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US-ईरान में फिर जंग! कार्गो शिप पर हमले से भड़के अमेरिका ने मिसाइलें दागीं, IRGC ने US बेस उड़ाए

Strait of Hormuz में कार्गो जहाज पर हमले के बाद अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ गया है. 26 जून को अमेरिका ने ईरानी मिसाइल-ड्रोन ठिकानों पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया.

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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. (फाइल फोटो: X/@CENTCOM)

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  • 26 जून को अमेरिकी सेनाओं ने ईरान में मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटीज तथा तटीय रडार साइट्स पर हवाई हमले किए।
  • यह हमले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज पर ड्रोन हमले के बाद हुए, जिसके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया।
  • ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की संभावना है।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है. शुक्रवार, 26 जून को अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए. जवाब में ईरान ने भी इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. यह घटनाक्रम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज पर हमले के बाद सामने आया है. अमेरिका ने इस हमले के लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहराया है.

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US ने किया हमला

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर सटीक हमले किए हैं. CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज फैसिलिटी के साथ-साथ तटीय रडार साइट्स को निशाना बनाया. ईरानी मीडिया ने भी पुष्टि की कि एक मिसाइल दक्षिणी बंदरगाह शहर सिरिक में एक घाट के आसपास के क्षेत्र में गिरी थी.

ईरान के मीडिया ने सेना के एक सूत्र के हवाले से यह भी कहा कि दिन में पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उन जहाजों की तरफ चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई गईं, जिन्हें उन्होंने ‘नियम तोड़ने वाले जहाज’ बताया.

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US attacks Iran
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का पोस्ट. (X)
ईरान ने किया पलटवार

हमले के कुछ ही समय बाद, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इलाके में अमेरिकी मिलिट्री बेसों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की. किन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया? इसके बारे में जानकारी सामने आना अभी बाकी है.

ईरान के सरकारी न्यूज चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, IRGC नेवी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि उनके जवाबी हमले का मकसद इस इलाके में मौजूद अमेरिकी सेना के ठिकानों को निशाना बनाना था.

IRGC नेवी ने बयान में कहा कि यह जवाबी कार्रवाई तब की गई जब अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय इलाकों में हवाई हमले किए. यह हमला अमेरिका के "अपने वादों को तोड़ने के पुराने रवैये" का ही एक हिस्सा था.

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बयान के मुताबिक, इस हमले के लिए वॉशिंगटन ने “कई बहाने बनाए, जिनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नियमों का पालन ना करने वाले एक जहाज का गैर-कानूनी रास्ते से गुजरना भी शामिल था.” अमेरिकी ठिकानों पर ये हमले तब हुए जब IRGC ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी थी कि पिछले हमलों का जवाब जरूर दिया जाएगा.

कार्गो शिप पर हुआ था हमला

अमेरिकी सेना के मुताबिक, 25 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते वक्त सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज पर ड्रोन हमला हुआ. यह जहाज ओमान के तट के पास से गुजर रहा था. अमेरिका राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस हमले का जिम्मेदार ईरान को ठहराया. उन्होंने कहा कि एक ड्रोन ने कार्गो जहाज के ऊपरी डेक पर हमला किया, जिससे नुकसान तो हुआ लेकिन जहाज अपना सफर जारी रखने के काबिल रहा.

डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि यह सीजफायर का एक ‘फूलिश वॉयलेशन’ यानी ‘मूर्खतापूर्ण उल्लंघन’ था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा, तो ट्रंप ने कहा, “आपको पता चल जाएगा.” 

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ताजा तनाव ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ला दिया है. इस पानी के रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई होती है. इसलिए इसमें किसी भी तरह की रुकावट अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और एनर्जी मार्केट के लिए बड़ी चिंता का विषय है.

वीडियो: ईरान के जब्त किए फंड को छोड़ने पर भी ट्रंप ने रख दी शर्त

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