विदेशी मीडिया भी दिल्ली प्रोटेस्ट की मिनट दर मिनट रिपोर्टिंग कर रहा है. किसी ने इसे CJP आंदोलन का सीजन-2 कहा है. तो कुछ इसे कॉकरोच जनता पार्टी की लोकप्रियता की परीक्षा के तौर पर भी देख रहे हैं. अंतर्राष्ट्रीय अखबारों और न्यूज़ मीडिया आउटलेट्स पर अगर आप सरसरी नज़र दौड़ाएं तो अलज़जीरा की नज़र से फिलहाल दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात हैं. वहीं और एजेंसीज़ ने दिल्ली प्रोटेस्ट को नरेंद्र मोदी के लिए नई चुनौती माना है.
‘दिल्ली में लॉकडाउन’, ‘मोदी की नई चुनौती’… CJP प्रोटेस्ट पर विदेशी मीडिया ने क्या-क्या लिखा?
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन पर Al Jazeera, Reuters, BBC, CNN और The New York Times ने रिपोर्टिंग की. जानिए विदेशी मीडिया ने पुलिस कार्रवाई, सुरक्षा इंतजामों और मोदी सरकार के सामने चुनौती को कैसे पेश किया.

'सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की तुलना में सुरक्षाकर्मियों की संख्या ज़्यादा. नई दिल्ली एक किले में तब्दील.' इस तरह की हेडलाइन और बारीक बातों की तरफ इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसीज ने ध्यान दिलाया है. सैकड़ों प्रदर्शनकारी नज़रबंद, अभिजीज दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास, ध्रुव राठी, से लेकर और कई नाम हिरासत में. ये तो कमोबेश सभी जगह है ही. इसके अलावा भी और बहुत कुछ विदेशी मीडिया में ऐसा छपा है जिस पर आपकी निग़ाह जानी चाहिए.
विदेशी मीडिया दिल्ली के हालात पर क्या लिख रहा?सबसे पहले अलजज़ीरा की बात. कतर की मीडिया संस्थान अलजज़ीरा पर सीजेपी प्रोटेस्ट की मिनट दर मिनट रिपोर्टिंग हो रही है. इसके लिए उन्होंने एक लाइव पन्ना चला रखा है. इसमें दिल्ली की कुछ तस्वीरों को पब्लिश किया है. हेडलाइन लगाया है, New Delhi in lockdown as police crack down on protesters. मतलब, प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई के बीच नई दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात.
अलजज़ीरा ने लिखा कि सेंट्रल दिल्ली में हालात काफी अफरा-तफरी वाले हैं. प्रदर्शनकारियों की तुलना में सुरक्षाकर्मी ज़्यादा संख्या में मौजूद हैं. प्रदर्शनकारी छोटे-छोटे समूहों में आ रहे हैं और पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर बसों में ले जा रही है. अलजज़ीरा का दावा है कि ऐसे भी कुछ लोग प्रोटेस्ट साइट पर हैं, जो मीडिया से बात करने वाले प्रदर्शनकारी को टोकते या परेशान करते दिख रहे हैं.
बीबीसी ने क्या लिखा?अब बात करते हैं बीबीसी की. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन यानी बीबीसी ने भी अलजज़ीरा की तरह इस पूरे विरोध प्रदर्शन के लिए लाइव पन्ना चला रखा है. मतलब उनके यहां भी इस प्रोटेस्ट की पल-पल की रिपोर्टिंग हो रही है. बीबीसी ने अपने यहां ये लिखते हुए कि ‘सेंट्रल दिल्ली की झलकियां हैं’, प्रोटेस्ट की कई तस्वीरें छापी हैं. इन तस्वीरों में एक उस लड़की की तस्वीर भी है, जो किसी तरह प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंच गई है. उसे महिला सुरक्षाकर्मियों का एक समूह जबरन उठाकर ले जा रहा है.
बीबीसी ने लिखा है कि ये विरोध प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गए हैं. चूंकि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) कोई रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, इसलिए उम्मीद है कि उनके आह्वान पर सिर्फ पार्टी समर्थक ही नहीं, बल्कि हर तरह के लोग प्रोटेस्ट में शामिल होंगे. ये विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं, जब कुछ ही दिनों बाद कई राज्यों में चुनाव हैं. ऐसे में वोटर लिस्ट में हुए विवादित बदलावों ने विपक्षी पार्टियों को अपने समर्थकों को एकजुट करने का एक मज़बूत मुद्दा दे दिया है.
