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कोरोना डायरीज़: एक बैंक कर्मचारी ने कैसे जीती कोरोना से जंग?

दी लल्लनटॉप की ख़ास पेशकश - कोरोना डायरीज़. इसमें हम बात करते हैं उन लोगों से जो कोरोना महामारी से जुड़े अपने अनुभव हमसे साझा करते हैं और हमें ये ढांढस बंधाते हैं कि अगर हम साथ हैं, एक हैं, तो कोई महामारी हमारे हौसले नहीं तोड़ सकती. इसी कड़ी में हमने बात की एक बैंक कर्मचारी निर्मल शुक्ला से जिनके साथ उनकी मां भी कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं. देखिए वीडियो.

कोरोना डायरीज़: एक बैंक कर्मचारी ने कैसे जीती कोरोना से जंग?

दी लल्लनटॉप की ख़ास पेशकश - कोरोना डायरीज़. इसमें हम बात करते हैं उन लोगों से जो कोरोना महामारी से जुड़े अपने अनुभव हमसे साझा करते हैं और हमें ये ढांढस बंधाते हैं कि अगर हम साथ हैं, एक हैं, तो कोई महामारी हमारे हौसले नहीं तोड़ सकती. इसी कड़ी में हमने बात की एक बैंक कर्मचारी निर्मल शुक्ला से जिनके साथ उनकी मां भी कोरोना पॉजिटिव हो गई थीं. देखिए वीडियो.

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कोरोना डायरीज़: हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले ने COVID-19 वैक्सीन के बारे में चौंकाने वाली बात बताई

दी लल्लनटॉप की ख़ास पेशकश – कोरोना डायरीज़. इसमें हम बात करते हैं उन लोगों से जो कोरोना महामारी से जुड़े अपने अनुभव घंसे साझा करते हैं और हमें ये ढांढस बंधाते हैं कि अगर हम साथ हैं, एक हैं, तो कोई महामारी हमारे हौसले नहीं तोड़ सकती. इसी कड़ी में हमने बात की एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल प्रभाकर शर्मा से. देखिए वीडियो.

 

कोरोना डायरीज़: हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले ने COVID-19 वैक्सीन के बारे में चौंकाने वाली बात बताई

दी लल्लनटॉप की ख़ास पेशकश – कोरोना डायरीज़. इसमें हम बात करते हैं उन लोगों से जो कोरोना महामारी से जुड़े अपने अनुभव घंसे साझा करते हैं और हमें ये ढांढस बंधाते हैं कि अगर हम साथ हैं, एक हैं, तो कोई महामारी हमारे हौसले नहीं तोड़ सकती. इसी कड़ी में हमने बात की एक हेल्थकेयर प्रोफेशनल प्रभाकर शर्मा से. देखिए वीडियो.

 
न्यूज़

लॉकडाउन में राम गोपाल वर्मा ने कांड कर दिया है, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा

नई फिल्म का ट्रेलर रिलीज़ किया और सारा विवाद अपनी ओर खींच लिया. मामला सीरियस है.

लॉकडाउन में राम गोपाल वर्मा ने कांड कर दिया है, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा

”जब तमाम फिल्मी लोग झाड़ू-पोछा, खाना बनाने, बर्तन धोने और कपड़े सुखाने में लगे थे, तब मैंने एक फिल्म बना दी.” ये कहना है मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा का. और उनका कहना फैक्चुअली करेक्ट है. राम गोपाल वर्मा शॉर्ट में रामू ने ‘कोरोनावायरस’ नाम की फिल्म बनाई और उसका ट्रेलर भी रिलीज़ कर दिया. … और पढ़ें लॉकडाउन में राम गोपाल वर्मा ने कांड कर दिया है, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा

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कोरोना डायरीज़: 'टीवी से धार्मिक नफरत का ज़हर पी रहे अपने पिता को कैसे समझाऊं?'

इस पीएचडी स्कॉलर ने क्यूं कहा, ''छतरी मोड़ो, देश जोड़ो?'

कोरोना डायरीज़: 'टीवी से धार्मिक नफरत का ज़हर पी रहे अपने पिता को कैसे समझाऊं?'

नाम – कृष्ण ताखर काम – पी.एच.डी. स्कॉलर जगह – चिड़ावा, राजस्थान सब दोस्तों को नमस्कार. लॉकडाउन में घर बैठा हुआ नॉवल पढ़ रहा हूं. अल्बर्ट कामु का नॉवल ‘द प्लेग’. कोरोना महामारी के समय में इस नॉवल की अलग ही सार्थकता है. घर वालों के साथ बैठकर हर रोज़ एक कहानी भी पढ़ता हूं. … और पढ़ें कोरोना डायरीज़: ‘टीवी से धार्मिक नफरत का ज़हर पी रहे अपने पिता को कैसे समझाऊं?’

भैरंट

कोरोना डायरीज़: जब टिक-टॉक बनाने वाले पुलिस को देखकर डिसेबल होने की एक्टिंग करने लगे

साइकोलॉजी की स्टूडेंट ने लोगों के बीच क्या चीज़ कॉमन बताई?

