डेटा सेंटर (Data Center) दुनिया की वो गुमनाम जगहें हैं, जहां आज के समय में पूरी दुनिया का सबसे कीमती सामान यानी डेटा सेव रहता है. आम तौर पर लोग सोचते हैं कि इंटरनेट और डेटा बादलों यानी क्लाउड (Cloud) में तैर रहा है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. ये डेटा विशालकाय इमारतों में रखे सर्वर (Server) में कैद रहता है.
डेटा हैक नहीं हुआ, हैकर्स करोड़ों का सर्वर ही उठा ले गए, इस 'चोरी' ने दुनिया हिला दी थी
Data Center Heist Story: डेटा चुराने के लिए किसी सर्वर को हैक करना तो आपने सुना होगा. मगर आज हम आपको हैकिंग की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जहां चोर पूरा का पूरा सर्वर ही उठा ले गए थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2007 में लंदन (London) में एक ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया था, जब चोरों के एक शातिर गैंग ने फिल्म 'ओशन्स इलेवन' (Ocean's Eleven) की तर्ज पर एक करोड़ों डॉलर के डेटा सेंटर पर धावा बोल दिया था. इस चौंकाने वाली घटना के पीछे टेरी एलिस (Terry Ellis) नाम के एक मास्टरमाइंड चोर का हाथ था.
पुलिस की वर्दी और एक खूंखार कुत्ता बना हथियार
टेरी एलिस को अमेरिकी बैंक से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की ओर से एक खास काम सौंपा गया था. इन लोगों के पास कुछ ऐसे बैकिंग दस्तावेज थे, जो कुछ नियमों के खिलाफ जाकर बनाए गए थे और वे इन्हें किसी भी कीमत पर गायब करना चाहते थे. ये सारे संवेदनशील दस्तावेज किंग्स क्रॉस (King's Cross) इलाके में बने एक विशाल वेरिजोन (Verizon) डेटा सेंटर के सर्वर में स्टोर थे. इस सेंटर की सुरक्षा बेहद मजबूत थी, जहां हर तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे थे, बुलेटप्रूफ कांच थे और बायोमेट्रिक गेट थे. इसके बावजूद एलिस और उसके साथियों ने एक मास्टरप्लान बनाया.
उन्होंने चोरी को अंजाम देने के लिए पुलिस की फर्जी वर्दी पहनी, एक प्रोप हाउस से पुलिस वैन खरीदी और अपने साथ 'बस्टर' नाम का एक बेहद विशाल और खतरनाक दिखने वाला जर्मन शेफर्ड कुत्ता भी रखा. 6 दिसंबर 2007 की रात को इन लोगों ने डेटा सेंटर के बाहर वैन रोकी. एलिस ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर सुरक्षा गार्ड पर धौंस जमाई और रूपी पहचान पत्र दिखाकर दरवाजा खुलवा लिया. इसके बाद उन्होंने अंदर मौजूद सभी सुरक्षा गार्डों को बंधक बना लिया और उनके फोन तथा सीसीटीवी की लाइव फीड को कंट्रोल में ले लिया.
सर्वर चुराकर फरार हुआ गैंग
गैंग के साथ आए कंप्यूटर टेक्नीशियनों ने तुरंत टारगेट किए गए सर्वर को निकाला और उन्हें बीस अलग-अलग लॉन्ड्री बैग्स में भरकर वैन में लाद लिया. हैरानी की बात तो ये थी कि जब असली पुलिस मौके पर पहुंची, तो उन्होंने चोरों की वैन को भी पुलिस की गाड़ी समझकर जाने दिया.
इस पूरी घटना को अंजाम देने में उन्हें एक घंटे से भी कम का समय लगा. मीडिया रिपोर्ट्स में इस चोरी को सिर्फ हार्डवेयर चोरी बताकर दबा दिया गया, ताकि कंपनियों की साख और उनका बिजनेस खराब न हो. लेकिन असल में इस चोरी का मकसद उन सर्वर में मौजूद डेटा को गायब करना था.
इस घटना के कुछ महीने बाद पुलिस ने एलिस और उसके एक साथी को पहचान लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. एलिस को इस मामले में नौ साल की सजा काटनी पड़ी. आज के दौर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और डेटा सेंटर्स की भूमिका बढ़ती जा रही है, ऐसे में भौतिक सुरक्षा (Physical Security) पर मंडराता खतरा और भी ज्यादा गहरा गया है.
ये भी पढ़ें: विमान बचे, हादसा टला... लेकिन कब तक? भारत में बढ़ते 'नियर-मिस' मामलों का खौफनाक सच
वीडियो: Dhurandhar 2 ने पाकिस्तान में मचाया बवाल, नेटफ्लिक्स पर सर्वर हुआ क्रैश











