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ईरान के सभी शीर्ष नेता अयातुल्ला खामेनेई को याद कर रो पड़े, जानें इतने दिन कैसे सुरक्षित रखा शव

अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के चार महीने बीत जाने के बाद किया जा रहा है. इस्लामिक परंपरा के मुताबिक, मौत के 24 घंटे के भीतर ही शव को दफना दिया जाता है. लेकिन कुछ मामलों में इसमें छूट दी जाती है. अली खामेनेई के शव को धार्मिक नियमों के मुताबिक रखा गया था.

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अयातुल्ला खामेनेई का शव अब तक सुरक्षित रखा गया था. (इंडिया टुडे)

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  • ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में उनका दफनाने के साथ समाप्त होगा।
  • अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी का कारण अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध में लगा रहना और सुरक्षा के लिहाज से जोखिम को ध्यान में रखना था।
  • अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में 30 से अधिक देशों के नेता और 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिससे यह ईरान की इस्लामी रिजीम की ताकत दिखाने का मौका माना जा रहा है।

एसएस राजामौली की फिल्म में राजमाता शिवगामी देवी का एक डायलॉग है. ‘मेरा वचन ही है शासन’. ये माहिष्मती साम्राज्य में उनके मयार को दिखाता है. कुछ यही मयार ईरान में सुप्रीम लीडर का होता है. उनके आगे किसी भी संवैधानिक पद की कोई हैसियत नहीं. ईरान अपने सुप्रीम लीडर की अंतिम रुख्सती में भी उनके मयार को बुलंद रखने की तैयारी में है. दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की आखिरी विदाई को तेहरान सदी का सबसे बड़ा आयोजन बनाने की तैयारी में है.

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दुनियाभर के लोगों ने दी श्रद्धांजलि

खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए थे. 4 जुलाई से उनके अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम शुरू होने वाले हैं. पांच शहरों में आयोजित होने वाले इस समारोह के लिए उनका शव तेहरान पहुंच गया है. राजधानी में विशाल हॉल में उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. यहां दुनिया भर के धर्मगुरुओं, गणमान्य विदेशी अतिथि और अधिकारियों ने उनको श्रद्धांजलि दी.

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'ग्रैंड मोसल्ला' में रखा गया ताबूत

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद तेहरान का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है. अली खामेनेई के ताबूत को यहीं रखा गया है. उनके ताबूत पर ईरान का झंडा लगा है. जबकि ताबूत को लाल फूलों और हवा में लटकी सफेद तितलियों के बीच रखा गया है. सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम की शुरुआत 4 जुलाई से होगी. 4 और 5 जुलाई को उनके पार्थिव शरीर को जनता के दर्शन के लिए रखा जाएगा. 6 जुलाई को तेहरान में उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. फिर 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में समारोह होगा. इसके बाद 9 जुलाई को उनको मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा.

ईरान के राष्ट्रपति की आंखों में आंसू

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अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम शुरू होने से पहले ग्रैंड मोसल्ला में ईरान समेत दुनियाभर के प्रतिनिधियों ने अली खामनेई को श्रद्धांजलि दी. अपने सुप्रीम लीडर को श्रद्धांजलि देते वक्त ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाए. खामेनेई को याद करते हुए उनकी आंखों में आंसू साफ दिखाई दे रहे थे. उन्हें छलकने से रोकने के लिए पेजेश्कियान का अंदर का संघर्ष बाहर साफ दिखाई दिया. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के आंखों में भी आंसू दिखे. विदेश मंत्री अब्बास अराघची बड़ी मुश्किल से अपने आंसू रोक पाए.

भारत पाकिस्तान से कौन कौन पहुंचा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने ईरान पहुंचने वाले हैं. वहीं फील्ड मार्शल असीम मुनीर तेहरान पहुंच चुके हैं. भारत की तरफ से बिहार के गवर्नर सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भी ईरान पहुंच गए हैं. भारत में ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया है कि भारत के गणमान्य लोगों ने ईरान के सुप्रीम लीडर को श्रद्धांजलि दी है. दूतावास की शेयर की गई तस्वीर में पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस पार्टी के विदेश मामलों के प्रमुख सलमान खुर्शीद भी नजर आए.

