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दूसरों को वन्दे मातरम न गाने के लिए कोस रहे थे, खुद सुनाने को कहा तो हवा टाइट हो गई

नेताजी 5 साल की उम्र से RSS शाखा में जाते हैं, नरेंद्र मोदी की रैली का VIP पास गले में लटकाते हैं...

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फोटो - thelallantop

मजा मजा मजा. देश-भक्त, देश-भक्त, देश-भक्त.

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बात की शुरुआत चुनावों की सबसे चाटू लाइन से. देश में चुनाव का मौसम चल रहा है. ये लोकतंत्र का उत्सव है. इसी उत्सव के किस्से में एक किस्सा हुआ मुरादाबाद में. मोदी जी की रैली थी. उन्होंने भाषण दिया. चले गए. बच गई कुर्सियां और कुर्सियों वाले लोग. इसके साथ ही कुछ भाजपा नेता भी थे. गले में वीवीआईपी पास लटकाए. सर पर टोपी लगाए. भाजपा वाली. ऐसी डिज़ाइन की टोपियां अन्ना आन्दोलन से ट्रेंड में आईं, वो और बात है.

लल्लनटॉप की टीम रैली कवर कर रही थी. चुनाव कवर कर रही है. मुरादाबाद में रैली के बाद कुछ कुर्सी वाले लोग और एक नेता जी मिले. कहने लगे कि भाजपा और संघ शिष्टाचार सिखाते हैं. इसके बाद बेनाम लोगों पर (नाम उन्होंने खुद नहीं बताया) वन्दे मातरम का विरोध करने का आरोप लगाने लगे. कहा कि इससे हिन्दुओं की भावना को ठेस पहुंची है. इसका लॉजिक उन्होंने बताया नहीं. क्यूंकि सौरभ द्विवेदी ने पूछा ही नहीं. उन्होंने पूछा तो बस इतना कि क्या उन्हें वन्दे मातरम आता है. आता है तो सुना दिया जाए. माना कि चुनावी कवरेज थी, कोई फरमाइशी प्रोग्राम नहीं, लेकिन चुनाव के टाइम में बिना फ़रमाइश क्या क्या आता है, ये तो राष्ट्रगीत की बात थी. लेकिन नेता जी सुना नहीं सके. उनकी रिहाई करवाई मोबाइल ने जिस पर किसी ने फ़ोन कर दिया. जमानत हो गई.

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फिर मामला राष्ट्रगान पर भी आया. वन्दे मातरम में तो ज़बान टेढ़ी होने का ख़तरा रहता है. क्लिष्ट शब्द हैं. लेकिन 'जन गण मन' तो खटाक से हो जाता है. 52 सेकंड का मामला है. नेता जी ने कहा कि वो जानते तो हैं लेकिन उनका सुनाने का मूड नहीं है.

ये सारी बातें कोई कल्पना नहीं है. सच है. वीडियो संलग्न है. फ़ॉर योर आइज़ ओनली.

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