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जिसके लिए शिकारी लगाए गए, 78 दिन में दो करोड़ रुपये खर्च हुए, वो बिजली से झटके से मर गई

कहानी उस बाघिन की, जो 78 दिन में 500 किमी का रास्ता तय कर घर लौटी थी.

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करंट के झटके से बाघिन की मौत हो गई.
महाराष्ट्र के नागपुर का एक इलाका है ब्रह्मपुरी. जंगल से घिरा है, तो स्वाभाविक तौर पर जंगली जानवरों का खतरा रहता है. 23 जून 2017 की दोपहर थी. ब्रह्मपुरी के दो लोग जंगल में तेंदुपत्ता बीनने के लिए गए थे. अचानक उन दोनों पर एक बाघिन ने हमला कर दिया. हमले में दोनों की मौत हो गई. उस वक्त लोगों को पता चला कि इलाके में एक बाघिन आदमखोर हो गई है. यानि उसके मुंह में इंसानी खून लग चुका है और वो किसी की भी जान ले सकती है.
(सांकेतिक तस्वीर)
(सांकेतिक तस्वीर)

वन विभाग को जब इस बात का पता चला तो उसने बाघिन को गोली मारने के आदेश जारी कर दिए. इस बाघिन का नाम काला था. वन विभाग की भाषा में इसे टी-27 सी-1 कहा जाता था. इसकी उम्र थी तकरीबन दो साल. वन विभाग के आदेश के खिलाफ एक स्थानीय नागरिक डॉ. जैरी बनायत हाई कोर्ट पहुंच गए. नागपुर बेंच ने गोली मारने के आदेश पर रोक लगा दी. 10 जुलाई का दिन था. महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के दक्षिणी ब्रह्मपुरी इलाके से बाघिन को पकड़ लिया गया. उसे 29 जुलाई को हिंगानी जिले के बोर टाइगर रिजर्व में रखा गया. इस दौरान उसके शरीर में एक रेडियो कॉलर लगा दिया गया. इस रेडियो कॉलर की मदद से जीपीएस के सहारे उसकी लोकेशन ट्रेस की जा सकती थी. लेकिन वो टाइगर रिजर्व से निकल गई. वन विभाग को पता चला तो एक टीम उसके पीछे लगा दी गई. भागने के बाद बाघिन ने दो और लोगों की जान ले ली और दो लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया. इसके अलावा उसने कई जानवरों को भी मार डाला. इसके बाद हाई कोर्ट ने अपना पुराना आदेश वापस ले लिया और बाघिन को गोली मारने के आदेश दे दिए.
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघिन के शव को अपने कब्जे में ले लिया.
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बाघिन के शव को अपने कब्जे में ले लिया.

भागने के बाद बाघिन लगभग 500 किमी तक घूमती रही. इस दौरान उसे पकड़ने की कोशिश जारी रही, जिसमें तकरीबन 2 करोड़ रुपये खर्च हो गए. बाघिन नहीं पकड़ी जा सकी. 13 अक्टूबर की शाम को वो बोर टाइगर रिजर्व के नौरागांव में लौट आई. वो पूरे 78 दिन के बाद वापस लौटी थी. नौरागांव के सिंधी बिहारी में एक किसान है भगवान टेकाम. उसके पास खूब बड़ा खेत है. लंबाई और चौड़ाई मिलाकर 138 वर्ग किलोमीटर. खेत में ज्वार की फसल लगी है. फसल को जानवरों से बचाने के लिए उसने अपने खेत की घेराबंदी करवा रखी है. लोहे के तार में करंट दौड़ता है. 14 अक्टूबर की सुबह बाघिन काला इन्हीं तारों में फंस गई. करंट की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई.
किसान पर दर्ज हुआ केस
एक बार फिर डॉ.जैरी बनायत ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने आरोप लगाए हैं कि वन विभाग की लापरवाही की वजह से ही बाघिन की मौत हुई है. उन्होंने कहा है कि जब बाघिन टाइगर रिजर्व से निकली थी, तो वन विभाग ने उसकी देखभाल नहीं की थी. इसलिए वन विभाग पर केस दर्ज किया जाना चाहिए. वहीं वन विभाग की ओर से किसान भगवान टेकाम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.


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