चंद्रयान-3 मिशन (Chandrayaan-3) की सफलता को लेकर ISRO के पूर्व चेयरमैन का बयान सामने आया है. के कस्तूरीरंगन (K Kasturirangan) ने कहा कि पहले स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में देश ने कई चुनौतियों का सामना किया. कहा कि भारत को स्पेस टेक्नोलॉजी से वंचित रखा जाता था. उन्होंने बताया कि दूसरे देशों पर निर्भरता के चलते हमें नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन ISRO के इस मिशन ने सबकुछ बदल दिया है.
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चंद्रयान-3 मिशन (Chandrayaan-3) की सफलता को लेकर ISRO के पूर्व चेयरमैन के कस्तूरीरंगन ने कहा कि पहले स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में देश ने कई चुनौतियों का सामना किया.


इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में के कस्तूरीरंगन ने कहा, चांद पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से पता चलता है कि भारत स्पेस टेक्नोलॉजी के मामले में सबसे आगे है, अब हमें पहले की तरह टेक्नोलॉजी से वंचित नहीं रखा जाएगा, अंतरराष्ट्रीय मामलों हमारी अंतरिक्ष क्षमताएं अहम भूमिका निभाएंगी. वो बोले, चंद्रयान -3 ने सुनिश्चित किया है कि भारत स्पेस से जुड़े मामलों में डिसीजन मेकिंग का हिस्सा बनेगा.
उन्होंने आगे कहा कि हम अब उस क्लब का हिस्सा बन गए हैं जो स्पेस से जुड़ी पॉलिसी बनाता है, पहले हमें उस क्लब से बाहर रखा जाता था, अब भविष्य में जब ग्रहों की खोज, स्पेस रिसर्च और वहां के रीसोर्स से जुड़े फैसले लिए जाएंगे तो भारत की भी राय ली जाएगी.
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के कस्तूरीरंगन ने कहा कि अतीत में हमें एटॉमिक एनर्जी, स्पेस और अन्य जरूरी क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी तक पहुंच से वंचित रखा गया. उन्होंने बताया कि हमें नजरअंदाज किया गया क्योंकि हमारे पास अपनी क्षमताएं नहीं थीं और हम कुछ मायनों में दूसरों पर निर्भर थे और अब ये सब बदल जाएगा.
बता दें, के कस्तूरीरंगन 1994 से 2003 तक ISRO के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं. उनके कार्यकाल के दौरान चांद पर पहुंचने वाले मिशन्स की योजना बनाई गई थी. वो कहते हैं कि चंद्रयान-3 हमें आत्मविश्वास और क्षमता देता है.
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