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इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में फिर से SC पहुंचा चुनाव आयोग, कौन से डॉक्यूमेंट वापस मांग लिए?

चुनाव आयोग ने कहा कि उसने गोपनीयता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की कोई भी कॉपी अपने पास रिटेन नहीं की है.

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चुनाव आयोग ने 14 मार्च के दिन SBI ने प्राप्त इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़े अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए. (फोटो- ट्विटर)

चुनाव आयोग (ECI) ने 14 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में संशोधन की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया है. आयोग ने ये कदम अपनी वेबसाइट पर राजनीतिक दलों को दिए गए बॉन्ड का डेटा अपलोड करने के तुरंत बाद उठाया है. सुप्रीम कोर्ट में 15 मार्च को इस मामले में सुनवाई होनी है.

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आयोग ने अपनी एप्लिकेशन में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वो आयोग द्वारा दिए गए सीलबंद डॉक्यूमेंट उसे वापस कर दे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कहा कि उसने गोपनीयता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की कोई भी कॉपी अपने पास रिटेन नहीं की है. इसलिए, उन डिटेल्स को अपलोड करने के लिए आयोग ने कोर्ट से सीलबंद लिफाफे वापस करने के लिए कहा है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने संशोधन याचिका में मांग की है कि अदालत में जमा किया गया डेटा आयोग को वापस कर दिया जाए, क्योंकि ECI ने इसकी कॉपियां अपने पास नहीं रखी हैं.

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ECI ने इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा वेबसाइट पर डाला

चुनाव आयोग ने 14 मार्च के दिन SBI से प्राप्त इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़े अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए. आयोग ने मीडिया को जानकारी दी कि SBI ने 12 मार्च को आयोग को बॉन्ड से संबंधित डेटा उपलब्ध कराया था.

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने 2018 की इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को रद्द करते हुए SBI को 6 मार्च तक ECI को डेटा सौंपने को कहा था. लेकिन SBI ने 6 मार्च तक ऐसा नहीं किया. बैंक ने 30 जून तक का समय मांगा था. लेकिन मामले में दोबारा सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने SBI को 12 मार्च तक डेटा ECI को देने का निर्देश दिया था.

क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड?

साल 2017 में केंद्र सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी. इसे 29 जनवरी 2018 को कानूनी रूप से लागू किया गया. सरकार का कहना था कि चुनावी चंदे में 'साफ-सुथरा' धन लाने और 'पारदर्शिता' बढ़ाने के लिए इस स्कीम को लाया गया है. SBI की 29 ब्रांचों से अलग-अलग रकम के इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए जाते हैं. ये रकम एक हजार से लेकर एक करोड़ रुपये तक हो सकती है. इसे कोई भी खरीद सकता है और अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दे सकता है.

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वीडियो: Electoral Bond से जुड़े डेटा कब जारी किए जाएंगे? मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया

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