कैसे किया गया ये खेल विस्तार से समझिए? रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी के सितारे इन दिनों गर्दिश में हैं. उन पर स्वीडन की एक टेलिकॉम कंपनी एरिक्शन का करीब 550 करोड़ रुपया बकाया था. इस पैसे के भुगतान के लिए एरिक्शन सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी. बकाया भुगतान के लिए अनिल अंबानी ने निजी गारंटी दी थी. मगर वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पैसे का भुगतान नहीं कर सके. इस पर एरिक्शन ने अदालत की अवमानना का केस किया. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस वनीत सरन की बेंच में इसी केस की सुनवाई चल रही थी. अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी को निजी तौर पर पेश होना होगा. मगर 7 जनवरी, 2019 को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर दूसरा ही आदेश अपलोड किया गया. इस आदेश में लिखा गया कि अनिल अंबानी को निजी तौर पर कोर्ट के सामने पेश होने की जरूरत नहीं है. एरिक्शन ने अदालत का ध्यान इस गड़बड़ी की ओर दिलाया. इस पर नया आदेश अपलोड किया गया. तब जाकर 12 और 13 फरवरी, 2019 को अनिल अंबानी अदालत में पेश हुए.

अनिल अंबानी का कारोबार लगातार गिरावट के दौर में है. फोटो. पीटीआई.
सुप्रीम कोर्ट ने जांच में क्या पाया? सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर गलत आदेश अपलोड करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच कराई. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 5 सदस्यों की एक कमेटी ने 38 दिनों तक पूरे मामले की जांच की. इसमें दो कर्मचारियों की भूमिका सामने आई. पहला अस्टिटेंट रजिस्ट्रार तपन कुमार चक्रवर्ती और कोर्ट मास्टर मानव शर्मा. इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने दोनों आरोपियों को 13 फरवरी को बर्खास्त कर दिया था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से दिल्ली पुलिस में शिकायत की गई. इस पर 2 मार्च को दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज कर लिया. 7 अप्रैल को दोनों कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया. तपन फरार चल रहा था, उसे फोन ट्रैकिंग की मदद से पकड़ा गया. मानव शर्मा को उसके घर से पकड़ा गया.
दोनों आरोपियों को 7 दिन की रिमांड पर दिल्ली पुलिस को दे दिया गया है. इस दौरान पुलिस ये पता करने की कोशिश करेगी कि गलत आदेश किन वजहों से वेबसाइट पर अपलोड किया गया. कहीं इसके लिए पैसे का लेन-देन तो नहीं हुआ या फिर ये किसी चूक का नतीजा था.
एरिक्शन केस क्या है? स्वीडन की कंपनी एरिक्सन इंडिया ने अपने नेटवर्क के मैनेजमेंट और संचालन के लिए 2014 में अनिल अंबानी की कंपनी के साथ 7 साल का करार किया था. बीते साल एरिक्सन ने आरकॉम के खिलाफ 576.77 करोड़ रुपए की बकाया रकम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में अनिल अंबानी ने कहा कि संपत्तियों की बिक्री न होने की वजह से उनकी कंपनी दिवालिया होने की कगार पर है. मगर, फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और आरकॉम के दो डायरेक्टरों से कहा कि वह चार हफ्ते में एरिक्सन का बकाया चुकाएं. नहीं तो अदालत की अवमानना के लिए 3 महीने की सजा काटें. छोटे भाई की मुसीबत में मुकेश अंबानी साथ देने के लिए आगे आए. मुकेश की मदद से अनिल ने कोर्ट की समय सीमा से 1 दिन पहले 18 मार्च को एरिक्सन को 458.77 करोड़ रुपए का भुगतान किया.
वीडियोः सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी से कहा- मान जाइए वरना तीन महीने की जेल