कोरोना डायरीज़: जब टिक-टॉक बनाने वाले पुलिस को देखकर डिसेबल होने की एक्टिंग करने लगे

नाम- सृष्टि काम- साइकोलॉजी स्टूडेंट, लेडी श्री राम कॉलेज, दिल्ली जगह- दिल्ली मैं और मेरे जैसे इस लॉकडाउन को अलग तरह से एंजॉय कर रहे. वो शायद ऐसा है कि सबकुछ पलट गया है. जैसे मेरी रुटीन. मैं पहले सुबह 5:30 तक उठ जाती थी. अब इस समय सोने जाती हूं. मुझे कॉलेज जाने में दो … और पढ़ें कोरोना डायरीज़: जब टिक-टॉक बनाने वाले पुलिस को देखकर डिसेबल होने की एक्टिंग करने लगे

भैरंट

कोरोना डायरीज़: ये लड़की पुराने अखबार में क्या चीज तलाशती रहती है?

'लोग वामपंथी और देशद्रोही तक कह दे रहे हैं'

कोरोना डायरीज़: ये लड़की पुराने अखबार में क्या चीज तलाशती रहती है?

नाम- नेहा नेत्री राय काम- यूपीएसी की तैयारी जगह- बनारस मैं बिहार की हूं. आरा की. पिछले 6 साल से बनारस में रह रही हूं. बीएचयू में पढ़ती थी. एमए कर लिया. अब हॉस्टल से निकलना पड़ा तो कैम्पस के बाहर कमरा लेकर रहती हूं. UPSC की तैयारी करती हूं. एक टाइम के बाद यही … और पढ़ें कोरोना डायरीज़: ये लड़की पुराने अखबार में क्या चीज तलाशती रहती है?

भैरंट

कोरोना डायरीज: 1999 में बिहार से दिल्ली आए उदय कहते हैं, 'बिना कोरोना हुए मर जाएंगे'

'हमारे घर में कभी खाने को कमी नहीं हुआ, लेकिन अब हो रहा है.'

कोरोना डायरीज: 1999 में बिहार से दिल्ली आए उदय कहते हैं, 'बिना कोरोना हुए मर जाएंगे'

नाम- उदय कुमार काम – इलेक्ट्रीशियन पता – दिल्ली हमारा नाम उदय है. हम दिल्ली आ गए थे सन 1999 में. घर से भाग कर यहां आए थे. लोग वहां बिहार में बताता था कि दिल्ली है दिलवालों की. बोलता था कि वहां आदमी भूखों नहीं मरता. घर पे पईसा रुपया का दिक्कत था ही. … और पढ़ें कोरोना डायरीज: 1999 में बिहार से दिल्ली आए उदय कहते हैं, ‘बिना कोरोना हुए मर जाएंगे’

भैरंट

कोरोना डायरीज: लॉकडाउन में इन लड़कियों ने जो बांटा, वो देश-दुनिया के हर राहत पैकेट में होना चाहिए

लोग इस बेहद ज़रूरी मदद से क्यों चूक रहे हैं?

कोरोना डायरीज: लॉकडाउन में इन लड़कियों ने जो बांटा, वो देश-दुनिया के हर राहत पैकेट में होना चाहिए

नाम- सना श्रीवास्तव काम – मीडिया स्टूडेंट पता –   दिल्ली सोसायटी के लिए कुछ करना था इसलिए मीडिया की पढ़ाई चुनी. लेकिन जल्दी समझ आ गया कि सिर्फ़ इतने भर से बात बनेगी नहीं. पिछले साल कुछ दोस्तों के साथ फ़ील्ड पर निकल पड़ी. सटीक और सॉलिड चेंज लाने के लिए. भरोसा दिलाने के लिए … और पढ़ें कोरोना डायरीज: लॉकडाउन में इन लड़कियों ने जो बांटा, वो देश-दुनिया के हर राहत पैकेट में होना चाहिए

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कोरोना डायरीज़: इस लड़की ने लॉकडाउन में जो सीख लिया, देखकर अच्छा लगेगा!

'घर पर होते तो शायद एक-एक दिन गिन रहे होते, यहां सही है'

कोरोना डायरीज़: इस लड़की ने लॉकडाउन में जो सीख लिया, देखकर अच्छा लगेगा!

नाम- हर्षिका काम- स्टूडेंट जगह- बनारस मैं एक घर में लगभग बंद हूं. लगभग शब्द इसलिए कह रही, क्योंकि दिन में एक बार दूध लेने के लिए बाहर निकलना पड़ता है. सुबह 7 बजे तक उठ जाओ तो दूध मिल जाता है बाकी अगर नींद नहीं खुले तो दूध नहीं मिलता और तब दिन भर … और पढ़ें कोरोना डायरीज़: इस लड़की ने लॉकडाउन में जो सीख लिया, देखकर अच्छा लगेगा!

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कोरोना डायरीज़: लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए इसल लड़की के काम के आप फ़ैन हो जाएंगे

कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. इस वीडियो में अनुप्रिया अपनी कहानी बता रहे हैं. जो गुरुग्राम के एक कॉल सेंटर में काम करते थे. अगर आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com पर.

कोरोना डायरीज़: लॉकडाउन में फंसे लोगों के लिए इसल लड़की के काम के आप फ़ैन हो जाएंगे

कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. इस वीडियो में अनुप्रिया अपनी कहानी बता रहे हैं. जो गुरुग्राम के एक कॉल सेंटर में काम करते थे. अगर आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com पर.