चार जर्मन प्लांट्स के भविष्य पर अस्थिरता बनी है और संभावित वैकल्पिक उपयोग पर विचार किया जा रहा है।

ऑडी और पोर्शै जैसी लग्जरी कारें बनाने वाली जर्मन कंपनी फॉक्सवैगन (Volkswagen) अपने फ्यूचर प्लान के तहत बड़ी छंटनी करने की तैयारी में है. कंपनी अपने यहां 50 हजार और नौकरियां कम करने वाली है. फॉक्सवैगन ने बताया कि यूनियन और मैनेजमेंट के बीच करीब 50 हजार नौकरियों की कटौती पर सहमति बन गई है. इससे पहले भी 50 हजार नौकरियां कम करने पर बात बनी थी, जिसके बाद नौकरियों में कटौती का ये आंकड़ा 1 लाख हो जाएगा.

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यानी, कंपनी के इस फ्यूचर प्लान में पहले 50 हजार लोगों की छंटनी होगी. फिर बाद में 50 हजार और नौकरियां कम की जाएंगी. इससे Volkswagen के ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 15% हिस्सा प्रभावित होगा. इस कटौती को ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा रीस्ट्रक्चरिंग प्लान बताया जा रहा है. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने इसे लेकर एक बयान में कहा कि वित्तीय असलियत के साथ कर्मचारियों के स्तर को ठीक तरीके से तालमेल में लाना जरूरी है. बता दें कि इस समय Volkswagen को US के टैरिफ, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग में कमी और चीनी कार बनाने वाली कंपनियों से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ रहा है.

चार प्लांट के भविष्य पर संकट?

Volkswagen ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ओलिवर ब्लूम ने कहा कि सुपरवाइजरी बोर्ड ने मैनेजमेंट के ‘फ्यूचर प्लान’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, फॉक्सवैगन ने कहा कि मैनेजमेंट और यूनियन दोनों इस बात पर सहमत हुए हैं कि जर्मनी में मौजूद चार प्लांट को 2030 के दशक तक सुरक्षित नहीं कहा जा सकता. इन चार प्लांट में हैनोवर, एमडेन, ज्विकौ और नेकरसल्म आते हैं. कंपनी ने कहा कि प्लांट्स के वैकल्पिक इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है.

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यह रीस्ट्रक्चरिंग की प्लानिंग फॉक्सवैगन मैनेजमेंट और यूनियनों के बीच महीनों तक चली बातचीत के बाद बनी है. कर्मचारियों को योजनाओं के बारे में औपचारिक रूप से बताने से पहले ही बड़े पैमाने पर नौकरियों में कटौती की खबरें सामने आई थीं. इस पर कर्मचारियों ने मैनेजमेंट की आलोचना भी की थी.

कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी फैक्ट्री को बंद करने की मंजूरी नहीं दी गई है. IG मेटल यूनियन के नेताओं और फॉक्सवैगन के सुपरवाइजरी बोर्ड के सदस्यों ने कहा कि वे लोअर सैक्सनी राज्य के साथ एक समझौते पर पहुंच गए हैं. लोअर सैक्सनी फॉक्सवैगन का शेयरहोल्डर है और वहां कंपनी के छह प्लांट हैं.

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आउटलुक बिजनेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी के 1960 के उस कानून के तहत, जो फॉक्सवैगन से संबंधित है, प्लांट लगाने या उन्हें दूसरी जगह ले जाने जैसे फैसलों के लिए सुपरवाइजरी बोर्ड में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. क्योंकि बोर्ड की आधी सीटें कर्मचारियों के पास हैं, इसलिए इस नियम ने असल में कर्मचारी प्रतिनिधियों को प्लांट से जुड़े फैसलों पर काफी प्रभाव डालने की ताकत दी है. प्रस्तावित बदलावों से यूनियनों की बड़े रीस्ट्रक्चरिंग फैसलों को रोकने की क्षमता कम हो सकती है.

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