मामला क्या है?
कनाडा का ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत. यहां के एक डॉक्टर काइल मेरिट के पास कुछ महीने पहले एक 70 वर्षीय महिला आई. बुजुर्ग महिला ने डॉ. काइल को बताया कि उसे गर्मियों में सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उन्हें लू भी लग गई थी. इस वजह से उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान डॉ. काइल ने पाया कि महिला के बीमार होने की असल वजह अस्थमा या सांस से जुड़ी कोई दूसरी बीमारी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन है. महिला की डायग्नोसिस डिटेल रिपोर्ट में उन्होंने बकायदा महिला की बीमारी के लिए क्लाइमेट शब्द का इस्तेमाल किया है. डॉ. मेरिट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि बुजुर्ग महिला डायबिटीज और दिल की बीमारी से भी पीड़ित है. हालांकि उन्होंने महिला का नाम सार्वजनिक नहीं किया है. लेकिन उन्होंने ट्रीटमेंट रिपोर्ट में क्लाइमेट चेंज को बीमारी क्यों कहा, इस बारे में डॉ. मेरिट ने आग्रह करते हुए कहा है,अगर हम केवल लक्षणों का इलाज करते रहेंगे और बीमारी की तह तक नहीं जाएंगे तो हालात और बिगड़ेंगे.डॉ. काइल ने बताया कि इस मरीज की बीमारी का पता उन्हें जून में लगा था. उस वक्त कनाडा में लू चल रही थी. हालात इतने खराब थे कि अकेले ब्रिटिश कोलंबिया में कई लोगों की मौत हो गई थी. मौसम से जुड़ी रिपोर्टों में पाया गया कि हवा की गुणवत्ता काफी खराब हो गई थी. इस बारे में डॉ. काइल ने कहा,
मुझे नहीं लगता कि लोगों ने पर्यावरण को हो रहे नुकसान या इसमें तेजी से आ रही गिरावट को लेकर गंभीरता दिखाई है. मैंने इस मरीज का इलाज किया है, इसलिए मैं कह सकता हूं कि क्लाइमेट चेंज के क्या असर हो सकते हैं.इस मामले के सामने आने के बाद ब्रिटिश कोलंबिया के डॉक्टरों और नर्सों ने प्लेनेटरी हेल्थ नाम का संगठन बनाया है. फिलहाल इसमें 40 हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स है. ये ग्रुप दिन-ब-दिन खराब होते पर्यावरण से जुड़े हेल्थ इशूज के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम करता है. बता दें कि पिछले दिनों ग्लास्गो में हुए COP-26 क्लाइमेट समिट में भी ग्लोबल टेंप्रेचर और एक्सट्रीम हीट वेव्स का मामला उठा था. इस समिट में अलग- अलग देशों के नेताओं ने इस बात पर चर्चा की थी कि क्लाइमेट चेंज की इस समस्या से छुटकारा कैसे मिले.
(ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहीं आरुषि ने लिखी है.)














