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कोरोना डायरीज़: कोरोना और लॉकडाउन पर 4 साल के गून्नू की बातें कित्ती क्यूट हैं यार!

'मेरा मूड सही नहीं है, मैं अभी बात नहीं करूंगा.'

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दोनों तस्वीरें गुन्नू की हैं एक में वह मास्क लगाए कोरोना क्या है,समझा रहे थे. और दूसरी मे तब खिचाईं थी जब लॉकडाउन नहीं था और वह घूमने गए थे.
गुन्नू, जिनका नाम बाबू नहीं है.
गुन्नू, जिनका नाम बाबू नहीं है.
नाम- गून्नू
काम- पढ़ाई (फिलहाल स्कूल बंद है)
जगह- दिल्ली
 
 
मेरा नाम बाबू नहीं है. गून्नू है. कोरोना वायरस? जो कोरोना वायरस होता है वो एक बीमारी होती है. ठीक है? जब वो अंदर चली जाती है, तो जो अंदर सांस चलने की मशीन होती है वो उसको बंद कर देता है कोरोना वायरस. ओके? इसलिये हाथ से बाहर की कोई भी चीज़ छुएं तो हाथ धो लें. और फेस पर उंगली नहीं जाना चाहिए. और नाक में उंगली नहीं जाना चाहिए. आंख में उंगली नहीं जाना चाहिए. क्योंकि हाथ में कोरोना वायरस आ जाता है. और मास्क लगाना चाहिए. बाहर से आना चाहिए तो हाथ धुलना चाहिए, नहाना चाहिए. बाहर से कोई सामान आए तो उसको खुद नहीं छूना चाहिए. मम्मी को छूने देना चाहिए. साफ सफाई का ध्यान रखना चाहिए.
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कोरोना वायरस दो तरह का होता है. एक खुजली वाला और एक मारने वाला. दोनों दोस्त होते हैं. खुजली वाले में क्या होता है कि आपको हाथ में खुजली होती है और लाल-लाल दाग हो जाता है. लेकिन वो खतरनाक नहीं होता है. और मारने वाला खतरनाक होता है. बाहर नहीं जाना होता है. कोई जाए तो? तो उसको मास्क लगा के जाना होता है. नहीं तो वो कोरोना वायरस हो जाता है. और वो मर जाता है. मेरा मूड सही नहीं है. मैं अभी बात नहीं करूंगा.
पहली तस्वीर तब की है जब गुन्नू एक बार स्कूल में टमाटर बने थे. दूसरी फोटो में मास्क पहन कर समझाते हुए वीडियो भेजा है उन्होंने. हमने स्क्रीन शॉट लगा दिया है.
पहली तस्वीर तब की है जब गुन्नू एक बार स्कूल में टमाटर बने थे. दूसरी फोटो में मास्क पहन कर समझाते हुए वीडियो भेजा है उन्होंने. हमने स्क्रीन शॉट लगा दिया है.

(मूड सही होने के बाद गून्नू ने फिर लॉकडाउन और कोरोना के बारे में ये बताया)
मैं क्या कर रहा था? मैं अभी कित्ती-कित्ता खेल रहा था. कोरोना बुखार है. मोबाईल में देखा. मम्मी के मोबाईल में. कार्टून और कोरोना आ रहा. मुझको कल्पना मैम और शिवानी मैम पढ़ाती हैं. कल्पना मैम होमवर्क देती हैं. घर पर मम्मी पढ़ाती हैं. पोएम सिखाती हैं. सुनाएं?

चिड़िया बोली कुट कुट-कुट, मुझको दे दो, दो बिस्कुट.

दूध मलाई रक्खी है, उसमें दो मक्खी है.

कैसे खाऊं-कैसे खाऊं, क्या मैं भूखी ही सो जाऊं?

लॉकडाउन? जब दुकान नहीं खुलती तब लॉकडाउन होता है. और पुलिस डंडे मारती है. और बोला गया है कि खुशी-खुशी घर में रहना चाहिए. क्या? मेरा तो स्कूल भी नहीं खुल रहा. हां, मजा आ रहा है. अच्छा लगता है. मैं 'खूब दिन' से स्कूल नहीं जा रहा. दो तारीख तक नहीं जाना है. पापा टीवी में देखते हैं. मैं तो कार्टून देखता हूं.
# कोट-
दूध मलाई रखी है, उसमें दो मक्खी है.

कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. 

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