एक कहानी आपने सुनी होगी. एक बार जब एक बहुतै अमीर लड़की से गरीबी पर निबंध लिखने को कहा गया तो उसने लिखा, वो सब बहुत गरीब थे, उनके सारे नौकर भी गरीब थे, उनकी गाड़ियां भी पुरानी थी. वो छुट्टी बिताने भी विदेश नहीं जा पाते थे. कहने का मतलब ये है कि हर आदमी अपने हिसाब से ही दुनिया को देखता है. ऐसा ही हुआ डिफेंस रिर्सच डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन यानी डीआरडीओ के साथ, जब वो अपने फेसबुक अकाउंट का पासवर्ड भूल गए. पासवर्ड भुलाए तो भुलाए, उसे पाने के लिए जो किए वो और महान था. 5000 वैज्ञानिकों वाले इस ऑर्गनाइज़ेशन ने तेजस जैसे जहाज, टैंक और इंसाज़ राइफल के साथ-साथ रक्षा से जुड़े तमाम उपकरण बनाए हैं. हर चीज़ में हाई-फाई रहने वाले संगठन का सोशल मीडिया चलाने वाला बंदा फेसबुक पासवर्ड भूल गया. कायदे की बात ये थी कि फॉरगेट पासवर्ड करके ईमेल पर रिकवर कर लेते. न होता तो भाई गली के किसी भी चिंटू, बंटू से पूछ लेते. मगर भाई लोगो ने सीधे ट्विटर पर जाकर फेसबुक से ही पूछ लिया. सीधे फेसबुक को मेंशन करके बोला कि पासवर्ड भूल गए हैं साइन इन नहीं हो रहा, तुरंत मदद करें.

मतलब विंडो न खुले तो सीधे कैलिफोर्निया में बिल गेट्स को फोन मिला दो. गूगल के मालिक से फोन लगाकर पूछो,
जुम्मन भाई के निकाह में हरे सूट और लाल पर्स में जो लड़की आई थी उसका नाम और नंबर क्या है. ट्विटर पर इसके बाद लोगों ने डीआरडीओ की मौज ले ली.

खैर हमारी तो डीआरडीओ को यही सलाह है कि साइंटिस्ट लोग का काम बड़ा हाई-फाई होता है. फेसबुक चलाने के लिए किसी आम लौंडे को रख लें. बस इतना तस्दीक कर लें कि उसका एंजल प्रिया के नाम से कोई पार्ट टाइम अकाउंट न हो.