अमेरिका-ईरान पीस डील को लेकर क्या कतर में बातचीत होगी? इस सवाल के दोनों देशों के पास अलग-अलग जवाब हैं. एक कह रहा है होगी, तो दूसरे ने इससे साफ इनकार कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अगली बैठक कतर की राजधानी दोहा में होगी. लेकिन ट्रंप का बयान आते ही ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इससे साफ इनकार कर दिया है.
ट्रंप ने कहा दोहा में होगी बातचीत, ईरान ने इनकार कर दिया, दोनों के बीच ये चल क्या रहा है?
America-Iran Doha talks: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान की मीटिंग तय है. जबकि ईरान ने ऐसी किसी भी मीटिंग से साफ इनकार कर दिया है. इस कंफ्यूजन की वजह से सीजफायर पर संदेह बना हुआ है.


29 जून को वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए डॉनल्ड ट्रंप ने कहा,
‘तेहरान के साथ कल दोहा में मीटिंग है. मीटिंग में हम न्यूक्लियर मुद्दे पर बात करेंगे. हम नहीं चाहते कि उनके पास न्यूक्लियर हथियार हों, और ऐसा होगा भी नहीं. उन्होंने भी इस बात को माना है.’

प्रेसिडेंट ट्रंप ने इससे पहले अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट किया था. जिसमें उन्होंने बताया कि ईरान ने उनसे मीटिंग रखने के लिए आग्रह किया है, जो कल के लिए शेड्यूल हुआ है.
ईरान ने किया साफ इनकारडॉनल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की ओर से भी तुरंत प्रतिक्रिया आई. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अगले कुछ दिनों तक अमेरिका के साथ कोई मीटिंग तय नहीं है. उन्होंने ये साफ किया कि ईरान अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बातचीत अगले कुछ दिनों तक नहीं करना चाहता है.
हालांकि न्यूज़ एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप बातचीत के लिए अपने दामाद जेरेड कुशनर और स्पेशल एन्वॉय स्टीव विट्कॉफ को भेजने वाले हैं. जबकि ईरान अपनी टेक्निकल टीम को कतर भेजने वाला है. मगर इस्माइल बघाई ने ये साफ किया कि ये टीम अमेरिकी डेलीगेशन से नहीं मिलेगी. और इसका मतलब ये कतई न निकाला जाए कि दोनों देश बात कर रहे हैं. ऐसे में सवाल अब भी वही है कि आखिर मीटिंग होगी या नहीं?
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अमेरिका-ईरान के बीच कमज़ोर सीजफायरप्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने बयान में ये भी कहा कि वो इस मीटिंग से कुछ अच्छा चाहते हैं. लेकिन वो तो मीटिंग के बाद ही पता चलेगा. हालांकि मीटिंग को लेकर बने कंफ्यूजन ने अमेरिका-ईरान के मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दोनों ही देशों ने एक-दूसरे को 60 दिन का वक़्त दिया था. इतने वक़्त में जंग का परमानेंट सोल्यूशन निकाला जाना है.
लेकिन फिलहाल जिन मुद्दों पर बात बनी उसे ही ठीक से नहीं निभा पा रहे. स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज खुला, फिर जहाजों के कंट्रोल को लेकर विवाद हुआ, हमले हुए, होर्मुज फिर बंद हो गया. अब होर्मुज खुला है लेकिन अथॉरिटी को लेकर पिक्चर क्लियर नहीं है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पहले दोहा में दोनों पक्ष इसी मुद्दे को सुलझाएंगे. मगर अब मीटिंग पर ही संदेह बना हुआ है.
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