अंतिम संस्कार में 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान है. पूरे देश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. 30 से ज्यादा देशों के नेता और प्रतिनिधि और 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों को समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है.

अंतिम संस्कार में शक्ति प्रदर्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला करते समय ईरान की इस्लामिक रिजीम को खत्म करने की बात की थी. इसलिए ईरान अपने सुप्रीम लीडर की अंतिम विदाई को इस्लामिक रिजीम के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहा है. ईरानी शासन देश भर के कई शहरों में आयोजित इस भव्य समारोह में आने वाले लोगों के रहने, खाने पीने और ट्रांसपोर्टेशन की पूरी व्यवस्था कर रही है. इस समारोह में आने वाले जनसैलाब को इस्लामिक रिजीम के प्रति लोगों की निष्ठा के तौर पर देखा जा रहा है. उनके लिए ये अपनी ताकत दिखाने का अवसर है. उनका मानना है कि वे एक ऐसी लड़ाई से बच कर निकले हैं, जिसे उनके अस्तित्व के लिए खतरा बताया जा रहा था.

अंतिम संस्कार में क्यों हुई देरी?

अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के चार महीने बीत जाने के बाद किया जा रहा है. उनके अंतिम संस्कार में देरी की वजह ईरान का अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध में लगे रहना था. उन पर हुए जानलेवा हमले के बाद महीनों तक ईरान और अमेरिका-इजरायल एक दूसरे पर हमले करते रहे. ऐसे में ईरान की पहली प्राथमिकता उनसे निपटने की थी. युद्ध के दौरान अंतिम संस्कार आयोजित करने पर सिक्योरिटी रिस्क था.

कैसे सुरक्षित रखा गया शव?

इस्लामिक परंपरा के मुताबिक, मौत के 24 घंटे के भीतर ही शव को दफना दिया जाता है. लेकिन कुछ मामलों में इसमें छूट दी जाती है. अली खामेनेई के शव को धार्मिक नियमों के मुताबिक रखा गया था. इस्लाम में केमिकल का इस्तेमाल करके शव को सुरक्षित रखने को सही नहीं माना जाता.

काउंटर टेररिज्म मामलों के जानकर डॉ. मोहम्मद उमर ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अली खामेनेई के शव को रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था. इसके लिए केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया था. क्योंकि इस्लाम में इसकी मनाही है. उन्होंने बताया, “शिया कानून कुछ खास मामलों में शव के देरी से दफनाने और उसे ठंड में सुरक्षित रखने की इजाजत देता है.” 

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अयातुल्ला का कद 

अयातुल्ला अली खामेनेई सिर्फ ईरान के सुप्रीम लीडर नहीं थे. वे शिया मुस्लिम धर्मगुरु भी थे. इराक, पाकिस्तान, लेबनान और दूसरे एशियाई देशों में भी उनका बहुत सम्मान था. इन जगहों पर शिया समुदाय की रैलियों में अक्सर उनकी तस्वीरें दिख जाती थीं. शिया धर्मगुरुओं के ऑर्डर में खामेनेई 'मरजा' माना जाता था. इसका मतलब है कि दुनिया भर के कई शिया उनके धार्मिक फैसलों और मार्गदर्शन के लिए उनकी ओर देखते थे.

हालांकि कई शिया विद्वान इराक के ग्रैंड अयातुल्ला अली सिस्तानी को संप्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक नेता मानते हैं. लेकिन अरब के शिया मिलिशिया गुटों से अलायंस के चलते खामेनेई का राजनीतिक प्रभाव बहुत ज्यादा था. उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) की भी सदारत की थी. 

वीडियो: खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले ईरान की अमेरिका-इजराइल को चेतावनी

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