'चीजों को समय के हिसाब से देखा जाए. हम किसी भी तरह जौहर का पक्ष नहीं ले रहे. जो सीन है, उसे उस समय के हिसाब से देखना चाहिए जिस समय में फिल्म की सेटिंग है. जब आप उस तरह जौहर के सीन को देखेंगे, तो पाएंगे कि सीन बहत ताकतवर है. आपको नहीं लगेगा वो कुछ भी गलत कर रही है. आप भी चाहेंगे कि वो आग में कूद जाए क्योंकि वो उस पुरुष के साथ एक होने जा रही है जिससे वो प्रेम करती है.'ये स्वरा भास्कर को दीपिका पादुकोण का जवाब है. स्वरा भास्कर ने बीते दिनों संजय लीला भंसाली को एक खुला ख़त लिखा था जो द वायर पर छपा था.

'वजाइना के अलावा औरत बहत कुछ होती है. इसलिए वजाइना के अलावा भी उसका जीवन हो सकता है.’
स्वरा भास्कर ने कुछ ऐसा लिखा था कि फिल्म देखकर उन्होंने एक औरत के तौर पर खुद को एक योनि में सिमटता हुआ पाया. वजह ये थी कि फिल्म में ये दिखाया गया है कि औरतों की इज्जत उनके शरीर में बसती है. और ये शरीर उसके पति के सिवा कोई और पुरुष छू ले तो औरत की इज्जत कम हो जाती है.
स्वरा ने इक्कीसवीं सदी में इस तरह के विचारों को बढ़ावा देने के विरोध में लिखा था. स्वरा के मुताबिक़:
‘अच्छा हो अगर हर वजाइना की इज्जत की जाए. लेकिन जब एक वजाइना के साथ खिलवाड़ हो तो उसकी इज्जत होनी बंद न हो. सिर्फ इसलिए कि उसकी वजाइना पर किसी बाहरी आदमी ने हमला किया, उसे मौत को गले न लगाना पड़े.
वजाइना के अलावा औरत बहत कुछ होती है. इसलिए वजाइना के अलावा भी उसका जीवन हो सकता है.’

दीपिका की तरफ से इस तरह के जवाब आना नॉर्मल है.
शाहिद कपूर ने भी स्वरा के जवाब में कुछ ऐसा ही कहा है.
दीपिका और शाहिद की तरफ से इस तरह के जवाब आना नॉर्मल है. वो इस फिल्म का हिस्सा हैं. मगर स्वरा ने जो कहा, वो समाज को भेदने वाली बात है. मगर दिक्कत क्या है न, कि स्वरा ने बहुत आगे की बात कह दी है. हम इतनी कड़वी सच्चाई के लिए अभी तैयार नहीं हैं.










