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गाज़ीपुर बॉर्डर का आंखों देखा हाल: सब अवरोध हटाकर दिल्ली में घुसे किसान

तय समय से पहले ही शुरू हो गई है ट्रैक्टर रैली.

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कंटेनर हटाकर दिल्ली में दाखिल होते किसान. फोटो- विकास कुमार
देश 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकालने का ऐलान किया था. पुलिस ने इसकी इजाजत दे दी, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी थी. पुलिस ने तीन रूट तय किए थे, जहां किसान ट्रैक्टर रैली निकाल सकते हैं. लेकिन सुबह से ही ऐसी खबरें आनी शुरू हो गईं कि किसानों ने बैरिकेड्स तोड़कर दिल्ली में घुसने की कोशिश की. कई जगहों पर पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.
दिल्ली पुलिस ने जो रूट तय किया है उनमें से एक रूट है गाजीपुर बॉर्डर वाला. यह तीसरा रूट यूपी की सीमा से दाखिल होने वाले किसानों के लिए है. प्लान के मुताबिक गाज़ीपुर बॉर्डर से परेड शुरू होकर NH-24 से होते हुए ISBT आनंद विहार, अप्सरा बॉर्डर, हापुड़ रोड, आईएमएस कॉलेज, लाल कुआं और उसके बाद फिर गाज़ीपुर बॉर्डर पहुंच जाएगी.
गाजीपुर बॉर्डर पर 'द लल्लनटॉप' के रिपोर्टर विकास कुमार मौजूद हैं. उनके मुताबिक किसानों ने यहां बैरिकेड्स हटा दिए. पुलिस-प्रशासन ने कंटेनर और यात्री बसें सड़क पर खड़ी की थीं ताकि किसान आगे नहीं बढ़ पाएं. लेकिन किसानों ने इसे भी हटा दिया.
Ghazipur Borber
भारी संख्या में किसान दिल्ली की सीमा पर जमे हुए हैं. फोटो- विकास कुमार

दिल्ली में घुसते ही जो टोल प्लाजा पड़ता है वहां पर पुलिस ने अवरोध लगाए थे. इनको किसानों ने हटा दिया. इससे पहले किसानों ने सीमेंट के भारी ब्लॉक्स को एक तरफ कर दिया गया, बैरिकेड्स को भी रास्ते से हटा दिया. आगे जो कंटेनर और यात्री बसें थीं उन्होंने थोड़ी देर के लिए किसानों का रास्ता रोका था, लेकिन अब किसानों उन्हें हटाकर दिल्ली में दाखिल हो गए हैं.
Farmers At Ghazipur Border
किसानों ने पुलिस के बैरीकेड्स तोड़ दिए हैं. फोटो- विकास कुमार

विकास की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजीपुर बॉर्ड पर किसानों के दो गुट देखने को मिले. एक पश्चिमी यूपी से आए किसान जिनके नेता राकेश टिकैत हैं. ये गुट बहुत देर तक बैरिकेड के पास खड़ा रहा. वहीं एक दल उन किसानों का है जो पंजाब से आए हैं. उन्होंने फ़्लाईओवर पर बैरिकेड हटाए. सीमेंट के बड़े-बड़े अवरोधक हटाए और अपनी ट्रैक्टरों पर दिल्ली की तरफ़ निकल गए.
गाजीपुर बॉर्डर पर जो किसानों के जत्थे मौजूद हैं उन्होंने अपने ट्रैक्टरों को काफी सजाया है. डीजे लगाए हैं. ट्रैक्टर पर तिरंगे लगे हैं और साथ ही किसान संगठन के झंडे भी लगे हैं. ये लोग नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. सड़कों पर सिवाय ट्रैक्टर और किसानों के कुछ नहीं दिख रहा है. हाईवे की हर लेन में केवल किसानों के ट्रैक्टर ही हैं.

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