मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ट्रांसपैरेंसी लाने के लिए सरकार ई-अटेंडेंस योजना लाई. मकसद था गुरुजी लोग सही समय पर स्कूल आएं. लेकिन उनके बहानों को देखते हुए ये योजना ‘कॉमेडी ऑफ एरर्स’ बनती दिख रही है. ऐप पर एक टैप करने से बचने के लिए राज्य के सरकारी शिक्षकों ने ऐसे-ऐसे बहाने बनाए हैं, जिन्हें सुनकर बड़े साहब लोग भी हैरान हो गए हैं.
'पाकिस्तान से कॉल आ रहा', ई-अटेंडेंस से बचने के लिए सरकारी टीचर्स ने हद पार कर दी
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में ई-अटेंडेंस से बचने के लिए टीचर्स ने बहाने बनाने में अपनी पूरी क्रिएटिविटी दिखाई है. कुछ का दावा है कि ई-अटेंडेंस मार्क करने के बाद उनके मोबाइल पर पाकिस्तान से रहस्यमय फोन आ रहा है. वहीं कुछ ने कहा कि उनके पास तो अब तक कीपैड फोन ही है.


पाकिस्तान से कॉल आ रहा!
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जब से ई-अटेंडेंस (e-attendance) को अनिवार्य किया गया है, तब से टीचर्स बहाने बनाने में अपनी क्रिएटिविटी दिखाने लगे हैं. कुछ का कहना है कि उनके पास आज भी पुराना कीपैड फोन है, जिससे वे ऑनलाइन हाजिरी नहीं लगा सकते, जबकि कुछ ने डेटा लीक होने का आरोप लगाया है. बहाना बनाने में बाकी लोगों को मात देते हुए किसी ने तो ये तक कह दिया कि उनको पाकिस्तान से ‘रहस्यमय’ कॉल आ रहे हैं.
अफसरों ने खारिज की आपत्तियां
डायरेक्टरेट ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शन के अधिकारियों ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि टीचर्स के लिए स्कूल में अटेंडेंस मार्क करने वाला ऐप पूरी तरह से सुरक्षित है. उन्होंने ये भी बताया कि राज्य में 90 फीसदी से ज्यादा टीचर्स रोज इससे अपना अटेंडेंस बना रहे हैं. उन्होंने साफ-साफ कहा,
“समस्या सिर्फ उन्हें आ रही है जो काम नहीं करना चाहते. अगर सच में कोई तकनीकी दिक्कत है तो हम उसका समाधान करेंगे. लेकिन मनगढ़ंत बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”
शिक्षक संघ ने खोला मोर्चा
इस बीच गवर्नमेंट टीचर्स एसोसिएशन ने ई-अटेंडेंस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. एसोसिएशन के कार्यकारी स्टेट प्रेसिडेंट उपेंद्र कौशल ने बताया, “हम शिक्षा में तकनीक के विरोधी नहीं हैं, लेकिन शिक्षकों पर बिना किसी तैयारी के अतिरिक्त प्रशासनिक या फिर आर्थिक बोझ नहीं लादा जाना चाहिए.”
संघ ने डिपार्टमेंट से मांगी क्लैरिटी
स्मार्टफोन का खर्चा : जिन शिक्षकों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट नहीं है, क्या विभाग उन्हें मोबाइल और डेटा का पैसा रीइंबर्स (लौटाएगा) करेगा?
नेटवर्क की दिक्कत : दूरदराज के गांव में नेटवर्क की परेशानी आती है. विभाग के पास क्या इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था है?
डेटा सिक्योरिटी : ऐप ग्लिच के चलते अटेंडेंस नहीं लगने और टीचर्स के पर्सनल डेटा की सिक्योरिटी की गारंटी किसके जिम्मे होगी?
इसके अलावा शिक्षक संघ ने ये सवाल भी पूछा है कि ई-अटेंडेंस लागू करने के बाद कितने शिक्षकों पर एक्शन लिया गया है. साथ ही ये सवाल भी उठाया कि उनमें से कितने मामलों में तकनीकी कारणों का पता चला है. फिलवक्त शिक्षा विभाग तमाम आपत्तियों के बावजूद ढील देने के मूड में नहीं है. जबकि जमीन पर शिक्षकों और अफसरों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल थमता नहीं नजर आ रहा है.
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