क्या हुआ था उस दिन
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 11 अप्रैल के दिन कुछ लड़के इलाके से गुजर रहे थे, तभी किसी बात पर उनकी भिड़ंत दूसरे वर्ग के लोगों से हो गई. हाथापाई और मारपीट के बाद लोगों ने बीचबचाव करके मामला शांत करा दिया था. दो दिन बाद रामनवमी थी. उस दिन हर साल की तरह इलाके में झांकी निकाली गई. शोभायात्रा के दौरान सब ठीक-ठाक रहा. कहीं कोई टकराव नहीं दिखाई दिया. जब शोभायात्रा खत्म करके लोग वापस लौट रहे थे, उसी वक्त अचानक किसी बात पर दोनों वर्ग के लोग भिड़ गए. ये वही लड़के थे, जो 11 अप्रैल वाले दिन एक दूसरे से लड़ गए थे.

पत्थरबाज़ी के बाद भीड़ ने कई बाइक और गाड़ियों में आग लगा दी.
देखते-देखते टकराव ने हिंदू-मुस्लिम विवाद का रूप ले लिया. वर्ग विशेष के लोगों ने इलाके की दुकानों और राहगीरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. पत्थरबाजी करने लगे. व्यापारी वर्ग के घरों में हमला बोल दिया. उन पर कुछ नकाबपोश बदमाशों ने पथराव किया. इससे गुस्साए व्यापारियों ने भी विरोध में पत्थरबाजी शरू कर दी.

महिलाओं ने मीडिया के सामने रो-रोकर पत्थरबाजी की पूरी कहानी बताई.(तस्वीर- वीडियो स्क्रीनशॉट)
दोनों पक्षों के बीच हुई इस पत्थरबाजी में कई लोगों को चोटें आई. कई गाड़ियों को नुकसान पहुंची और कई घरों के शीशे टूट गए. मुसलमानों ने आरोप लगाया कि व्यापारी वर्ग के लोगों ने मुहल्ले में आगजनी की. कई गाड़ियां आग के हवाले कर दीं. इस दौरान पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
पुलिसवाले भी घायल हुए
मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक जब इस घटना की जानकारी पुलिस को मिली, तो वो मौके पर पहुंची और पत्थरबाजी कर रहे लोगों को खदेड़ने की कोशिश की. मगर उग्र भीड़ को काबू करने में उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी. इस दौरान दो पुलिस वाले भी घायल हो गए उनको पत्थर लगने से चोटें आईं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ये घटना पुलिस की लापरवाही की वजह से बढ़ी. शोभायात्रा समिति ने कुछ दिन पहले ही इस इलाके में ज्यादा पुलिस बल लगाने को कहा था. लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

जोधपुर के सूरसागर में दो पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाज़ी हुई. (तस्वीर- वीडियो स्क्रीनशॉट)
घटना के बाद सियासत शुरू
लोकसभा चुनाव चल रहा है. ऐसे में सांप्रदायिक घटना को लेकर सियासत भी शुरू हो गई. पुलिस कुछ लोगों को पकड़कर थाने ले आई. इस पर लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने गलत लोगों को हिरासत में लिए है. कुछ ही देर में यहां कांग्रेस और बीजेपी के नेता भी पहुंच गए. पहले, कांग्रेस नेता राजेंद्र सोलंकी और इलाके की विधायक मनीषा पंवार आईं. फिर बीजेपी के लोकसभा प्रत्याशी गजेंद्र सिंह शेखावत भी पहुंच गए. दोनों ओर से रात 11 बजे तक नेतागिरी की. वे पकड़े गए लोगों को छोड़ने की मांग कर रहे थे. बाद में धरना खत्म कर दिया गया.

सूरसागर थाने पर भीड़ जमा होकर गिरफ्तार किए गए लोगों को छोड़ने की मांग करने लगी. (तस्वीर- वीडियो स्क्रीनशॉट)
अब माहौल क्या है?
हिंसा के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिसबल की तैनाती है. लोगों के बीच डर का माहौल तो है, लेकिन धीरे-धीरे ज़िंदगी सामान्य हो रही है.












