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ईरान की जब्त प्रॉपर्टी से जंग की भरपाई करेंगे ट्रंप! हिसाब लगाने के लिए टीम बना दी

Iran के हमलों की वजह से खाड़ी देशों के Infrastructure को काफी नुकसान हुआ है. US इन नुकसानों की भरपाई के लिए Iranian Freeze Funds के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है.

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ईरान-अमेरिका के बीच अभी तक फाइनल डील लॉक नहीं हुई है. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • ईरान-अमेरिका के बीच फाइनल डील को लेकर सहमति नहीं बन पाई है और अमेरिका ने ईरान के फ्रीज फंड्स पर रोक को लेकर नई जांच शुरू की है।
  • अमेरिका ने खाड़ी देशों में ईरान के हमलों से हुए नुकसान की भरपाई के लिए ईरान के फ्रीज फंड्स की जांच करने का निर्णय लिया है, जिससे तनाव बढ़ सकता है।
  • पाकिस्तानी मंत्री ईरान गए हैं और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिशें चल रही हैं, मगर दोनों पक्षों के बीच विवाद बरकरार रहने की संभावना है।

ईरान-अमेरिका के बीच फाइनल डील लॉक होने की संभावनाएं धूमिल लग रही हैं. विदेशों में ईरान के फ्रीज फंड्स पर अमेरिका ने एक और पेंच फंसा दिया है. अमेरिकी सरकार खाड़ी देशों में ईरान के हमले से हुए नुकसान की भरपाई उनके (ईरान) फ्रीज फंड्स से करने की फिराक में है. हाल ही में ईरान ने फिर बहरीन और कुवैत पर हमला किया था. अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक टीम को खाड़ी देशों के लिए रवाना किया है. टीम का काम ईरानी हमलों से हुए नुकसान का आकलन करना है. 

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रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नजर ईरान की फ्रीज प्रॉपर्टी पर है. वो इसका इस्तेमाल आने वाले दिनों में ईरानी हमले से हुए नुकसान की भरपाई के लिए कर सकता है. ये जानकारी ऐसे वक्त पर सामने आई है, जब एक दिन पहले ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसेन रेजाई ने अमेरिकी न्यूज चैनल पर एक इंटरव्यू दिया. उन्होंने बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच शांति की दिशा में तभी बात आगे बढ़ सकती है, जब अमेरिका-ईरान के 24 बिलियन (करीब 2 लाख 28 हजार 383 करोड़) डॉलर प्रॉपर्टी को फ्री करेगा.  

रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने यह नहीं बताया कि टीम किस तरह की प्रॉपर्टी की जांच कर रही है. हालांकि, जिस भाषा के जरिए ये जानकारी शेयर की गई है, उससे एक बात को साफ है कि ये जांच सिर्फ फ्रीज प्रॉपर्टी तक ही सीमित नहीं है.

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संघर्ष बढ़ सकता है

अगर अमेरिकी प्रशासन ईरान के फ्रीज प्रॉपर्टीज को दूसरे देशों में इस्तेमाल करने के प्लान में हैं तो यह दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को और बढ़ा सकता है. क्योंकि,दोनों ही देश एक बार फिर एक-दूसरे पर छिटपुट हमले कर रहे हैं.

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डॉनल्ड ट्रंप (बाएं) और मोजतबा खामेनेई (दाएं).

दोनों देशों के बीच फाइनल डील लॉक कराने की कवायद चल रही है. इसके लिए अप्रत्यक्ष तौर भी बातचीत हो रही है. फाइनल डील में दो अहम मुद्दे बने हुए, जिसमें ईरान के परमाणु प्रोग्राम को रोकना और ईरान के सीज फंड्स को फ्री करने का मुद्दा शामिल है. 

फाइनल डील को लेकर दोनों ही देश सहमति नहीं बना पा रहे हैं. ईरान एक बार फिर अपने तेल से होने वाली कमाई तक पहुंचने की फिराक में है. साथ ही तेल के एक्सपोर्ट पर लगे सैंक्शंस को भी हटाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है. यही नहीं, ईरान अपने पोर्ट्स से अमेरिकी नाकेबंदी को पूरी से तरह हटाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने पुराने दबदबे के साथ लौटना चाहता है.

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पाकिस्तानी मंत्री ईरान पहुंचे

यह तभी संभव है, जब दोनों ही देश एक-दूसरे की मांगों को पूरा कर पाएं जो कि काफी मुश्किल लग रहा है. खबर ये भी है कि दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कराने वाले पाकिस्तान की भी तड़प बढ़ रही है. इस कड़ी में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार, 7 जून को ईरान पहुंचे.

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मोहसिन नकवी.

ये जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया की ओर से दी गई है. नकवी अपने दौरे पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई बड़े अधिकारियों से मिले. ISNA की रिपोर्ट के मुताबिक, मुलाकात के दौरान नकवी ने कहा कि वो अपने साथ ‘सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री’ की ओर से सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के लिए ‘खास चिठ्ठी’ लेकर आए हैं.

ट्रंप पर जंग खत्म करने का दबाव

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप पर भी लगातार इस जंग को जल्द से जल्द खत्म करने का दबाव बन रहा है. दरअसल, तेल और गैस दोनों की ही कीमतें बढ़ रही हैं. ऐसे में ट्रंप पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ता जा रहाहै. वहीं, ईरान ने जंग को खत्म करने के लिए लेबनान में भी सीजफायर की शर्त रखी है.

लेबनानी सेना कमांडर पाकिस्तान पहुंचे

लेबनान में भी इजरायल और हिजबुल्ला के बीच तनाव बना हुआ है. खबर है कि लेबनान सेना के कमांडर रुडोल्फ हैकल भी शनिवार, 6 जून को पाकिस्तान पहुंचे थे. हालांकि, इसके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है. कमांडर का यह दौरा इस नजर से भी अहम है क्योंकि अमेरिका और लेबनान दोनों ही देश ये चाहते हैं कि लेबनान और इजरायल के बीच सीजफायर की बात ईरान-अमेरिका सीजफायर के बातचीत से अलग ही रखा जाए.

हिजबुल्ला ने अमेरिकी मध्यस्थता ठुकराई

उधर हिजबुल्ला के नेता नईम कासिम ने इजरायल और लेबनान के बीच होने वाले सीजफायर में अमेरिकी मध्यस्थता को ठुकरा दिया है. क्योंकि, इस समझौते में इजरायली सेना के वापस लौटने की कोई बात नहीं थी. उधर इजरायल का भी तेवर गर्म ही हैं. वो भी हथियार डालने के मूड में नहीं है. इजरायल ने अपने एक बयान में कहा कि भले ही अमेरिका के साथ तनाव बढ़ गया है, लेकिन वो अपनी सेना पीछे नहीं हटाएगा. उसका यह ऑपरेशन भी नहीं रुकेगा.

वीडियो: ईरान ने कुवैत और बहरीन पर क्यों हमला किया?

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