The Lallantop

'ये चीन की दबंगई है', PLA ने रहस्यमय न्यूक्लियर मिसाइल दाग दी, ताइवान से लेकर अमेरिका तक सब हिल गए

चीन ने प्रशांत महासागर में न्यूक्लियर क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसके बाद ताइवान, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका ने चिंता जताई. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य ताकत, पारदर्शिता की कमी और विस्तारवादी नीतियों की वजह से यह परीक्षण पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए गंभीर रणनीतिक संदेश माना जा रहा है.

Advertisement
post-main-image
चीन के मिसाइल परीक्षण ने दुनिया को हिला दिया. (फोटो- India Today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने 6 जुलाई को प्रशांत महासागर में JL-3 बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया, जिसमें डमी न्यूक्लियर वॉरहेड लगा था और यह बिना किसी टारगेट के छोड़ी गई।
  • चीन ने इस मिसाइल परीक्षण से पहले क्षेत्रीय पड़ोसी देशों को सूचित किया, लेकिन मिसाइल की तकनीकी विशिष्टताओं और परीक्षण स्थान को लेकर जानकारी साझा नहीं की गई, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
  • इस कदम पर ताइवान, जापान, अमेरिका समेत अन्य देशों ने आपत्ति जताई और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया, जिसके कारण इस विवाद के बाद कूटनीतिक चर्चा और निगरानी बढ़ सकती है।

प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में चीन की नेवी ने एक मिसाइल छोड़ी और जापान से लेकर अमेरिका तक हड़कंप मच गया. ये मिसाइल किसी जंग का ऐलान नहीं था. इसमें एक नकली न्यूक्लियर वॉरहेड लगा था और यह छोड़ी भी ऐसी जगह पर गई थी, जहां कोई भी टारगेट नहीं था. फिर भी इसने चीन और उसके पड़ोसी देशों को ही नहीं, जापान और अमेरिका तक को टेंशन में क्यों डाल दिया? वह भी इतना ज्यादा कि उसके एक पड़ोसी ताइवान ने इसे क्षेत्रीय ‘दबंगई’ का नाम दे दिया.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

सब बातें विस्तार से जानेंगे, लेकिन सबसे पहले ये जानते हैं कि विस्तारवादी नीतियों पर चलने वाले भारत के इस पड़ोसी देश ने किया क्या है? 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने सोमवार, 6 जुलाई को सूचना दी कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) की नेवी ने प्रशांत महासागर में एक मिसाइल टेस्ट किया है. ये मिसाइल लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जिससे न्यूक्लियर वेपन को लॉन्च किया जा सकता है. न्यूक्लियर एनर्जी से चलने वाली चीन की सबमरीन से यह मिसाइल दक्षिणी प्रशांत महासागर की ओर दागी गई. 

Advertisement

हालांकि, इस मिसाइल में जो वॉरहेड लगा था, वो डमी यानी नकली था. साथ ही, यह ऐसी जगह पर दागा गया था, जहां से किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. यानी इसका कोई खास टारगेट नहीं था. 

PLA ने स्पष्ट भी किया कि यह मिसाइल टेस्टिंग इंटरनेशनल कानून और नियमों के हिसाब से ही किया गया है. इसका निशाना कोई देश नहीं था. सेना ने यह भी बताया कि मिसाइल दागने से पहले उसने उन सभी देशों को इसकी जानकारी दे दी थी, जो इस क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं.

फिर दुनिया टेंशन में क्यों है?

इन सारे स्पष्टीकरणों के बाद भी चीन के पड़ोसियों समेत दुनिया भर के देशों में चिंताएं बढ़ गईं. इसकी कई सारी वजहें हैं. सबसे पहले तो किसी को ये नहीं पता है कि चीन ने जिस मिसाइल का परीक्षण किया है, वो कौन-सी है? चीन ने भी पड़ोसी प्रभावित देशों को इसके बारे में जानकारी नहीं दी कि मिसाइल की खासियतें क्या हैं? 

Advertisement

हालांकि, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने एक मिलिट्री एक्सपर्ट के हवाले से बताया कि ये संभवतः JL-3 मिसाइल थी, जो चीन की सबसे मॉडर्न सबमरीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है. इसे पिछले साल सैन्य परेड में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था.

JL-3 मिसाइल क्या है?

JL-3 (Ju Lang-3) चीन की तीसरी पीढ़ी की सबमरीन लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है. इसकी अनुमानित रेंज 10 हजार से 14 हजार किलोमीटर तक बताई जा रही है. यानी चीन की सबमरीन अगर प्रशांत महासागर में कहीं भी छिपी रहे तो वह अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है.

ये भी पढ़ेंः अंतरिक्ष में चमकेगा भारत का सोना-हीरा: स्काईरूट के 'मिशन आगमन' के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

ताइवान का दावा अलग

हालांकि, मिसाइल कौन सी थी? इस पर ताइवान का दावा अलग है. यहां की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने एक्स पर दावा किया कि चीन ने फिलीपींस के ऊपर से गुजरने वाली JL-2 SLBM का परीक्षण किया है. यानी फिलहाल ये रहस्य है कि आखिर चीन ने कौन सी न्यूक्लियर मिसाइल लॉन्च की है.

इसे लेकर जोसेफ वू ने ये भी कहा कि चीन की यह उकसाने वाली कार्रवाई है. यह हिंद-प्रशांत इलाके की स्थिरता को कमजोर करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह इस क्षेत्र में दबंगई दिखाने वाला देश है.

सिर्फ ताइवान को ही इससे दिक्कत नहीं है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान ने भी चीन के इस कदम पर आपत्ति जताई है. यहां की सरकारों ने आरोप लगाया कि चीन ने उन्हें मिसाइल परीक्षण की सूचना केवल कुछ घंटे पहले ही दी थी. इन देशों ने यह भी कहा कि मिसाइल को South Pacific Nuclear Free Zone की दिशा में दागा गया. यह चीन की वादाखिलाफी है, जो उसने साल 1987 में 1986 की रारोटोंगा संधि (Treaty of Rarotonga) के तहत की थी कि वह इस इलाके में हथियारों का परीक्षण नहीं करेगा. न वहां के किसी देश के खिलाफ न्यूक्लियर वेपन के इस्तेमाल की धमकी देगा.

जापान और अमेरिका को टेंशन

जापान ने कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियों में पारदर्शिता की कमी है. यह जापान ही नहीं पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है. अपनी बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी न देने से चीन क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर रहा है.

अमेरिका को भी चीन का यह शक्ति प्रदर्शन बिल्कुल रास नहीं आया. समाचार एजेंसी एपी (AP) के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता थॉमस पिगॉट ने कहा कि एक ओर अमेरिका है जो न्यूक्लियर हथियारों की बढ़ती खेप को रोकने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है. वहीं चीन इसका उल्टा काम कर रहा है. वह अपनी परमाणु क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहा है.

वीडियो: दुनियादारी: अली खामेनेई के जनाजे में 'शैतान ट्रंप' के नारे, लेकिन मोजतबा पर भी सवाल

Advertisement