बीबीसी ने लिखा है कि ये आंदोलन CJP की लोकप्रियता की भी परीक्षा होगी, क्योंकि दिल्ली में हुए पिछले विरोध प्रदर्शनों के कारण केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था. अब सवाल यह है कि क्या वह पिछले वाले लय को बरकरार रख पाएंगे. सरकार की प्रतिक्रिया ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है. अभी यह साफ़ नहीं है कि आगे क्या होगा. ऐसा बीबीसी का कहना है.
रॉयटर्स ने क्या लिखा?दुनिया की सबसे पुरानी इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी में से एक रॉयटर्स ने सीजेपी प्रोटेस्ट पर हेडलाइन लगाई है - India detains youth protest leader to defuse rally against election chief. उन्होंने सीजेपी प्रोटेस्ट को ‘नरेंद्र मोदी के लिए नई चुनौती’ कहा है.
रॉयटर्स आगे लिखता है, ‘सीजेपी का ये प्रदर्शन भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पिछले हफ़्ते शुरू हुए विरोध की कड़ी में सबसे बड़ा है. वोटर लिस्ट में बदलावों के कारण भारत में अब तक करीब 13 करोड़ लोग वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं. ये संख्या जापान की आबादी से भी अधिक है. विपक्षी पार्टियों या फिर संगठनों की तरफ से हो रहे रोज़ाना के विरोध प्रदर्शन मोदी के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती पेश हो रहे हैं.'
अमेरिकी मीडिया ने क्या कहा?अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स भी अपने मेन पेज पर इसकी रिपोर्टिंग कर रहा है. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, India’s young are putting their bodies on the line to be heard. मतलब भारत की नौजवान आबादी अपनी बात मनवाने के लिए जोखिम उठाने से भी गुरेज़ नहीं कर रही है. एनवाईटी लिखता है,
भारतीय पुलिस ने नई दिल्ली को एक किले में बदल दिया है. प्रदर्शनकारियों को पहले ही नजरबंद कर दिया गया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस बार के विरोध प्रदर्शन में सरकार और प्रशासन की तरफ से की गई तैयारियों को देखकर 2020 को याद किया है. जब तीन नए कृषि कानूनों से नाराज़ किसान समूहों ने नई दिल्ली की ओर कूच करने की कोशिश की थी. तब उन्हें दिल्ली के बॉर्डर पर रोक दिया गया था. जहां वो महीनों तक टेंट लगाकर वहीं डटे रहे थे.
अमेरिकन न्यूज़ आउटलेट सीएनएन की बात करें तो उन्होंने लिखा है,
CJP की शुरुआत इंटरनेट पर मज़ाक-मज़ाक में हुई थी. पर जुलाई में इसने मोदी सरकार को न सिर्फ झुका दिया. बल्कि वो बड़ी घटना थी. क्योंकि लंबे अरसे के बाद ऐसा हुआ था. अब वो अपने राजनीतिक आंदोलन के 'सीज़न 2' के साथ वापस आई है. इस बार उनके निशाने पर चुनाव आयोग के 62 वर्षीय प्रमुख ज्ञानेश कुमार हैं, जिनके पास दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, यानी भारत के लोकतंत्र की चाबी है.
हालांकि, सीएनएन ने लिखा है कि, 10 अक्टूबर की दोपहर तक दिल्ली में भीड़ इस बार पिछले विरोध प्रदर्शनों जितनी बड़ी नहीं थी, क्योंकि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए राजधानी को एक किले में बदल दिया गया था.
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बांग्लादेशी मीडिया क्या कह रही?बांग्लादेश के अखबार ‘द डेली स्टार’ ने हेडलाइन लगाई है - Delhi turns into a fortress. यानी दिल्ली किले में बदली. द डेली स्टार ने लिखा है कि भारत में पिछले साल शुरू हुए वोटर वेरिफिकेशन अभियान को लेकर गुस्सा है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं और दिल्ली किले में तब्दील हो गई है.
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