मध्य प्रदेश के भोपाल में एक क्लर्क के यहां छापेमारी में 85 लाख रुपये कैश बरामद हुए हैं. भोपाल के बैरागढ़ में रहने वाले हीरो केसवानी मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट (एमईडी) में क्लर्क हैं. मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस की कार्रवाई के विरोध में आरोपी क्लर्क कथित रूप से फिनाइल पी गए.
भोपाल: सरकारी क्लर्क निकला करोड़ों का मालिक, छापेमारी रोकने के लिए फिनाइल पी गया
हीरो केसवानी ने 4000 रुपये की सैलरी के साथ मेडिकल एजुकेशन विभाग में क्लर्क की रोकनी शुरू की थी. आज कई जमीनों, फ्लैट्स और गाड़ियों के मालिक हैं.


एमपी पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने बुधवार 3 अगस्त को हीरो केसवानी के घर छापेमारी की थी. ये छापेमारी आय से अधिक संपत्ति मामले में हुई. केसवानी एमईडी में एक अपर डिविजन क्लर्क हैं, लेकिन उनकी संपत्ति करीब 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, छापेमारी में क्लर्क के घर से कैश के अलावा, ज्वेलरी की रसीदें और कई जमीनों के कागजात भी मिले हैं. करोड़ों रुपये रखने वाले केसवानी दफ्तर टू-व्हीलर से ही जाते थे. आर्थिक अपराध शाखा को केसवानी पर तब शक हुआ, जब उन्होंने जीव सेवा संस्थान की एक महंगी जमीन खरीदी. EOW पहले से इस जमीन से जुड़े एक मामले की जांच कर रही है. सूत्रों ने बताया कि इसी जांच के दौरान केसवानी EOW की नजर में आए.
केसवानी के घर से 85 लाख कैश के अलावा करोड़ों रुपये की जमीन और मकान के डॉक्यूमेंट्स जब्त हुए हैं. जिसे घर बताया जा रहा है, वो असल में तीन मंजिला आलीशान भवन है. बैरागढ़ में बना यह भवन करीब 1.5 करोड़ का है. इसके अलावा केसवानी ने बैरागढ़ के आसपास डेवलप हो रही कॉलोनियों में महंगे फ्लैट खरीदे हैं. ज्यादातर संपत्ति उन्होंने अपनी पत्नी के नाम खरीदी है. कई प्रॉपर्टी को खरीदकर बेची भी है. केसवानी और उनकी पत्नी के बैंक अकाउंट में लाखों रुपये जमा मिले हैं. जबकि पत्नी की आय का कोई जरिया नहीं है. उनके पास तीन महंगी कारें भी मिली हैं.
फिनाइल पी गए क्लर्क केसवानीहिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 54 साल के केसवानी के घर जब EOW की टीम पहुंची तो वो उसे घर में घुसने से रोकने लगे. कहा गया है कि जब जांच टीम नहीं मानी तो केसरवानी ने फिनाइल पी लिया. इसके बाद उन्हें हमीदिया अस्पताल में भर्ती किया गया. उनकी हालत स्थिर है. बैरागढ़ पुलिस स्टेशन टाउन इंस्पेक्टर डीपी सिंह ने बताया कि आत्महत्या की कोशिश करने पर केसवानी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है.
वहीं दैनिक भास्कर अखबार के अनुसार राज्य सरकार ने फिलहाल केसवानी को मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट से हटाकर सागर मेडिकल कॉलेज भेज दिया है. उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच जारी रहेगी. केसवानी ने 4 हजार रुपये महीने की तनख्वाह से नौकरी शुरू की थी. अभी उनकी सैलरी 50 हजार रुपये मासिक है. लेकिन मालिक वे करोड़ों के हैं.
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