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प्रसून जोशी का ये फैसला राजस्थान सरकार के मुंह पर तमाचा है

वही प्रसून जोशी, जिन्हें सरकार ने सेंसर बोर्ड चीफ के पद पर बिठाया है.

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सेंसर बोर्ड चीफ प्रसून जोशी

'पद्मावती' 'पद्मावत' पर पिछले कई महीनों के घमासान के बावजूद अगर आप प्रसून जोशी को नहीं जानते हैं, तो तत्काल प्रभाव से पीछे जाने वाली बटन दबा दीजिए. जानते हैं या जानना चाहते हैं, तो बहुत-बहुत स्वागत है. प्रसून गीतकार हैं. बड़े वाले... अच्छे वाले. कभी किसी की चांद से सिफारिश करवाते हैं, तो कहीं मस्ती की पाठशाला खोल देते हैं. ऐसे उड़ने वाले कई और रेफरेंस भी दिए जा सकते हैं, पर यहां इतने से काम चला लीजिए. बाकी प्लेलिस्ट के लिए गूगल है.

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तो प्रसून भाईजी जोशी अभी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष हैं. सेंसर बोर्ड याने वो संस्था, जो फिल्मों को सर्टिफिकेट देने का काम करती है. इस संस्था में कई बुद्धिजीवी लोग होते हैं, जो फिल्म देखकर ये डिसाइड करते हैं कि कौन सी फिल्म किस उम्र के लोगों के देखने लायक है. प्रसून जोशी से पहले पहलाज निहलानी इस पद की शोभा बढ़ा रहे थे, पर फिल्म इंडस्ट्री से उनका ताप सहा नहीं गया. तो निहलानी विदा हुए और प्रसून आए.

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पहलाज निहलानी (बाएं) और प्रसून जोशी
पहलाज निहलानी (बाएं) और प्रसून जोशी

प्रसून को लाने वाली है केंद्र सरकार, क्योंकि सेंसर बोर्ड केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंडर आता है. केंद्र में अभी सरकार है भारतीय जनता पार्टी की. वही पार्टी, जिसकी राजस्थान में सरकार है. वही राजस्थान, जहां 'पद्मावत' को लेकर सबसे जोरदार विरोध हो रहा था. और इसी राजस्थान की राजधानी है जयपुर, जहां अभी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल चल रहा है.

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ये भी बड़ा लिटरेचर फेस्टिवल है. इसमें कलम के बड़ेब्बड़े खिलाड़ी बुलाए जाते हैं. लेकिन इस साल प्रसून इस कार्यक्रम में नहीं जा रहे हैं. उन्हें आमंत्रित किया गया था, लेकिन वो नहीं जा रहे हैं. क्यों नहीं जा रहे हैं, इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा है,

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'मैं इस साल जयपुर लिटरेचल फेस्टिवल में हिस्सा नहीं लूंगा और कहना ही पड़ेगा कि मैं साहित्य और कविता प्रेमियों के साथ शानदार वक्त नहीं बिता पाऊंगा. मैं ऐसा इसलिए कर रहा हूं ताकि इवेंट की गरिमा के साथ कोई समझौता या असुविधा न हो. न ही आयोजकों को, न लेखकों और न इसमें आने वाले लोगों को. मैंने अपना काम गंभीरता से किया है और एक संवेदनशील और संतुलित कदम उठाया है. सर्टिफिकेट देने का काम प्रक्रिया के तहत और सुझावों को मानते हुए किया गया, जिसमें समाज और सिनेमा के सरोकारों का ध्यान रखा गया. ये दुखद है कि हम शांतिपूर्ण बातचीत पर भरोसा नहीं कर रहे हैं.'


एक साहित्यिक इवेंट में गुलज़ार (दाएं) और जावेद अख्तर (बाएं) के साथ प्रसून जोशी
एक साहित्यिक इवेंट में गुलज़ार (दाएं) और जावेद अख्तर (बाएं) के साथ प्रसून जोशी

समझ रहे हैं भाई साहब या नहीं. इतने तगड़े बहुमत के साथ समर्थन में आई सरकार ने जिस आदमी को सेंसर बोर्ड चीफ की कुर्सी पर बिठाया है, उसे पूरा भरोसा है कि उसने अपना काम सही से किया है, फिर भी उसे खुद को एक इवेंट में जाने से रोकना पड़ रहा है. वो आदमी, जो कलाकार है, ऐसे इवेंट्स में चार चांद लगाता है, लोग उसे पसंद करते हैं... लेकिन आज वो इस सोच में डूबा है कि उसके जाने से किसी इवेंट में बात न बिगड़ जाए.


दिल्ली में दी लल्लनटॉप के अड्डे पर प्रसून जोशी
दिल्ली में दी लल्लनटॉप के अड्डे पर प्रसून जोशी

प्रसून का ये फैसला राजस्थान सरकार के मुंह पर तमाचा है. कहने वाले ये भी कह सकते हैं कि प्रसून जोशी करणी सेना के आगे झुक गए. इसका संदर्भ ये है कि 'पद्मावत' को सर्टिफिकेट मिलने के बाद करणी सेना ने धमकी दी थी कि वो प्रसून को राजस्थान में घुसने नहीं देंगे. आज प्रसून खुद पीछे हो गए. विवाद की नौबत ही नहीं आने दी. लेकिन क्या ये राजस्थान सरकार के लिए शर्म की बात नहीं है.


'पद्मावती' का विरोध करते करणी सेना के लोग
'पद्मावती' का विरोध करते करणी सेना के लोग

जिन्हें लाइनों के बीच लिखी बातें पढ़नी नहीं आतीं, उन्हें साफ-साफ बताया जाना चाहिए कि यहां 'पद्मावत' फिल्म पर मचे बवाल की बात हो रही है. और कमाल देखिए, प्रसून जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में जाने पर इतनी माथापच्ची कर रहे हैं, वहीं उन्हें इस पद पर बिठाने वालों की तरफ से किसी ने चूं तक नहीं की है. न तो राजस्थान सरकार की तरफ से कोई बयान आया, न सूचना-प्रसारण मंत्रालय की तरफ से और न केंद्र सरकार की तरफ से.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया

मुबारक हो. जब आप जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में मलाई ढूंढ रहे होंगे, तब प्रसून जोशी अपने घर में बैठे होंगे. वो तो 'पद्मावत' देख चुके हैं, अब आप देख आइए. केतन बता रहे थे कि बड़ी अच्छी फिल्म है.




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