1.
राकेश कुमार राठौड़ बनारस में रहते हैं. तमाम लोगों की तरह उनके पास भी लाइसेंसी बंदूक थी. राकेश का बेटा विक्रम अपने कमरे में था. घर में सभी अपने काम में व्यस्त थे. तभी गोली चलने की आवाज आई. और घर वालों ने विक्रम के कमरे में जाकर देखा, तो विक्रम खून से लथपथ चीख रहा था. उसके पेट में गोली लगी थी. विक्रम को अस्पताल लेकर गए, लेकिन इलाज के दौरान विक्रम मर गया. पता नहीं चल पाया है कि गोली कैसे चली. ये सुसाइड था या विक्रम ने गलती से खुद को गोली मार ली. वजह जो भी हो, राकेश की बंदूक का लाइसेंस कैंसिल करने का काम शुरू हो गया है.
2.
फिरोजाबाद और टुंडला के बीच एक लड़की ट्रेन में चोरी करते हुए पकड़ी गई. ट्रेन के एसी कोच में किसी का सामान गायब कर रही थी. लेकिन ट्रेन में लोगों को मालूम पड़ गया. जिसके बाद लड़की की पिटाई की. पिटाई करने के बाद उसके बाल काट दिए. लड़की को गहरी चोटें आई हैं. लड़की के पिता ने बताया कि उसके दिमाग में ट्यूमर है. दिमाग का इलाज चल रहा है. लड़की अभी नाबालिग है. और भीड़ ने बिना सोचे समझे जिसके बाल काट दिए उसकी उम्र पुलिस से 19 साल दर्ज की है.
3.
हरदोई में एक दलित लड़की लापता हो गई. घर वाले पुलिस के चक्कर लगाते रहे लेकिन पुलिस ने कुछ भी नहीं किया. घरवालों को लड़की की खबर तब मिली, जब उसको मार डाला जा चुका था. मारने के बाद उसकी लाश एक पेड़ पर लटका दी गई थी. लाश आधी जली हुई थी. अमर उजाला की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ मरी हुई लड़की की जली हुई लाश देखकर भी ऐसा नहीं हुआ कि पुलिस ने कोई एक्शन लिया हो. पुलिस तो इस बात में उलझी रही कि वो इलाका किसका है. बहुत लड़ाई के बात तय हुआ कि इलाका माल पुलिस का है और लाश की जिम्मेदारी उनकी ही बनती है. तब जाकर दो दिन बाद लड़की की लाश उतारी गई. और घर वाले, वो क्या करते? चुपचाप अपनी बेटी के मरे हुए शरीर का इंतजार करते रहे. लोग आते-जाते निकलते रहे, देखते रहे. मगर किसी ने लाश को वहां से हटवाने के लिए कुछ नहीं किया.
4.
एक गत्ते की फैक्ट्री में काम करता था जीतेंद्र. एक दिन उसने काम न करने को लेकर एक हेल्पर को डांट दिया. झगडा हुआ. बात बड़ी हो गई. अगले दिन फैक्ट्री में जीतेंद्र की लाश मिली. बात है दिल्ली के इलाके रोहिणी सेक्टर 5 की. पुलिस को शक है कि खून हेल्पर ने किया है. और हमारे देश में जहां छोटी-छोटी वजहों पर क़त्ल कर दिए जाते हैं, इस बात से हैरत भी नहीं होती.
5.
जमशेदपुर में एक आदमी ने कुत्ते पर क़त्ल का केस किया है. वजह, कुत्ते के काटने के बाद उसके पिता की मौत हो गई थी. ये कुत्ता गौतम जैसवाल नाम के एक बड़े बिजनेसमैन का था. विष्णुदेव सिंह एक प्राइवेट कंपनी में गार्ड का काम करते थे. जब गौतम के कुत्ते ने विष्णुदेव को काटा, उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिया गया. उनकी तबीयत भी ठीक थी. पर मंगलवार को अचानक मौत हो गई. विष्णुदेव के बेटे अजीत का कहना है कि कुत्ता बहुत ही हिंसक है. और इसके लिए मालिक कुछ भी नहीं करते. इस गुनाह के लिए न मालिक को छोड़ना चाहिए न कुत्ते को.