केतनवा कहता है जैसे ही हम एक गरीब को खूबसूरत पाते हैं, उसे अजूबा मान लेते हैं. उसकी फ़ोटो खींचते हैं. वेबसाइट पर डालते हैं. खबरें चलती हैं. हिट्स मिलते हैं. और ये बात सिर्फ ख़ूबसूरती तक ही नहीं सीमित है. हमें स्टेशन के बाहर गाना गाकर भीख मांगते बच्चे ज़्यादा सुरीले लगते हैं. हम उसकी बात से एग्री करते हैं. एक हद तक.
ये बच्चा भी ऐसा ही है. सीपी में गुब्बारे बेचता है. दिल्ली में है सीपी. दिल्ली वाले जल्दी में रहते हैं कनॉट प्लेस को सीपी कहते हैं. वहां ये बच्चा किसी पब में बजते म्यूजिक को सुन नाच रहा था. बच्चा जोश में नाच रहा था. और जाहिर है उसे इस बात की परवाह नहीं थी कि आसपास वाले उसे देख रहे हैं. राह चलते किसी ने वीडियो बना लिया यूट्यूब पर डाल दिया. यूट्यूब से वीडियो वायरल हो गया और अब आप ये स्टोरी पढ़ रहे हैं. https://twitter.com/HasibaAmin/status/791589808325861376 वीडियो के बीच में एक आवाज आती है. उसका मतलब ये निकलता है. जाने कहां से उसने इतना डांस देख लिया. बिना यूट्यूब के और नाच रहा है. वही बात कि चाय वाले की आंखें सुन्दर कैसे हो सकती हैं? या वो कि भीख मांगते बच्चे ज़्यादा सुरीले लगते हैं. ये बात वही कि गरीब यूट्यूब कैसे देख सकता है? या नाचना कहां से सीख आया. ये बात किसी दुराव के साथ नहीं कही गई थी, और इस बात में सहज जिज्ञासा थी. लेकिन ये बात तमाम नीली आंखवाले चाय बेचने के वायरल होने के पीछे का मनोविज्ञान समझाती है. गरीब में टैलेंट देख हम चौंकते हैं. आकर्षित होते हैं. ये अच्छी बात है और ठीक उसी समय ये खतरनाक भी है. खैर अच्छा ये है कि इस वीडियो के पड़ने के बाद कुछ लोग उसकी मदद को आगे आए और कहा कि उसके डांस एकेडमी का खर्चा उठाने को तैयार हैं. आशा है उस बालक का भला होगा. एक दिन हर किसी का भला होगा.
