काजल, लिपस्टिक, आई शैडो. ये सब तो लड़कियों की चीजें होती हैं. लड़कों का इनसे कोई वास्ता नहीं होता. और जो मेकप करते हैं, वो तो हिजड़े होते हैं. और हां, हिजड़ा एक गाली होती है. असली मर्द वही होता है जो बॉडी बनाए. और न भी बनाए तो कम से कम चाल-ढाल इतनी मर्दाना हो कि वो मर्द तो लगे. यही हमें सिखाया जाता है बचपन से. कि लड़के और लड़की अलग-अलग दिखें, अलग तरह के कपड़े पहनें. क्या एक तरह के कपड़े पहनना हम मां के पेट से सीखकर आते हैं? नहीं. अपने स्त्रीत्व या पुरुषत्व को हम समाज से सीखते हैं. वो समाज जो किसी को भीड़ से अलग होने पर बॉयकॉट कर देते हैं.

मैनी गटीयरेज कॉस्मेटिक कंपनी मेबेलीन के पहले पुरुष मॉडल हैं. मेकप का सामान बेचने वाली एक कंपनी, जिनका टारगेट कस्टमर अंततः औरतें होती हैं, वो जब पुरुष मॉडल लेते हैं, ये एक बड़ा कदम होता है. क्योंकि वो इस बात को स्वीकारते हैं कि उनका टारगेट कस्टमर केवल औरतें ही नहीं, पुरुष भी हैं. और इसे स्वीकारते हुए वो सारे ब्यूटी प्रोडक्ट पुरुषों को भी बेचते हैं.

लेकिन होमोफोबिया (यानी समलैंगिक लोगों से डर और नफरत) इतना आम है, कि लोगों ने पुरुष मॉडल को नहीं छोड़ा. उसके खिलाफ, उसका मजाक उड़ाते हुए ट्वीट किए. और एक ऐसे ही ट्वीट में किसी ने लिखा:
'इसीलिए जरूरी है पिता अपने बच्चों को पालने के लिए मौजूद रहें (वरना औलाद बड़ी होकर ऐसी हो जाती है).' 
लेकिन मैनी के पिता भी कम नहीं. ऐसा जवाब दिया कि इन जनाब को तमाचे की तरह लगा होगा.
'मैंने अपने बेटे का हमेशा साथ दिया है... जैसे आप पाने परिवार के लिए कुछ भी करेंगे, मैं भी अपने बेटे केलिए कुछ भी करूंगा.' 
ये स्क्रीनशॉट मैनी ने ट्विटर पर शेयर किया.

मैनी के पिता असल में हर मां-पिता के लिए मिसाल हैं. अगर हर मां-पिता अपने बच्चों को, उनके उस स्वरुप के साथ स्वीकार करें, जिसमें उनके बच्चे सहज हैं, तो हम एक बेहतर समाज की ओर बढ़ पाएंगे .